राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard—NSG) भारत की विशेष आतंकवाद-रोधी कमांडो फोर्स है, जिसे गंभीर आतंकवादी खतरों और असाधारण सुरक्षा परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। हर साल 16 अक्टूबर को NSG का स्थापना दिवस या ‘रaising Day’ मनाया जाता है। यह अवसर उन कमांडो और कर्मियों के साहस, अनुशासन, प्रशिक्षण और समर्पण को याद करने का है, जो देश की सुरक्षा के लिए उच्च जोखिम वाले अभियानों में जिम्मेदारी निभाते हैं।
NSG की स्थापना क्यों की गई?
1980 के दशक में भारत के सामने आतंकवाद और बंधक संकट जैसी गंभीर सुरक्षा चुनौतियाँ थीं। ऐसी परिस्थितियों में विशेष रूप से प्रशिक्षित, आधुनिक उपकरणों से लैस और तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम बल की जरूरत महसूस हुई। इसी पृष्ठभूमि में 1984 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष संघीय बल बनाने का निर्णय लिया। जून 1984 में NSG के गठन की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हुई और 16 अक्टूबर 1985 को इस बल को औपचारिक रूप से खड़ा किया गया।
NSG से संबंधित विधेयक 1986 में संसद में पेश किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम, 1986 को 22 सितंबर 1986 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और अधिनियम 16 अक्टूबर 1986 से लागू हुआ। इसलिए बल के गठन और कानून के लागू होने की तारीखों में अंतर समझना जरूरी है।
‘ब्लैक कैट्स’ के नाम से पहचान
NSG के कमांडो आम तौर पर ‘ब्लैक कैट्स’ के नाम से पहचाने जाते हैं। यह बल गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है और इसे विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी अभियानों तथा अपहरण या बंधक जैसी अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इसका काम सामान्य कानून-व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि चुनिंदा और असाधारण खतरे की स्थितियों में विशेषज्ञ क्षमता उपलब्ध कराना है।

NSG की कार्य-दृष्टि तेज, सटीक और उद्देश्य-केंद्रित कार्रवाई पर आधारित है। ऐसे अभियानों में जोखिम का आकलन, उपलब्ध खुफिया जानकारी, परिस्थिति के अनुरूप योजना, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल और नागरिकों की सुरक्षा बेहद अहम होती है।
NSG की संरचना और प्रशिक्षण
NSG की संरचना में दो प्रमुख घटक शामिल हैं। स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG) में सेना से चुने गए कर्मी शामिल होते हैं, जबकि स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG) में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस बलों से आए कर्मी होते हैं। अलग-अलग सेवाओं का अनुभव इस बल को विशेष अभियानों के लिए आवश्यक विविध कौशल उपलब्ध कराता है।
कमांडो को शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, टीमवर्क, निर्णय लेने, हथियारों के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल तथा संकट की स्थिति में संयम बनाए रखने का कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है। अभियान की प्रकृति के अनुसार बंधक बचाव, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और बम निष्क्रिय करने जैसी विशेषज्ञ क्षमताओं की जरूरत पड़ सकती है। इन अभियानों की संवेदनशीलता के कारण उनकी विस्तृत रणनीति और परिचालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती।
देश की सुरक्षा में NSG की भूमिका
NSG को उन परिस्थितियों में तैनात किया जा सकता है, जहाँ आतंकवादी हमला, बंधक संकट या कोई अन्य गंभीर खतरा विशेष कमांडो क्षमता की मांग करता हो। इसकी भूमिका संबंधित केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय में निभाई जाती है। आतंकवाद जैसे खतरों से निपटने में स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियों, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं सहित कई संस्थाओं का तालमेल भी महत्वपूर्ण होता है।

26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में NSG की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय हब स्थापित किए गए। इस व्यवस्था का उद्देश्य गंभीर संकट की स्थिति में कमांडो दलों को घटनास्थल तक पहुँचने में लगने वाला समय कम करना और देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिक्रिया को मजबूत बनाना था।
साहस के साथ जवाबदेही भी जरूरी
विशेष सुरक्षा बलों की सफलता केवल उनकी शारीरिक क्षमता या उपकरणों से नहीं मापी जाती। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय, नागरिकों की सुरक्षा, अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय और कानून के दायरे में काम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आतंकवाद-रोधी अभियानों में एक छोटी-सी चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए प्रशिक्षण, अनुशासन और लगातार अभ्यास की भूमिका निर्णायक रहती है।
NSG के कर्मियों के लिए जोखिम और अनिश्चितता उनकी सेवा का हिस्सा हैं। देश की सुरक्षा के लिए कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्मियों को याद करना और उनके परिवारों के योगदान का सम्मान करना भी इस दिवस का महत्वपूर्ण पक्ष है।
आम नागरिकों की भूमिका
राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, हालांकि किसी भी संदिग्ध स्थिति से निपटने का काम प्रशिक्षित एजेंसियों को ही करना चाहिए। नागरिकों को अफवाहें फैलाने, अपुष्ट तस्वीरें या संदेश साझा करने और सुरक्षा अभियानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने से बचना चाहिए। किसी वास्तविक आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या पुलिस के निर्देशों का पालन करना और आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना अधिक जिम्मेदार कदम है।

स्थापना दिवस का संदेश
16 अक्टूबर का NSG स्थापना दिवस देश को याद दिलाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए साहस के साथ तैयारी, विशेषज्ञता, अनुशासन और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग भी जरूरी है। ‘ब्लैक कैट्स’ की पहचान उन कर्मियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में नागरिकों की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं। इस अवसर पर देश NSG के सभी कर्मियों और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को सम्मानपूर्वक नमन करता है।
