सासाराम। रोहतास के सासाराम स्थित ऐतिहासिक धरोहर शेरशाह रौजा तालाब का पानी प्रदूषित होने से भारी मात्रा में मछलियों के मरने का मामला सामने आया है। तालाब में मत्स्य पालन के लिए डाली गई मछलियों के मरने से आसपास दुर्गंध फैल रही है। मृत मछलियों का अनुमानित वजन करीब आठ क्विंटल बताया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब चार से पांच लाख रुपये आंकी जा रही है।
तालाब में मछलियों के मरने से निकलने वाली सड़ांध के कारण पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शेरशाह रौजा सासाराम की ऐतिहासिक धरोहर है और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए तालाब भी परिसर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दशक से अधिक समय से हो रहा मछली पालन
शेरशाह रौजा के तालाब में पिछले एक दशक से अधिक समय से मछली पालन किया जा रहा है। इसके लिए पुरातत्व विभाग की ओर से ठेका दिया जाता है।
मछली पालन का ठेका लेने वाले संवेदक दीना चौधरी के अनुसार, पहले इनलेट नहर के माध्यम से तालाब में पानी पहुंचता था। वहीं आउटलेट नहर से तालाब का पुराना पानी बाहर निकलने की व्यवस्था थी।
उनके अनुसार, पानी के आने और बाहर निकलने की यह व्यवस्था पिछले कई वर्षों से ठप है। इसके कारण तालाब के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और मछलियों के मरने की समस्या सामने आई है।
नहर का जीर्णोद्धार हुआ, फिर भी नहीं पहुंच रहा पानी
बताया गया कि तालाब में पानी पहुंचाने वाली इनलेट नहर का जीर्णोद्धार भी किया गया है। इसके बावजूद नहर के जरिए तालाब में पानी नहीं डाला जा रहा है।
पानी के प्राकृतिक प्रवाह की व्यवस्था प्रभावित होने के कारण तालाब में लंबे समय से जमा पानी दूषित हो रहा है। इसी वजह से मछलियों के मरने और तालाब से दुर्गंध आने की समस्या सामने आई है।
ASI ने पानी की व्यवस्था ठप होने को बताया वजह
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के सहायक संरक्षक अमृत झा ने बताया कि तालाब के पानी का संशोधन नहीं होने के कारण यह समस्या सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि तालाब का गंदा पानी बाहर निकालने और साफ पानी लाने के लिए बनाई गई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। पानी की निकासी और नए पानी की आपूर्ति नहीं होने से तालाब का पानी दूषित हो रहा है।
पर्यटकों को भी हो रही परेशानी
तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के बाद वहां से सड़ांध आने लगी है। इसका असर शेरशाह रौजा घूमने आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है।
ऐतिहासिक स्थल होने के कारण यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में तालाब के आसपास फैली दुर्गंध पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी
तालाब में पानी पहुंचाने के लिए इनलेट नहर से पानी भेजने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। ऐसे में अब तालाब में साफ पानी पहुंचाने और पुराने दूषित पानी की निकासी की व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की जरूरत सामने आ रही है।
मछलियों की बड़ी संख्या में मौत के बाद तालाब की सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल करीब आठ क्विंटल मछलियों के मरने और लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान बताया गया है।