Patna Ravan Dahan 2026: 90 फीट के रावण, 85 फीट के कुंभकर्ण और 80 फीट के मेघनाद का हुआ दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत के साक्षी बने हजारों दर्शक
पटना। आसमान में उठती आग की ऊंची लपटें, चारों ओर गूंजते जयश्रीराम के जयकारे और मोबाइल कैमरों में इस ऐतिहासिक पल को कैद करने की होड़—मंगलवार को पटना के गांधी मैदान में विजयादशमी का उत्सव अपने पूरे वैभव के साथ दिखाई दिया। श्रीराम के बाण चलने के प्रतीकात्मक क्षण के साथ ही 90 फीट ऊंचा रावण, 85 फीट का कुंभकर्ण और 80 फीट का मेघनाद आग की लपटों में घिर गए। देखते ही देखते तीनों विशाल पुतले धू-धू कर जल उठे और पूरा मैदान बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश से गूंज उठा।
श्री दशहरा कमिटी की ओर से आयोजित इस भव्य रावण दहन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटे। परिवारों के साथ पहुंचे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और उत्सव का साझा अनुभव था। पुतलों के दहन के दौरान उठती आग की लपटें और दर्शकों का उत्साह गांधी मैदान के माहौल को यादगार बना रहे थे।
श्रीराम के बाण चलते ही धधक उठे तीनों पुतले
गांधी मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों ने किया। मंच पर मौजूद अतिथियों ने धनुष से बाण चलाकर पुतलों के दहन की परंपरा में भाग लिया। प्रतीकात्मक रूप से श्रीराम के बाण चलाए जाने के साथ ही तीनों पुतलों में आग लग गई।

सबसे पहले विशालकाय पुतलों के जलने का दृश्य दर्शकों का ध्यान खींचने लगा। 90 फीट ऊंचे रावण की आकृति आग की लपटों से घिरते ही मैदान में जयश्रीराम के नारे और तेज हो गए। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन के साथ ही उत्सव का माहौल चरम पर पहुंच गया।
रावण दहन की परंपरा रामायण में वर्णित उस प्रसंग की याद दिलाती है, जिसमें भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म और अहंकार पर विजय प्राप्त की थी। इसी प्रतीक के माध्यम से हर साल विजयादशमी पर यह संदेश दिया जाता है कि अन्याय, अहंकार और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः सत्य और धर्म की विजय का आदर्श ही समाज को दिशा देता है।

रावण की आंखों से निकले अंगारे, लाइट-साउंड ने बढ़ाया रोमांच
इस बार रावण के पुतले को खास दृश्यात्मक प्रभावों से सजाया गया था। दहन के दौरान उसकी आंखों से अंगारे निकलते दिखाई दिए। मुंह से उठती आग की लपटों और कानों व कंधों से निकलते रंगीन धुएं ने दर्शकों का ध्यान खींचा। लाइट और साउंड के प्रभाव से रावण की गर्जना का दृश्य भी आयोजन को अधिक जीवंत बना रहा था।
मैदान में मौजूद वानर सेना के सदस्य लगातार जयश्रीराम का उद्घोष करते रहे। उनके नारों के बीच दर्शक भी उत्साह से शामिल होते रहे। पुतलों के जलने का दृश्य सामने आते ही लोगों ने मोबाइल फोन निकालकर तस्वीरें और वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

इस तरह गांधी मैदान में रावण दहन केवल पुतलों को आग लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक प्रतीकों, मंचीय प्रस्तुति और आधुनिक ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था के मेल से एक बड़ा सार्वजनिक आयोजन बनकर सामने आया।

मोबाइल की रोशनी से जगमगाया गांधी मैदान
रावण दहन के दौरान गांधी मैदान में उत्सव और उल्लास का माहौल दिखाई दिया। कई दर्शकों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर इस पल को यादगार बनाया। बच्चे उत्सुकता से पुतलों को देखते रहे, जबकि बड़े लोग अपने कैमरों में इस दृश्य को दर्ज करते रहे।
तीनों पुतलों के आग की लपटों में घिरने के साथ ही मैदान में तालियों, नारों और उत्साह का शोर सुनाई दिया। अलग-अलग उम्र के लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को पारिवारिक उत्सव का रूप दिया। विजयादशमी पर होने वाला रावण दहन लोगों के लिए हर साल एक ऐसी परंपरा है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-जोल और सामूहिक उत्साह भी जुड़ा रहता है।

भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए गए थे। आयोजन स्थल के चारों ओर सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, ताकि लोगों की आवाजाही और भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में भीड़ को व्यवस्थित रखना, प्रवेश और निकास मार्गों पर निगरानी रखना तथा किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर पाना महत्वपूर्ण होता है। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन सोमा चक्रवर्ती ने किया। इस अवसर पर श्री दशहरा कमिटी के अध्यक्ष अरुण कुमार, चेयरमैन कमल नोपानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

रावण दहन ने फिर दोहराया विजयादशमी का संदेश
पटना के गांधी मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन विजयादशमी के पारंपरिक संदेश का प्रतीक बना। 90 फीट ऊंचे रावण से लेकर 80 फीट के मेघनाद तक, तीनों पुतलों के जलने का दृश्य दर्शकों के लिए आयोजन का सबसे आकर्षक क्षण रहा।
लेकिन रावण दहन का महत्व केवल विशाल पुतलों और आतिशी दृश्य तक सीमित नहीं है। यह उत्सव लोगों को याद दिलाता है कि अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता पर विजय पाने का संदेश आज भी प्रासंगिक है। गांधी मैदान में गूंजते जयश्रीराम के उद्घोष और अग्नि की लपटों के बीच विजयादशमी का यही संदेश एक बार फिर लोगों तक पहुंचा—बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छाई की जीत की उम्मीद हमेशा जीवित रहती है।

