Munger Flood: सीताकुंड स्थित बाढ़ राहत शिविर में बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे। राहत शिविर में व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री सीधे बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे और उनसे भोजन व अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। स्थानीय अंदाज में मुख्यमंत्री ने लोगों से उनकी भाषा में बातचीत की।
बाढ़ पीड़ितों से स्थानीय अंदाज में बोले मुख्यमंत्री
भोजन कर रहे बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूछा, “खाना खैलहो, कौनो दिक्कत हो तऽ बतइहो… खाना में कौन-कौन चीज मिल्लहौं, स्वादिष्ट छै कि नैय।”
मुख्यमंत्री के मुंह से अपनी स्थानीय बोली सुनकर राहत शिविर में मौजूद लोगों के चेहरे पर कुछ देर के लिए मुस्कान दिखाई दी।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान भोजन की गुणवत्ता और राहत शिविर में मिल रही सुविधाओं की भी जानकारी ली।
महिलाओं ने सुनाई बाढ़ से हुए नुकसान की कहानी
कटरिया पंचायत के रांगा मुसहरी की निर्मला देवी, ननकी देवी, बुधनी देवी और ललिता देवी ने मुख्यमंत्री से अपनी परेशानी साझा की।
महिलाओं ने बताया कि बाढ़ में घर का सामान डूब गया और बकरियां भी मर गईं। उनका कहना था कि बकरी पालन से ही परिवार का खर्च चलता था, लेकिन बाढ़ ने उनके रोजी-रोटी के साधन को भी प्रभावित कर दिया।
उन्होंने कहा कि राहत शिविर में भोजन और कपड़े की व्यवस्था मिल रही है, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की भी जरूरत है।
‘हर साल डूबै छै घर, कब तक शिविर में रहबै’
भेलवा दियारा के सदानंद महतो, संजय चौधरी, निगम देवी, धर्मशीला देवी और शीला देवी ने भी मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्या रखी।
पीड़ितों ने बताया कि उनके घर हर साल बाढ़ में डूब जाते हैं। इसके बाद परिवारों को घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सूखी और सुरक्षित जगह पर जमीन का छोटा टुकड़ा उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि हर साल बाढ़ आने पर घर छोड़ने की मजबूरी खत्म हो सके।
मुख्यमंत्री ने दिया समस्या समाधान का भरोसा
बाढ़ प्रभावित लोगों की बातें सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें भरोसा दिलाया। उन्होंने स्थानीय अंदाज में कहा:
“तोरा सनी के कोय दिक्कत नै होय लऽ देबै। हम्मे छियै नऽ। बाढ़ समाप्त होयऽ दहो, सब समस्या के समाधान होय जैयतै।”
राहत शिविर में मुख्यमंत्री और बाढ़ पीड़ितों के बीच हुई इस बातचीत में प्रभावित परिवारों की अलग-अलग परेशानियां सामने आईं। किसी ने घर का सामान और पशु खोने की बात कही तो किसी ने हर साल बाढ़ में घर डूबने की समस्या बताई।
शिवराज सिंह चौहान ने भी राहत व्यवस्था का लिया जायजा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहत शिविर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत कर बाढ़ से हुए नुकसान और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
सीताकुंड राहत शिविर में बच्चों के लिए संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी केंद्र का भी जायजा लिया गया। बाढ़ के दौरान बच्चों को पोषण और देखभाल उपलब्ध कराने के लिए ऐसी व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।
मुंगेर में बाढ़ राहत और बचाव कार्यों के तहत प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और स्वास्थ्य सुविधाएं संचालित की जा रही हैं।