नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार दोपहर पांच मंजिला PG की इमारत कुछ ही सेकंड में मलबे में बदल गई। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया है। घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर समेत अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
राहत और बचाव अभियान सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच दिल्ली सरकार ने कार्रवाई करते हुए MCD के दक्षिणी जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, पुलिस ने इमारत के कथित मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ लिया है।
रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा
सत्य निकेतन की संकरी गली में स्थित यह इमारत लड़कों के लिए चलाए जा रहे PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। इसे ‘होस्टल डेज’ के नाम से संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था।
रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक पूरी पांच मंजिला संरचना भरभराकर नीचे आ गई। इमारत गिरते ही आसपास धूल का गुबार छा गया और अंदर मौजूद लोगों के मलबे में फंसने से अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि इमारत कई दशक पुरानी थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसे कुछ समय के लिए खाली कराया गया था और बाद में मरम्मत के बाद दोबारा PG के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा।
रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त में यहां छात्रों को रहना शुरू कराया गया था, जबकि मरम्मत का कुछ काम अभी भी चल रहा था।
पानी भरने और मरम्मत कार्य से कमजोर हुई संरचना?
हादसे की असली वजह अभी जांच के दायरे में है। शुरुआती जांच में बेसमेंट में लंबे समय से पानी जमा होने और वहां चल रहे मरम्मत/नवीनीकरण कार्य को इमारत की संरचना कमजोर होने की संभावित वजह माना जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक पानी जमा होने और निर्माण कार्य के कारण पुराने ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ा हो सकता है।
एक जीवित बचे छात्र ने भी इमारत में पहले से दरारें दिखाई देने और बेसमेंट में पानी भरने की बात बताई है। हालांकि इन दावों और हादसे की पूरी वजह की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी। इसलिए फिलहाल किसी एक कारण को हादसे की अंतिम वजह नहीं माना जा सकता।
रातभर चला रेस्क्यू, मलबे में जिंदगी की तलाश
हादसे के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंच गए। सत्य निकेतन की संकरी गलियों और भारी मलबे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। बचावकर्मियों ने मशीनों, खोजी कुत्तों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की।
सोमवार तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका था। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई गई। सोमवार को मलबे से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई।
अधिकारियों के मुताबिक मलबे का बड़ा हिस्सा हटाया जा चुका था और बचाव अभियान दूसरे दिन भी जारी रहा। हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी।
मकान मालिक पर FIR, भिवाड़ी से पकड़ा गया
हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के कथित मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ FIR दर्ज की। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 290 और 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले में इमारत की हालत, मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
हादसे के बाद हरिराम बंसल पुलिस की पकड़ से बाहर था। दिल्ली पुलिस ने उसकी तलाश के लिए 10 टीमें लगाईं और उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया। बाद में पुलिस ने उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ लिया। अब उससे हादसे और इमारत में चल रहे निर्माण एवं मरम्मत कार्य के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
MCD के पांच अधिकारी निलंबित
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई हुई। MCD ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इनमें:
- राकेश कुमार — डिप्टी कमिश्नर, दक्षिणी जोन
- रणवीर सिंह — सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, दक्षिणी जोन
- ललित कुमार गोयल — एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग)
- सुनील चौहान — असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग)
- आशीष कुमार — जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग)
शामिल हैं।
यह कार्रवाई इमारत की निगरानी और संभावित प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय करने की दिशा में की गई है। दिल्ली सरकार ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
चार मंजिल से ज्यादा की अवैध इमारतों पर कार्रवाई
हादसे के बाद MCD ने चार मंजिल से अधिक की अवैध निर्माण वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आदेश दिया है। सत्य निकेतन में एक पड़ोसी इमारत को भी सुरक्षा कारणों से खाली कराया गया।
खतरनाक मानी गई अन्य संरचनाओं की भी जांच की जा रही है और जरूरत के मुताबिक उन्हें सील या गिराने की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से PG, स्कूल, नर्सिंग होम और अन्य सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन कराने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना जरूरी सुरक्षा जांच के जर्जर या असुरक्षित इमारतों में लोगों को रहने या अन्य गतिविधियां संचालित करने की अनुमति न मिले।
हाईकोर्ट में PIL, छात्र सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी पहुंची है। याचिका में दिल्ली के PG और छात्रावासों का व्यापक सुरक्षा
ऑडिट कराने, हादसे की स्वतंत्र जांच कराने और मृतकों के परिवारों को प्रति परिवार एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी।
हालांकि, इस स्तर पर यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने MCD या दिल्ली यूनिवर्सिटी को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए लंबे समय से प्रमुख आवासीय इलाकों में शामिल रहा है। कैंपस के आसपास सीमित हॉस्टल सुविधाओं के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के मकानों पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे में इस हादसे ने दिल्ली के छात्र इलाकों में निजी PG की सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इतनी पुरानी इमारत में PG कैसे संचालित हो रहा था, मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं और संबंधित विभागों की निगरानी में कहां चूक हुई।
पुलिस और मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट के बाद ही हादसे की पूरी जिम्मेदारी और इमारत ढहने की अंतिम वजह स्पष्ट हो सकेगी।