नई दिल्ली: प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने आखिरकार अपना 26 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने यह फैसला केंद्र सरकार से मिले तीन महत्वपूर्ण लिखित आश्वासनों के बाद लिया। वांगचुक पिछले 28 जून से छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका कहना था कि देशभर में सामने आए कथित NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है, इसलिए सरकार को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना चाहिए।
क्यों शुरू किया था अनशन?
सोनम वांगचुक ने छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी से युवाओं का भरोसा टूट रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की थी कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका यह आंदोलन धीरे-धीरे देशभर के छात्र संगठनों के लिए एक बड़ा प्रतीक बन गया।
सरकार ने दिए कौन-से तीन लिखित आश्वासन?
सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बातचीत के बाद उन्हें तीन प्रमुख लिखित आश्वासन दिए गए।
पहला, संसद में परीक्षा पेपर लीक और दोषियों की जवाबदेही पर गंभीर चर्चा कराई जाएगी।
दूसरा, पेपर लीक विवाद से प्रभावित उन छात्रों के परिवारों के लिए उचित सहायता और राहत सुनिश्चित करने पर सरकार विचार करेगी, जिनकी मौत या आत्महत्या के मामले इस विवाद से जुड़े बताए गए हैं।
तीसरा, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई या नए मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे।
वांगचुक ने कहा कि इन लिखित आश्वासनों के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
‘भूख का अंत, जवाबदेही की शुरुआत’
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि यह केवल भूख हड़ताल का अंत नहीं, बल्कि “जवाबदेही की शुरुआत” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनकी नजर सरकार द्वारा किए गए वादों के क्रियान्वयन पर रहेगी। उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा पेपर लीक को गंभीर अपराध बताते हुए सख्त कानून लाने की बात कही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि पेपर लीक मामलों में कड़े दंड, फास्ट ट्रैक कोर्ट और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नए विधायी कदम उठाए जा सकते हैं। इसी दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने सोनम वांगचुक से मुलाकात कर लिखित आश्वासन सौंपे, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
क्या छात्रों का आंदोलन खत्म हो गया?
हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन कई छात्र संगठनों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। उनका कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सरकार को अपने वादों को जमीन पर लागू करके दिखाना होगा। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
आगे क्या होगा?
अब पूरे देश की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को किस तरह लागू करती है। यदि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नए कानून या नीतियां लागू होती हैं, तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि वादों पर अमल नहीं हुआ तो छात्र संगठनों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।