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Home - देश - 45 सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क आपूर्ति की होगी जांच, डीडीसी ने गठित की तीन सदस्यीय टीम

45 सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क आपूर्ति की होगी जांच, डीडीसी ने गठित की तीन सदस्यीय टीम

अविनाश पांडेय
Last updated: सितम्बर 17, 2026 6:35 अपराह्न
By : अविनाश पांडेय
Published on : 2 महीना पहले
नालंदा के सरकारी स्कूलों में बेंच डेस्क की जांच
नालंदा के सरकारी स्कूलों में बेंच डेस्क की जांच
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बिहारशरीफ। Nalanda News: नालंदा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए खरीदे गए बेंच-डेस्क की आपूर्ति को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सारा अशरफ ने जांच के आदेश दिए हैं।

नूरसराय और हरनौत प्रखंड के 45 सरकारी स्कूलों में आपूर्ति किए गए बेंच-डेस्क की वास्तविक स्थिति और गुणवत्ता की जांच के लिए वरीय अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, आपूर्ति एजेंसी शाही ट्रेडर्स ने हरनौत प्रखंड के 22 स्कूलों में 779 और नूरसराय प्रखंड के 23 स्कूलों में 526 बेंच-डेस्क की आपूर्ति करने का दावा किया है। अब जांच टीम दोनों प्रखंडों के सभी 45 स्कूलों का स्थल निरीक्षण कर आपूर्ति से संबंधित दावों का सत्यापन करेगी।

जांच के दौरान स्कूलों में मौजूद बेंच-डेस्क की संख्या का मिलान आपूर्ति रिकॉर्ड से किया जाएगा। इसके अलावा बेंच-डेस्क में इस्तेमाल की गई सामग्री और उसकी गुणवत्ता की भी जांच होगी।

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ई-शिक्षाकोष के रिकॉर्ड से भी होगा मिलान

जांच में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ स्कूलों में पोर्टल पर बेंच-डेस्क की पूरी आपूर्ति दर्ज होने के बावजूद विद्यालय में सामान उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई है।

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ऐसे में टीम ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्कूल में मौजूद बेंच-डेस्क का भौतिक सत्यापन करेगी।

शिकायतों के अनुसार, कुछ विद्यालयों में बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में आपूर्ति पूरी दिखाई जा रही है। जांच टीम इस अंतर की भी पड़ताल करेगी।

विधानसभा में भी उठ चुका है मामला

बेंच-डेस्क की खरीद और आपूर्ति का मामला पहले विधानसभा में भी उठ चुका है। अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने छह सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की थी।

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पूर्व में तत्कालीन डीडीसी श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर की जांच का भी इस मामले में उल्लेख किया गया था। उस जांच में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। एक लिपिक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की बात भी सामने आई थी।

वहीं, उस समय आपूर्ति एजेंसी से राशि की वसूली कर मामले को समाप्त करने की कोशिश किए जाने के आरोप भी सामने आए थे।

अब 45 स्कूलों में नए सिरे से जांच के आदेश के बाद आपूर्ति की वास्तविक स्थिति, बेंच-डेस्क की गुणवत्ता और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जाएगा।

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Avinash pandey
Byअविनाश पांडेय
नालंदा जिले के रहने वाले अविनाश पांडेय को पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का लंबा अनुभव है। आगरा से पत्रकारिता की शुरुआत करने के बाद नालंदा में प्रभात खबर के क्राइम रिपोर्टर के रूप में 15 वर्षों तक कार्य किया। अपराध एवं स्थानीय पत्रकारिता की गहरी समझ रखने वाले पत्रकार ने दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ भी काम किया है। निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता इनकी पहचान है।
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