बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से सत्यापन में प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने का दावा, 2015 में इसी डिग्री के आधार पर हुआ था नियोजन
Jamui News: सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के लिए इस्तेमाल की गई B.Ed की डिग्री फर्जी पाए जाने के आरोप में जमुई में एक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच कर रहे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की पड़ताल में यह मामला सामने आया।
निगरानी की ओर से कराए गए सत्यापन में संबंधित प्रमाण-पत्र को फर्जी बताए जाने के बाद खैरा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय बाघाखाड़ में पदस्थापित गणित शिक्षक कुमार हरेराम को गिरफ्तार कर लिया। मामले में पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से सत्यापन में सामने आया मामला
निगरानी जांच के दौरान जमुई जिले में कार्यरत नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। इसी क्रम में कुमार हरेराम की B.Ed डिग्री को भी सत्यापन के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी भेजा गया।
निगरानी के अनुसार, विश्वविद्यालय स्तर से कराए गए सत्यापन में संबंधित प्रमाण-पत्र को फर्जी बताया गया। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से खैरा थाना को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश दिया गया। पुलिस ने इसके आधार पर शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों और परीक्षा परिणामों के सत्यापन के लिए E-Verification System उपलब्ध है, जिसके माध्यम से नियोक्ता, सरकारी विभाग और उच्च शिक्षण संस्थान प्रमाण-पत्रों का सत्यापन करा सकते हैं।
अंकपत्र पर 752 अंक और प्रथम श्रेणी दर्ज थी
निगरानी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुमार हरेराम के B.Ed अंकपत्र पर रोल नंबर 263917, ई. नंबर BU 09/00511 और वर्ष 2014 अंकित था। अंकपत्र में कुल 752 अंक तथा प्रथम श्रेणी दर्शाई गई थी।
जांच के दौरान इस प्रमाण-पत्र को विश्वविद्यालय के स्तर पर सत्यापन के लिए भेजा गया। इसके बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से निगरानी ब्यूरो को सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। रिपोर्ट में संबंधित प्रमाण-पत्र को फर्जी बताया गया। यही रिपोर्ट आगे की कानूनी कार्रवाई का आधार बनी।
2015 में इसी प्रमाण-पत्र के आधार पर मिली थी शिक्षक की नौकरी
जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, शेखपुरा जिले के सिरारी भदौस निवासी कुमार हरेराम ने वर्ष 2015 में जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन के लिए जमुई में आवेदन किया था।

इसके बाद जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन इकाई के कार्यालय ज्ञापांक के माध्यम से उनका चयन अनारक्षित कोटि में श्रवण दिव्यांग चयनित कोटि के तहत प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में किया गया था। उनका विषय गणित था। नियोजन के बाद वे शिक्षा विभाग में अपनी सेवा दे रहे थे और वर्तमान में उत्क्रमित उच्च विद्यालय बाघाखाड़ में पदस्थापित थे।
इस तरह वर्ष 2015 में नियोजन से लेकर प्रमाण-पत्र के सत्यापन और उसके बाद हुई गिरफ्तारी तक यह मामला करीब 11 साल बाद सामने आया है। हालांकि, मामले में अंतिम तथ्य न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
हाईकोर्ट के मामले के आलोक में चल रही थी निगरानी जांच
निगरानी विभाग के पत्रांक 1472, दिनांक 20 मार्च 2026 के अनुसार, यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका CWJC संख्या 15459/14 के आलोक में चल रही निगरानी जांच BS 08/15 के तहत की गई।
इसी जांच के अंतर्गत जमुई जिले में नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच की जा रही थी। जांच का उद्देश्य नियोजन के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की वास्तविकता की पुष्टि करना था। इसी प्रक्रिया में कुमार हरेराम की B.Ed डिग्री भी जांच के दायरे में आई।

एमनेस्टी पीरियड में इस्तीफा नहीं देने का भी उल्लेख
निगरानी के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित एमनेस्टी पीरियड के दौरान संबंधित शिक्षक की ओर से त्याग-पत्र नहीं दिया गया।
निगरानी के अनुसार, फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में खैरा थाना कांड संख्या 107/26 दर्ज किया गया। प्राथमिकी में IPC की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120(B) के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्राथमिकी में दर्ज धाराएं आरोपों के आधार पर लगाई गई हैं। किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम निर्धारण अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होता है।
पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद शुरू की जांच
खैरा थाना के थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह के अनुसार, आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में पुलिस निगरानी विभाग से प्राप्त दस्तावेजों, विश्वविद्यालय के सत्यापन रिकॉर्ड और नियोजन से संबंधित कागजात का परीक्षण करेगी।

इस मामले में आगे यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी प्रमाण-पत्र के फर्जी होने के संबंध में विश्वविद्यालय की रिपोर्ट और शिक्षक के नियोजन से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर किन तथ्यों को सामने लाती है।
नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच फिर चर्चा में
जमुई का यह मामला एक बार फिर नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को चर्चा में ले आया है। शिक्षक नियुक्ति में शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाण-पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। ऐसे में किसी प्रमाण-पत्र के सत्यापन में आपत्ति सामने आने पर संबंधित विभाग और जांच एजेंसियां उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करती हैं।
कुमार हरेराम के मामले में भी निगरानी जांच के दौरान B.Ed प्रमाण-पत्र को विश्वविद्यालय से सत्यापित कराया गया और रिपोर्ट मिलने के बाद प्राथमिकी तथा गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। अब मामले की आगे की जांच में दस्तावेजों और नियोजन प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल पुलिस ने आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। फर्जी B.Ed डिग्री के आरोप, विश्वविद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट और शिक्षक के वर्ष 2015 के नियोजन से जुड़े दस्तावेज अब जांच के प्रमुख आधार हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।

