उत्तर प्रदेश: भदोही जिले में गंगा तट पर स्थित बाबा सेमराधनाथ धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा और आस्था के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। काशी और प्रयाग के बीच स्थित यह प्राचीन शिवधाम अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग किसी गर्भगृह में नहीं, बल्कि करीब 15 फीट गहरे कुएं के भीतर विराजमान है। श्रद्धालु सीढ़ियों के सहारे नीचे उतरकर बाबा का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं।
सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि, सिर्फ सावन ही नहीं बल्कि हर सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के बावजूद आज तक यहां किसी बड़े हादसे की खबर सामने नहीं आई है, जिसे श्रद्धालु बाबा की कृपा मानते हैं।
ऐसे हुई मंदिर की स्थापना
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। उस समय सड़क और रेल जैसी सुविधाएं नहीं थीं और व्यापारी गंगा के रास्ते नाव से व्यापार करने आते-जाते थे।
कहा जाता है कि एक व्यापारी की नाव गंगा की बीच धारा में अचानक फंस गई। काफी प्रयास के बाद भी नाव आगे नहीं बढ़ी। उसी रात व्यापारी को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए और कहा कि जिस स्थान पर उनका शिवलिंग है, वहां खुदाई बंद कराकर मंदिर का निर्माण कराया जाए।
सुबह व्यापारी ने स्वप्न के अनुसार खुदाई कराई तो वहां शिवलिंग मिला। इसके बाद उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया और भक्तों के नीचे उतरकर पूजा करने के लिए सीढ़ियां बनवाई गईं। तभी से बाबा सेमराधनाथ की पूजा इसी रूप में होती चली आ रही है।
मनोकामना पूरी होने की मान्यता
बाबा सेमराधनाथ धाम को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
कैसे पहुंचे बाबा सेमराधनाथ धाम
यह प्राचीन मंदिर भदोही जिले में जंगीगंज बाजार से लगभग 8 किलोमीटर दक्षिण दिशा में गंगा तट पर स्थित है। जंगीगंज से ऑटो रिक्शा, टैक्सी और निजी वाहन के जरिए आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
इसके अलावा जीटी रोड स्थित चकपड़ौना से कौलापुर-सेमराध फोरलेन मार्ग बनने के बाद यहां पहुंचना और भी सुविधाजनक हो गया है। सावन के दौरान इस मार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बाबा सेमराधनाथ धाम आस्था, इतिहास और अनोखी परंपरा का ऐसा संगम है, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां कुएं के भीतर विराजमान महादेव के दर्शन अपने आप में एक दुर्लभ और आध्यात्मिक अनुभव माने जाते हैं।