Tata Sons में 18.4% हिस्सेदारी रखने वाले Shapoorji Pallonji Group ने Public Listing का समर्थन किया, Tata Trusts अब भी कंपनी को Unlisted रखने के पक्ष में; RBI की Registration Surrender अर्जी खारिज होने के बाद बढ़ी गतिविधि
मुंबई: Tata Group की Holding Company Tata Sons की संभावित Public Listing को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। Tata Sons के दूसरे सबसे बड़े Shareholder Shapoorji Pallonji (SP) Group ने शुक्रवार को कंपनी की Public Listing का समर्थन किया।
SP Group के Chairman Shapoor Mistry ने Reserve Bank of India (RBI) के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि Listing से Tata Sons में Transparency, Accountability और Governance को मजबूत करने का रास्ता खुल सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब Tata Trusts कंपनी को Public Listing के बजाय Unlisted रखने के पक्ष में अपना रुख दोहरा चुका है।
क्या है पूरा मामला?
Tata Sons को आसान भाषा में समझें तो यह Tata Group की Holding Company है। Group की कई बड़ी कंपनियों में Tata Sons की हिस्सेदारी है और इसी वजह से कंपनी का Ownership Structure पूरे Tata Group के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी Tata Trusts के पास है, जबकि SP Group की हिस्सेदारी करीब 18.4% है। SP Group Tata Sons का दूसरा सबसे बड़ा Shareholder है। अब विवाद इस बात पर है कि Tata Sons को Share Market में List किया जाए या इसे Private और Unlisted Company के रूप में ही रखा जाए।
SP Group Listing के समर्थन में क्यों?
SP Group का तर्क है कि Tata Sons की Public Listing से कंपनी की Value ज्यादा पारदर्शी तरीके से सामने आएगी। इसके अलावा Shareholders को अपनी हिस्सेदारी की Market Value जानने और जरूरत के मुताबिक उसे Monetise करने का अवसर मिलेगा।
SP Group के लिए यह मुद्दा Financial जरूरतों से भी जुड़ा है। Group पर कर्ज का दबाव है और Tata Sons में उसकी बड़ी हिस्सेदारी एक महत्वपूर्ण Asset है। Reuters के मुताबिक, SP Group ने जुलाई में करीब 2.25 अरब डॉलर की Refinancing भी की थी, जिसमें Tata Sons के Shares का इस्तेमाल किया गया था।
Shapoor Mistry ने अपने बयान में Listing को सिर्फ Shareholder के आर्थिक हित से जोड़ने के बजाय Transparency और Accountability का विषय बताया। उन्होंने Tata Sons और Tata Trusts के साथ आगे बेहतर Partnership और Engagement की भी बात कही।
RBI के फैसले से क्यों बढ़ी हलचल?
इस पूरे मामले में RBI की भूमिका सबसे अहम है।
RBI ने Tata Sons को Upper-Layer NBFC की श्रेणी में रखा था। Tata Sons ने मार्च 2024 में इस Regulatory Framework से बाहर निकलने के लिए अपना Registration Surrender करने का आवेदन दिया था।
लेकिन 11 सितंबर 2026 को RBI ने Tata Sons की यह अर्जी खारिज कर दी और कंपनी को Upper-Layer NBFC पर लागू नियमों के अनुसार जरूरी Compliance करने को कहा। इसके बाद 17 सितंबर को Tata Sons Board ने Regulatory Requirements के अनुपालन के लिए आगे कदम उठाने का फैसला किया।
यहीं से Listing का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—RBI के फैसले को सीधे “IPO का आदेश” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। Tata Trusts के Chairman Noel Tata का कहना है कि RBI के Communication में सीधे “Listing” का निर्देश नहीं है। RBI ने Registration Surrender की अर्जी खारिज करते हुए लागू Upper-Layer NBFC Regulations का पालन करने को कहा है।
Tata Trusts क्यों Listing के खिलाफ?
Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। Trusts का कहना है कि Tata Sons को Unlisted रखने की नीति पहले भी अपनाई गई है और RBI के फैसले के बाद भी सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, सिर्फ Listing को ही एकमात्र रास्ता नहीं माना जाना चाहिए।
Tata Trusts का यह भी तर्क है कि Tata Sons की मौजूदा Ownership Structure का एक बड़ा उद्देश्य Group की संपत्तियों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को Trusts की Charitable Activities के लिए इस्तेमाल करना है। Noel Tata ने Board के सामने Listing से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर इसी आधार पर आपत्ति दर्ज की है।
₹25,000 करोड़ का Proposal क्या है?
Listing के बीच SP Group की Financial जरूरतों को पूरा करने का एक दूसरा रास्ता भी सामने आया है।
17 सितंबर को Tata Trusts के Chairman Noel Tata ने Tata Sons Board Meeting में SP Group का एक Proposal रखा। इसमें SP Group की Tata Sons में रखी कुछ हिस्सेदारी को Monetise करने की बात है।
Tata Trusts के आधिकारिक बयान के मुताबिक, SP Group की कंपनियों Sterling Investments Corporation Pvt Ltd और Cyrus Investments Pvt Ltd के पास मौजूद Tata Sons Shares के एक हिस्से की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की Gross Consideration हासिल करने का प्रस्ताव है।
इस प्रस्ताव के तहत Share Buyout को दो चरणों में 18 महीने के दौरान पूरा करने की बात कही गई है। इसके लिए Tata Sons को NCLT के जरिए Selective Capital Reduction की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
यानी SP Group को अपनी Tata Sons हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर Liquidity मिल सकती है, जबकि Tata Sons की तत्काल Public Listing के बिना भी इस Financial जरूरत को पूरा करने का रास्ता तलाशा जा सकता है।
अब मामला किस मोड़ पर है?
एक तरफ SP Group Public Listing का समर्थन कर रहा है, वहीं Tata Trusts Tata Sons को Unlisted रखने के विकल्प पर कायम है। इसी बीच RBI के Regulatory Framework के कारण Tata Sons को आगे Compliance की प्रक्रिया करनी है।
Board के सामने अब Listing से जुड़े Regulatory Requirements के साथ-साथ SP Group के ₹25,000 करोड़ वाले Liquidity Proposal पर भी विचार करना है।
फिलहाल Tata Sons की कोई Final IPO Date या Listing Structure घोषित नहीं हुआ है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कंपनी कब और किस तरीके से Stock Market में आएगी।
एक नजर में पूरा मामला
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| Tata Trusts की हिस्सेदारी | करीब 66% |
| SP Group की हिस्सेदारी | करीब 18.4% |
| SP Group का रुख | Public Listing के समर्थन में |
| Tata Trusts का रुख | Tata Sons को Unlisted रखने के पक्ष में |
| RBI का फैसला | Registration Surrender की अर्जी खारिज |
| वैकल्पिक Proposal | कम से कम ₹25,000 करोड़ की Liquidity |
| Share Buyout | दो Tranches में 18 महीने |
| Final IPO Date | अभी घोषित नहीं |
निष्कर्ष
Tata Sons की Listing का मुद्दा अब सिर्फ Share Market में आने का सवाल नहीं रह गया है। इसके पीछे Tata Sons के Ownership Structure, SP Group की Financial जरूरतों, Tata Trusts की भूमिका और RBI के Regulatory Framework—चारों पहलू जुड़े हुए हैं।
आने वाले Board और Regulatory फैसले यह तय करेंगे कि Tata Sons की आगे की संरचना किस दिशा में जाती है।