भारत के इतिहास में 31 अक्टूबर की तारीख कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी है। इसी दिन वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी। उनकी पुण्यतिथि पर देश के राजनीतिक इतिहास, उनके नेतृत्व और उस दौर की घटनाओं को याद किया जाता है। कुछ संदर्भों में इस दिन को ‘संकल्प दिवस’ (National Pledge Day) के रूप में भी उल्लेखित किया जाता है। इस नाम के प्रयोग को राष्ट्रीय एकता दिवस से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर भारत सरकार द्वारा 2014 से राष्ट्रीय एकता दिवस भी मनाया जाता है।
31 अक्टूबर 1984: इंदिरा गांधी की हत्या
31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली में इंदिरा गांधी की उनके आवास परिसर में उनके ही दो सुरक्षा कर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। यह घटना देश के राजनीतिक इतिहास की निर्णायक और दुखद घटनाओं में शामिल है। उनकी हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में व्यापक हिंसा हुई, विशेषकर सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। उस हिंसा में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। इस त्रासदी को याद करते समय पीड़ितों के अनुभव और न्याय की आवश्यकता को भी ध्यान में रखना चाहिए।
इंदिरा गांधी का राजनीतिक जीवन
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुत्री थीं। जनवरी 1966 में वह देश की प्रधानमंत्री बनीं और मार्च 1977 तक इस पद पर रहीं। जनवरी 1980 में उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री पद संभाला और अक्टूबर 1984 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहीं। वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।
उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के उदय, 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण, हरित क्रांति के विस्तार और बैंकों के राष्ट्रीयकरण जैसे फैसलों ने देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। वहीं, 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल नागरिक स्वतंत्रताओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सत्ता के इस्तेमाल को लेकर आज भी गंभीर बहस का विषय है। उनके राजनीतिक जीवन का मूल्यांकन उपलब्धियों और विवादों—दोनों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

‘संकल्प दिवस’ का संदर्भ और उसका संदेश
31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के साथ जोड़कर ‘संकल्प दिवस’ कहे जाने का उल्लेख कुछ सार्वजनिक और स्मृति-संबंधी संदर्भों में मिलता है। हालांकि, इस नाम से पूरे देश में किसी अलग, सर्वमान्य केंद्रीय सरकारी आयोजन या औपचारिक राष्ट्रीय दिवस की स्थिति को स्पष्ट रूप से स्थापित मानना उचित नहीं होगा। इसलिए इस दिन को संकल्प, सार्वजनिक सेवा और देश के प्रति जिम्मेदारी पर विचार करने के अवसर के रूप में प्रस्तुत करना अधिक सावधान और तथ्यपरक है।
‘संकल्प’ का अर्थ केवल किसी महान व्यक्ति को याद करना नहीं, बल्कि अपने नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध होना भी है। इसमें संविधान का सम्मान, सामाजिक सद्भाव, समानता, सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही और हिंसा से दूर रहने जैसे मूल्य शामिल हैं। किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की विरासत पर विचार करते समय उनके कार्यों के सकारात्मक और विवादास्पद दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है।
राष्ट्रीय एकता दिवस से अंतर
31 अक्टूबर को ही सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती भी होती है। भारत सरकार ने 2014 से इस अवसर को राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाना शुरू किया। इसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण में पटेल की भूमिका को याद करना है। इस अवसर पर अनेक स्थानों पर ‘रन फॉर यूनिटी’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस प्रकार, इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और उससे जुड़े ‘संकल्प दिवस’ के उल्लेख तथा सरदार पटेल की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस के ऐतिहासिक संदर्भ अलग-अलग हैं। एक ही तारीख पर इन दोनों स्मृतियों का होना इस दिन को भारतीय इतिहास के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

आज के संदर्भ में संकल्प का महत्व
- संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा: लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों का सम्मान करना।
- सामाजिक सद्भाव: धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव तथा नफरत से दूर रहना।
- हिंसा का विरोध: राजनीतिक या सामाजिक मतभेदों का समाधान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से करना।
- नागरिक जिम्मेदारी: सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, जवाबदेही और अपने कर्तव्यों का पालन करना।
- इतिहास से सीख: अतीत की उपलब्धियों और गलतियों, दोनों से सीख लेकर बेहतर भविष्य के लिए काम करना।
निष्कर्ष
31 अक्टूबर इंदिरा गांधी की हत्या की बरसी और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती—दोनों कारणों से भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के संदर्भ में ‘संकल्प दिवस’ का उल्लेख देश के प्रति जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विचार करने का अवसर देता है, जबकि राष्ट्रीय एकता दिवस पटेल के योगदान और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को रेखांकित करता है। इस तारीख का सार अतीत को संतुलित दृष्टि से याद करने और एक शांतिपूर्ण, समावेशी तथा जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लेने में है।
