जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) निवेशकों की मजबूत मांग के बाद भारतीय शेयर बाजार के बड़े घटनाक्रमों में शामिल हो गया है। कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने पर इसके देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल होने की संभावना है। साथ ही, रिलायंस समूह की अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण टाटा समूह से आगे निकल सकता है। यह आकलन आईपीओ के प्रस्तावित मूल्य और समूह की कंपनियों के उपलब्ध बाजार मूल्य पर आधारित है; वास्तविक स्थिति लिस्टिंग और शेयरों के बाजार भाव के बाद स्पष्ट होगी।
₹10.3 लाख करोड़ का अनुमानित मूल्यांकन
आईपीओ के ऊपरी मूल्य ₹1,119 प्रति शेयर के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का निहित मूल्यांकन करीब ₹10.3 लाख करोड़ बैठता है। यह कंपनी के दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं के कारोबार के आकार को रेखांकित करता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश वाली जियो की सेवाओं में मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ ब्रॉडबैंड, क्लाउड, मनोरंजन, एंटरप्राइज समाधान और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इस मूल्यांकन पर जियो देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के समूह में जगह बना सकती है। हालांकि, कंपनी की सटीक रैंकिंग शेयर बाजार में वास्तविक लिस्टिंग मूल्य और उस समय अन्य कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर निर्भर करेगी।
आईपीओ को मिला 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन
जियो प्लेटफॉर्म्स का लगभग ₹30,188 करोड़ का सार्वजनिक निर्गम कुल मिलाकर 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ और एंकर निवेशकों की हिस्सेदारी को मिलाकर कुल मांग ₹7.4 लाख करोड़ से अधिक बताई गई। करीब 1.39 करोड़ आवेदन आने से खुदरा और संस्थागत निवेशकों की व्यापक दिलचस्पी का संकेत मिला।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इश्यू खुलने के लगभग 100 मिनट के भीतर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा पहले 10 मिनट में भर गया। ये आंकड़े शेयरों के लिए दी गई बोलियों और मांग को दर्शाते हैं, न कि कंपनी को मिलने वाली वास्तविक राशि को।
रिलायंस समूह और टाटा समूह की बाजार पूंजीकरण दौड़
आईपीओ से पहले उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण लगभग ₹18 लाख करोड़ के आसपास था। जियो प्लेटफॉर्म्स के करीब ₹10.3 लाख करोड़ के अनुमानित मूल्यांकन को जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग ₹28.3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इसकी तुलना में टाटा समूह का संयुक्त सूचीबद्ध बाजार पूंजीकरण लगभग ₹25.5 लाख करोड़ बताया गया था।
इन अनुमानों के आधार पर जियो की लिस्टिंग रिलायंस समूह को कुल सूचीबद्ध बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश का सबसे बड़ा कारोबारी समूह बना सकती है। यह तुलना समूह की सभी कंपनियों के बाजार मूल्यों को जोड़कर की जाती है; इसे किसी एक कंपनी के मूल्यांकन या समूह की संपत्तियों के स्वामित्व-समायोजित मूल्य के बराबर नहीं समझना चाहिए। शेयरों की कीमतों में बदलाव के साथ दोनों समूहों की रैंकिंग भी बदल सकती है।
रिलायंस के लिए क्यों अहम है जियो की लिस्टिंग?
जियो प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्र लिस्टिंग से निवेशकों को रिलायंस के डिजिटल और दूरसंचार कारोबार का अलग बाजार मूल्य देखने का अवसर मिलेगा। इससे कंपनी के कारोबार की तुलना अन्य दूरसंचार कंपनियों से करना भी आसान हो सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज आईपीओ के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स में बहुलांश हिस्सेदारी बनाए रखने वाली है, इसलिए जियो का बाजार प्रदर्शन रिलायंस के निवेश मूल्यांकन के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।

दूसरी ओर, आईपीओ में मिली मजबूत मांग भविष्य के शेयर प्रदर्शन की गारंटी नहीं है। लिस्टिंग के बाद कीमत पर कंपनी की आय और लाभप्रदता, प्रतिस्पर्धा, दूरसंचार शुल्क, पूंजीगत खर्च, नियामकीय फैसलों और व्यापक बाजार परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। निवेशकों को केवल आईपीओ की सब्सक्रिप्शन संख्या या अनुमानित मूल्यांकन के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के प्रस्ताव दस्तावेजों और जोखिमों का अध्ययन करना चाहिए।
आगे क्या देखना होगा?
अब बाजार की निगाहें जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग और शुरुआती कारोबार पर रहेंगी। वास्तविक बाजार पूंजीकरण लिस्टिंग के दिन शेयर मूल्य से तय होगा और उसके बाद रोज बदल सकता है। इसलिए रिलायंस समूह के शीर्ष स्थान पर पहुंचने का अनुमान संभावित परिदृश्य है, अंतिम या स्थायी रैंकिंग नहीं।
