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Home - अपराध - 13 साल बाद तरुण तेजपाल दोषी करार: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

13 साल बाद तरुण तेजपाल दोषी करार: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

Last updated: अगस्त 6, 2026 4:26 अपराह्न
By : Dinman News Network
Published on : 3 महीना पहले
13 साल बाद तरुण तेजपाल दोषी करार
तरुण तेजपाल, Photo Credit - OpIndia
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करीब 13 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में से एक में बड़ा फैसला आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूर्व Tehelka एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को 2013 के रेप मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया। अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश भी दिया है। फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले की एक बार फिर पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई है।

करीब एक दशक पहले सामने आया यह मामला सिर्फ एक आपराधिक मुकदमा नहीं था। आरोपी देश के एक बड़े मीडिया संस्थान का प्रमुख था, इसलिए इसने मीडिया संस्थानों में शक्ति के दुरुपयोग, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के मामलों में जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी। अब हाई कोर्ट के फैसले ने इस बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।

क्या है 2013 का पूरा मामला?

घटना नवंबर 2013 की है। गोवा में आयोजित THiNK Fest के दौरान Tehelka में काम करने वाली एक जूनियर महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि होटल की लिफ्ट में दो अलग-अलग मौकों पर तरुण तेजपाल ने उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाए और उसका यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता के अनुसार, दोनों घटनाएं कुछ ही दिनों के अंतराल पर हुईं और उस समय वह आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में गोवा गई हुई थीं। घटना के बाद पीड़िता ने संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल लिखकर पूरी जानकारी दी।

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ईमेल सामने आने के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। शुरुआती दौर में तरुण तेजपाल ने इसे “गलतफहमी” बताया और छह महीने के लिए संपादकीय जिम्मेदारियों से अलग होने की घोषणा की। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर लिया।

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23 नवंबर 2013 को गोवा पुलिस ने रेप समेत भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज, ईमेल, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए गए। इन्हीं के आधार पर 30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन मुकदमे की सुनवाई जारी रही। साल 2017 में ट्रायल की औपचारिक सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान अदालत में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाकर दोष सिद्ध करने की कोशिश की, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए अपनी दलीलें पेश कीं। सुनवाई कई वर्षों तक चली और यह मामला लगातार सार्वजनिक और कानूनी बहस का विषय बना रहा।

2021 में क्यों बरी हुए थे तरुण तेजपाल ?

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मई 2021 में गोवा की सेशन कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने जांच प्रक्रिया और कुछ साक्ष्यों के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसी आधार पर तेजपाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। हालांकि, इस फैसले से गोवा सरकार और पीड़िता दोनों सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया। इसके बाद दोनों पक्षों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की।

हाई कोर्ट ने क्यों पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला?

लंबी सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड का समग्र तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया था। हाई कोर्ट ने माना कि मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों की सही कानूनी व्याख्या नहीं की गई और इसी आधार पर तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के बाद तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। यह फैसला आने के साथ ही करीब 13 साल से चल रही कानूनी प्रक्रिया में बड़ा मोड़ आ गया।

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हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनके वकीलों ने सजा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए उनकी उम्र, पहले किसी आपराधिक रिकॉर्ड का न होना और पहले से बिताई गई हिरासत की अवधि का हवाला दिया है। ऐसे में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यदि सुप्रीम कोर्ट अपील स्वीकार करता है तो मामले की आगे सुनवाई होगी और अंतिम कानूनी निष्कर्ष वहीं से सामने आएगा।

यह मामला भारत में #MeToo आंदोलन से पहले सामने आए सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में गिना जाता है। चूंकि आरोपी देश के एक बड़े मीडिया संस्थान का प्रमुख था, इसलिए इसने मीडिया संगठनों में शक्ति के असंतुलन, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

TAGGED:Bombay High CourtCrime NewsGoa CaseIndia Newsतरुण तेजपाल
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