Nifty और Sensex लगातार आठवें हफ्ते गिरे; अब RBI Policy, TCS Q2 Results, Crude Oil, FII Selling और US Bond Yields तय कर सकते हैं बाजार की दिशा
नई दिल्ली: Share Market: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला कारोबारी सप्ताह काफी अहम रहने वाला है। Nifty 50 और Sensex लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए हैं, जो करीब 25 साल में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला है। अब बाजार के सामने सवाल है कि क्या लगातार बिकवाली के बाद अक्टूबर के पहले कारोबारी सप्ताह में राहत मिलेगी या कमजोरी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
1 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में Sensex 570.59 अंक गिरकर 71,909.70 पर और Nifty 50 198.50 अंक टूटकर 22,421.95 पर बंद हुआ था। इसके साथ दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद रहा, इसलिए अगला कारोबारी सत्र 5 अक्टूबर को होगा। Pasted text
अब 5 से 9 अक्टूबर के बीच बाजार की चाल कई बड़े घरेलू और वैश्विक संकेतकों से प्रभावित हो सकती है।

आठ हफ्तों की लगातार गिरावट ने क्यों बढ़ाई चिंता?
भारतीय बाजार में हालिया कमजोरी सामान्य correction से आगे बढ़कर एक लंबी losing streak में बदल गई है। Reuters के मुताबिक, Nifty 50 में आठ हफ्तों के दौरान कुल करीब 8.7 फीसदी और Sensex में करीब 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। यह लगातार आठ साप्ताहिक गिरावट लगभग 25 साल में सबसे लंबी श्रृंखला है।
सितंबर में भी दोनों benchmark indices में करीब 6 फीसदी की गिरावट रही। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और अमेरिकी bond yields में बढ़ोतरी ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा।
हालांकि, इतनी लंबी गिरावट के बाद बाजार के कुछ technical indicators यह संकेत दे रहे हैं कि short-term rebound की संभावना बन सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार का trend पूरी तरह बदल गया है। केवल इतना कहा जा सकता है कि लगातार बिकवाली के बाद कुछ हिस्सों में bargain buying या short covering देखने को मिल सकती है। Pasted text
1. RBI MPC Meeting: सबसे बड़ा घरेलू trigger
आने वाले सप्ताह में सबसे बड़ा घरेलू event Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee यानी MPC की बैठक होगी।

RBI की MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है और policy decision 7 अक्टूबर को आने वाला है। अगस्त की बैठक में repo rate 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया था।
इस बार बाजार का ध्यान खास तौर पर इस बात पर रहेगा कि RBI महंगाई और बढ़ती energy prices को देखते हुए interest rate को लेकर क्या रुख अपनाता है।
Reuters के एक economists’ poll में अक्टूबर बैठक में 25 basis points की rate hike की उम्मीद जताई गई थी। अगर RBI का फैसला बाजार की मौजूदा उम्मीदों से अलग रहता है, तो banking, financial और interest-rate sensitive stocks में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
यानी 7 अक्टूबर का RBI फैसला अगले सप्ताह बाजार के लिए सबसे बड़ा event risk हो सकता है। Pasted text

2. TCS के Q2 Results से शुरू होगा Earnings Season
अक्टूबर का दूसरा बड़ा trigger कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे हैं।
Tata Consultancy Services यानी TCS सितंबर तिमाही के results घोषित करने वाली शुरुआती बड़ी कंपनियों में शामिल है। बाजार की नजर खास तौर पर IT sector की demand, US business, margins, deal wins और management commentary पर रहेगी।
TCS ने जून तिमाही में 2.7 फीसदी YoY US-dollar revenue growth दर्ज की थी और उसका Q1 operating margin 24 फीसदी था। कंपनी ने उस तिमाही में AI-led business transformation deals सहित कई बड़े contracts की भी जानकारी दी थी।
अब सितंबर तिमाही के नतीजों में निवेशक यह देखेंगे कि global technology spending, AI-related demand और US market conditions का कंपनी के कारोबार पर क्या असर पड़ा।

TCS का result केवल TCS के शेयर तक सीमित नहीं रह सकता। IT sector की commentary से Infosys, HCLTech और दूसरे IT stocks में भी sentiment प्रभावित हो सकता है। Pasted text
3. Crude Oil: भारत के लिए सबसे बड़ा Global Risk
कच्चे तेल की कीमतें इस समय भारतीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं।
हाल के कारोबारी सत्र में Brent crude करीब $102 प्रति बैरल के आसपास था। ऊंचा crude भारत जैसे बड़े oil importer के लिए कई स्तरों पर चुनौती पैदा करता है। इससे import bill, inflation, current account और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
अगर crude की कीमत और ऊपर जाती है तो इसका असर उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है जिनकी लागत energy prices से प्रभावित होती है।

दूसरी तरफ, crude में गिरावट बाजार के लिए राहत का कारण बन सकती है। इसलिए अगले पांच कारोबारी दिनों में oil price movement पर लगातार नजर रहेगी। Pasted text
4. FII/FPI Selling और रुपये की चाल
भारतीय बाजार की हालिया कमजोरी में foreign investors की बिकवाली भी बड़ा factor रही है।
सितंबर में foreign institutional investors की भारी selling ने market sentiment को प्रभावित किया। Reuters के अनुसार 2026 में विदेशी निवेशकों का equity outflow रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। साथ ही भारतीय रुपया भी दबाव में रहा।
1 अक्टूबर के सत्र में भी foreign institutional investors की net selling और domestic institutional investors की buying के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार उस दिन FIIs ने करीब ₹9,484 करोड़ की net selling, जबकि domestic institutions ने करीब ₹10,042 करोड़ की खरीदारी की।

अगर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी foreign selling को absorb करती रहती है तो बाजार को कुछ support मिल सकता है। लेकिन FII selling और तेज हुई तो rebound टिकना मुश्किल हो सकता है। Pasted text
5. US Bond Yields और Global Market Cues
अमेरिकी bond yields में तेज बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण है।
जब US Treasury yields ऊपर जाती हैं तो emerging markets से विदेशी पूंजी के बाहर जाने का जोखिम बढ़ सकता है। इससे भारत जैसे बाजारों पर valuation और liquidity दोनों का दबाव बढ़ सकता है।
इसके साथ US-Iran और West Asia से जुड़े geopolitical developments भी crude oil के जरिए भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।

अगर geopolitical tension कम होती है और oil prices नीचे आती हैं तो बाजार को राहत मिल सकती है। इसके उलट supply disruption की चिंता बढ़ती है तो crude फिर ऊपर जा सकता है और equity sentiment कमजोर हो सकता है। Pasted text
अगले 5 दिनों में बाजार को प्रभावित करने वाले 5 बड़े संकेत
| संकेत | बाजार पर संभावित असर |
|---|---|
| RBI MPC Meeting | Interest rate और banking stocks पर असर |
| TCS Q2 Results | IT sector और earnings sentiment |
| Crude Oil | Inflation, रुपया और import bill पर असर |
| FII/FPI Selling | Liquidity और market sentiment |
| US Bond Yields | Foreign capital और valuation पर दबाव |
Nifty के लिए 22,400 का स्तर क्यों महत्वपूर्ण?
तकनीकी नजरिए से भी अगला सप्ताह महत्वपूर्ण है।
1 अक्टूबर को Nifty 50 22,421.95 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र में index 22,217.30 तक नीचे गया था।
विश्लेषकों ने Nifty के लिए 22,400-22,600 के आसपास के long-term technical support zone को महत्वपूर्ण बताया है। कुछ analysts का मानना है कि लगातार गिरावट और oversold conditions के कारण यहां से short-term rebound की संभावना बन सकती है।

लेकिन support zone के नीचे निर्णायक कमजोरी बाजार में और selling pressure ला सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में केवल headline index level नहीं, बल्कि closing levels और volume भी महत्वपूर्ण रहेंगे। Pasted text
Sensex की स्थिति क्या है?
Sensex ने 1 अक्टूबर को 71,909.70 पर कारोबार खत्म किया। दिन के दौरान index 71,292.88 तक फिसल गया था।
Technical analysts के अनुसार Sensex के लिए 71,000-71,200 का क्षेत्र महत्वपूर्ण support माना जा रहा है, जबकि 72,300-72,500 के आसपास resistance देखा जा रहा है।
अगर index support zone के ऊपर टिकता है तो short-term recovery की कोशिश हो सकती है। लेकिन लगातार foreign selling और global risk-off sentiment के बीच किसी भी recovery को फिलहाल सावधानी से देखना होगा। Pasted text

क्या बाजार में बड़ी तेजी लौट सकती है?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
बाजार लगातार आठ हफ्ते गिर चुका है और technical indicators oversold conditions की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में bounce संभव है। लेकिन एक short-term bounce और sustained trend reversal में फर्क होता है।
अगर RBI का फैसला बाजार के मुताबिक रहता है, crude नरम होता है, FII selling कम होती है और TCS समेत शुरुआती Q2 results उम्मीदों के मुताबिक आते हैं, तो sentiment में सुधार हो सकता है।
इसके उलट rate hike का surprise, crude में और तेजी, US yields में बढ़ोतरी या geopolitical तनाव बढ़ने से बाजार में फिर selling pressure आ सकता है। Pasted text

अगले 5 कारोबारी दिनों में किन सेक्टरों पर नजर?
- Banking और Financials: RBI policy के कारण सबसे ज्यादा sensitivity रह सकती है।
- IT: TCS के results और US technology demand sector के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
- Oil & Gas: crude oil movement से sector-specific असर देखने को मिल सकता है।
- Auto: हालिया market correction में auto stocks पर दबाव रहा है, इसलिए recovery या further selling दोनों पर नजर रहेगी।
- Midcap और Smallcap: broader market में volatility benchmark indices से अधिक रह सकती है। Pasted text
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अगले पांच कारोबारी दिनों में सिर्फ यह देखने के बजाय कि Nifty ऊपर गया या नीचे, निवेशकों को कुछ प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए:
- RBI का policy decision और commentary
- Nifty का 22,400 के आसपास व्यवहार
- Sensex का 71,000-71,200 support zone
- Brent crude की कीमत
- FII/FPI और DII flows
- रुपये की चाल
- US Treasury yields
- TCS Q2 results
- West Asia की geopolitical स्थिति
इन संकेतकों का संयुक्त प्रभाव बाजार की दिशा तय करने में ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। Pasted text
आठ हफ्तों की गिरावट के बाद अब क्या?
भारतीय शेयर बाजार इस समय एक ऐसे मोड़ पर है जहां कमजोरी और rebound दोनों की संभावना मौजूद है।
लगातार आठ हफ्तों की गिरावट ने valuation के कुछ हिस्सों को आकर्षक बनाया हो सकता है, लेकिन macro risks अभी खत्म नहीं हुए हैं। महंगा crude, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कमजोर रुपया और ऊंची global yields बाजार के सामने बने हुए जोखिम हैं।

वहीं दूसरी तरफ, oversold technical conditions, घरेलू institutional buying और Q2 earnings season बाजार को support देने वाले factors बन सकते हैं।
इसलिए 5 से 9 अक्टूबर का सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए केवल एक और trading week नहीं है। RBI policy और earnings season की शुरुआत एक साथ होने से volatility बढ़ सकती है। Pasted text
आठ हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार अब अक्टूबर के पहले पूरे कारोबारी सप्ताह में प्रवेश कर रहा है। Nifty 50 और Sensex की यह losing streak करीब 25 साल में सबसे लंबी है।
अगले पांच कारोबारी दिनों में RBI MPC का फैसला, TCS के Q2 results, crude oil prices, FII/FPI flows और US bond yields सबसे अहम triggers रहेंगे।

Nifty के लिए 22,400 के आसपास का क्षेत्र और Sensex के लिए 71,000-71,200 का zone technical नजरिए से महत्वपूर्ण है। अगर इन स्तरों पर buying support मिलता है तो short-term rebound संभव है। लेकिन अगर global risk factors और foreign selling का दबाव बना रहता है तो बाजार में volatility और बढ़ सकती है।
इसलिए अगले सप्ताह को लेकर सबसे उचित निष्कर्ष फिलहाल यही है कि बाजार में बड़ा action संभव है, लेकिन उसकी दिशा किसी एक factor से नहीं बल्कि RBI, earnings, crude और global liquidity के संयुक्त संकेतों से तय होगी।
