पटना के अटल पथ पर स्कॉर्पियो की टक्कर से अमरजीत और अंकेश की मौत, चार दोस्त घायल; तीन बहनों का इकलौता भाई था अमरजीत, पिता की बेबसी देख हर आंख हुई नम
पटना: मां को उम्मीद थी कि बेटा दुर्गापूजा घूमकर रात में घर लौट आएगा। रात बीत गई, सुबह हो गई, लेकिन दरवाजे पर उसकी आहट नहीं सुनाई दी। परेशान परिजनों ने जब मोबाइल पर फोन किया, तो दूसरी तरफ से ऐसी खबर मिली जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। उन्हें बताया गया कि उनका बेटा अमरजीत अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह सुनते ही मां शोभा देवी बेसुध होकर गिर पड़ीं। पिता विजय पासवान की आंखों के सामने परिवार का भविष्य अंधेरे में डूब गया। उनकी बेबसी भरे शब्द थे—अब परिवार का सहारा कौन बनेगा?
दुर्गापूजा की सप्तमी की रात पटना के अटल पथ पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की चपेट में आने से अमरजीत और उसके दोस्त अंकेश की मौत हो गई थी। हादसे में उनके साथ मौजूद चार अन्य युवक घायल हो गए। रामकृष्णा नगर के सैदानीचक डोमनचक गांव में जब दोनों युवकों की मौत की खबर पहुंची, तो पूजा की खुशियां मातम में बदल गईं। जिन घरों से बच्चे त्योहार मनाने निकले थे, वहां अब चीख-पुकार और अपनों को खोने का दर्द है।
तीन बहनों का इकलौता भाई था अमरजीत
अमरजीत कक्षा आठ का छात्र था। वह तीन बहनों का इकलौता भाई था और परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी। उसके पिता विजय पासवान दिव्यांग हैं। ऐसे में बेटे की असमय मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। अमरजीत की बहन ने रुंधे गले से बताया कि वे तीन बहनें हैं और अमरजीत उनका इकलौता भाई था।

परिजनों के मुताबिक, दुर्गापूजा की रात अमरजीत अपने घर के सामने रहने वाले दोस्त अंकेश और चार अन्य दोस्तों—दीपक, प्रिंस, रणवीर और मोहित—के साथ घूमने निकला था। घर से निकलते समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह उसकी आखिरी विदाई साबित होगी।
रात में जब अमरजीत घर नहीं लौटा, तो परिवार के लोग चिंतित हो गए। सुबह उसके मोबाइल पर फोन किया गया। फोन एक पुलिसकर्मी ने उठाया और अमरजीत की मौत की सूचना दी। साथ ही बताया कि हादसे में एक अन्य युवक की भी जान गई है और चार लोग घायल हुए हैं।
यह खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। बेटे की मौत का सदमा मां शोभा देवी बर्दाश्त नहीं कर सकीं और बेहोश होकर गिर पड़ीं। पिता की चिंता सिर्फ बेटे को खोने की नहीं, बल्कि उस भविष्य की भी है जिसकी उम्मीदें उसी बेटे से जुड़ी थीं।
अंकेश की मौत से दूसरे परिवार पर भी टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में जान गंवाने वाला अंकेश दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। उसकी मौत से परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। अमरजीत और अंकेश घर के सामने रहने वाले दोस्त थे। दोनों का एक साथ दुनिया से चले जाना परिवारों के लिए ऐसा सदमा बन गया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

दोनों दोस्त दुर्गापूजा घूमने निकले थे। उनके साथ चार और युवक भी थे। हादसे के बाद जब गांव में मौत की खबर पहुंची, तो लोग यातायात थाना पहुंचे। वहां परिजनों को दोनों युवकों की मौत और चार अन्य के घायल होने की जानकारी मिली।
गांव में त्योहार का माहौल था, लेकिन दो युवकों की मौत ने हर घर को गमगीन कर दिया। जिन बच्चों को परिवार सुरक्षित लौटने की उम्मीद में देख रहा था, उनमें से दो की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया।
स्कॉर्पियो की टक्कर से चार दोस्त भी घायल
हादसे में घायल युवकों के परिजनों के मुताबिक, घायलों में दो का इलाज निजी अस्पताल में और दो का पीएमसीएच में चल रहा है। परिवारों ने आर्थिक तंगी के बीच इलाज के खर्च को लेकर भी चिंता जताई है।
घायल प्रिंस के पिता के अनुसार, प्रिंस ने बताया कि स्कॉर्पियो तेज रफ्तार से आई और एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारने के बाद पलट गई। इसकी चपेट में वहां मौजूद युवक भी आ गए। हालांकि, हादसे की पूरी परिस्थितियों और वाहन की गति की आधिकारिक पुष्टि जांच से ही हो सकेगी।

इस घटना ने दो परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। एक तरफ अमरजीत के पिता अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, तो दूसरी तरफ अंकेश के घर में भी छोटे बेटे को खोने का दर्द है। घायल युवकों के परिवारों के सामने इलाज और उनके जल्द स्वस्थ होने की चिंता अलग है।
तेज रफ्तार पर लगाम और सड़क सुरक्षा की जरूरत
पटना के अटल पथ पर हुआ यह हादसा सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। त्योहारों के दौरान सड़कों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में तेज गति से वाहन चलाना न केवल चालक, बल्कि सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों की जिंदगी के लिए भी खतरा बन सकता है।
सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात नियमों का पालन, गति सीमा पर नियंत्रण, संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी निगरानी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। किसी भी दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अमरजीत और अंकेश की मौत ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। अमरजीत की मां की सूनी गोद और पिता की बेबसी उस दर्द को बयान करती है, जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल है। दुर्गापूजा घूमने निकले बच्चों में से दो की घर वापसी कभी नहीं होगी। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क पर कुछ पलों की लापरवाही कई परिवारों की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

