27 या 28 अगस्त की उलझन खत्म, 28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन; पूर्णिमा के साथ चंद्रग्रहण का भी संयोग, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण
नई दिल्ली। रक्षाबंधन को लेकर इस साल लोगों के बीच तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। कहीं 27 अगस्त तो कहीं 28 अगस्त को राखी मनाने की बात कही जा रही है। पंचांग की गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में पूर्णिमा और भद्रा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 28 अगस्त को राखी बांधना उचित माना गया है।
इस बार रक्षाबंधन इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन साल का अंतिम आंशिक चंद्रग्रहण पड़ रहा है। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि ग्रहण को लेकर लोगों के मन में उठ रहे कई सवालों के बावजूद भारत में सामान्य रूप से रक्षाबंधन मनाने की बात कही जा रही है।
27 अगस्त को क्यों नहीं बांधें राखी?
पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त सुबह करीब 9:48 बजे समाप्त होगी। लेकिन 27 अगस्त को भद्रा की स्थिति होने के कारण उस दिन राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।

धार्मिक मान्यता में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए पूर्णिमा होने के बावजूद 27 अगस्त को राखी बांधने के बजाय अगले दिन का समय चुना गया है।
यानी बहनों को तारीख को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस साल रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
राखी बांधने का शुभ समय कब है?
दिल्ली के पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इस दौरान बहनें भाई को तिलक लगाकर राखी बांध सकती हैं और उसकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं।
हालांकि शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। उदाहरण के लिए बिहार के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर के कारण राखी बांधने का समय भी थोड़ा बदलता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
चंद्रग्रहण से रक्षाबंधन पर क्या असर?
28 अगस्त को ही साल का अंतिम आंशिक चंद्रग्रहण भी होगा। रिपोर्टों के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण का असर मुख्य रूप से यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और कुछ अन्य क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत में चंद्रमा ग्रहण के समय क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए यहां से इसे देखा नहीं जा सकेगा।
ग्रहण दिखाई न देने के कारण भारत में सूतक मानने को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मत सामने आ रहे हैं। कई पंचांग और ज्योतिषीय स्रोतों के अनुसार जब ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता तो वहां सूतक मानने की बाध्यता नहीं होती। इसलिए भारत में रक्षाबंधन की पूजा और राखी बांधने की परंपरा सामान्य रूप से की जा सकती है। फिर भी जिन परिवारों में स्थानीय परंपरा के अनुसार ग्रहण के नियम माने जाते हैं, वे अपने पंचांग या पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दे सकते हैं।
ऐसे करें राखी की पूजा
रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है। पहले भाई को तिलक लगाया जाता है। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती की जाती है और दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। बहन भाई की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।
रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं है। यह भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, भरोसे और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। इस बार तारीख को लेकर बनी उलझन अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। 28 अगस्त को राखी मनाएं, स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय चुनें और चंद्रग्रहण को लेकर अनावश्यक डर से बचें।