पटना/बेगूसराय। बिहार में बाढ़ के पानी ने पटना और बेगूसराय जिले की सीमा से लगे दियारा इलाके में परेशानी बढ़ा दी है। यहां मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत करीब तीन महीने पहले बनाई गई सड़क पहली ही बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। सड़क का बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में कटकर बह गया है। इससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। स्थानीय लोगों को अब पैदल या साइकिल के सहारे रास्ता पार करना पड़ रहा है। खेतों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है और कई किसानों की फसल डूब गई है।
मौके पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड के अनुसार इस सड़क का नाम नया कसहा से पुराना कसहा डुमरा जंजीरा पथ है। इसकी लंबाई 5.249 किलोमीटर है। सड़क का निर्माण कार्यकारी एजेंसी ग्रामीण कार्य विभाग के कार्य प्रमंडल, बाढ़ की देखरेख में कराया गया था। बोर्ड पर संवेदक का नाम सुंदर निर्माण दर्ज है। सड़क बनने के कुछ ही समय बाद उसके बड़े हिस्से के बह जाने से अब निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सड़क कटने से कई इलाकों का संपर्क टूटा
बाढ़ के पानी के तेज बहाव से सड़क बीच में कई जगह कट गई है। सड़क पर गहरे गड्ढे और मलबा जमा हो गया है। स्थिति ऐसी है कि बड़े वाहनों का निकलना संभव नहीं है। इससे सिमरिया घाट से कसहा, डुमरा जंजीरा, सीतारामपुर, रचियाही और उलाव होते हुए बेगूसराय जाने वाला सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रास्ते से गांवों तक सामान पहुंचाने और रोजमर्रा के काम के लिए बड़ी संख्या में लोग आते-जाते थे। सड़क टूटने के बाद वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। सामान लेकर जाने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। कई लोगों को सिर पर सामान रखकर पैदल जाना पड़ रहा है। इससे स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा है।
बिजली पोल भी कटाव की जद में
सड़क के टूटने से सिर्फ आवाजाही की समस्या नहीं है। सड़क किनारे लगा बिजली विभाग का सीमेंटेड पोल भी कटाव की चपेट में आ गया है। पानी की धार के बिल्कुल किनारे पहुंच चुके इस पोल के कभी भी गिरने की आशंका जताई जा रही है। अगर पोल गिरता है तो आसपास के इलाकों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। साथ ही पानी के बीच बिजली का तार गिरने से हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से जल्द मौके पर पहुंचकर पोल की स्थिति देखने और जरूरी कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ रहा है, इसलिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
खेतों में पानी, किसानों की फसल डूबी
बाढ़ के पानी से आसपास के खेत भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय किसानों के मुताबिक उनकी फसलें पानी में डूब चुकी हैं। दियारा क्षेत्र में खेती ही बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से प्रभावित किसानों को फसल का मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
अधिकारी पहुंचे, लेकिन राहत का इंतजार
स्थानीय लोगों के अनुसार मोकामा के अंचल अधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के जेई मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। हालांकि, खबर के मुताबिक अब तक सड़क की मरम्मत या लोगों को तत्काल राहत देने का कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने और अगर निर्माण में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नई सड़क का इतनी जल्दी बाढ़ में बह जाना गंभीर मामला है।
फिलहाल इलाके में बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशानी बनी हुई है। सड़क टूटने, फसल डूबने और बिजली पोल पर खतरे ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों की मांग है कि प्रशासन सड़क को जल्द सुरक्षित तरीके से बहाल करे, बिजली पोल को गिरने से बचाए और बाढ़ से प्रभावित परिवारों तथा किसानों को जरूरी राहत उपलब्ध कराए।