Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 4 नवंबर 1889: जमनालाल बजाज – गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ और स्वतंत्रता संग्राम के कर्मयोगी
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - देश - 4 नवंबर 1889: जमनालाल बजाज – गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ और स्वतंत्रता संग्राम के कर्मयोगी

4 नवंबर 1889: जमनालाल बजाज – गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ और स्वतंत्रता संग्राम के कर्मयोगी

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 4, 2026 5:35 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 घंटा पहले
जमनालाल बजाज
साझा करें

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कुछ व्यक्तित्व ऐसे रहे जिन्होंने धन, व्यापार और सामाजिक प्रतिष्ठा को व्यक्तिगत वैभव का साधन बनाने के बजाय राष्ट्रीय सेवा का माध्यम बनाया। जमनालाल बजाज ऐसे ही उद्योगपति, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे महात्मा गांधी के अत्यंत निकट सहयोगी थे और गांधीजी उन्हें स्नेहपूर्वक अपना ‘पांचवां पुत्र’ कहते थे। उनका जीवन स्वदेशी, खादी, सामाजिक समानता, ग्रामोन्नति और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति समर्पण का उल्लेखनीय उदाहरण है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

जमनालाल बजाज का जन्म 4 नवंबर 1889 को राजस्थान के सीकर क्षेत्र के काशी का बास गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन में ही उन्हें वर्धा के प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ बच्छराज बजाज ने गोद ले लिया। इसके बाद उनका पालन-पोषण एक संपन्न व्यावसायिक परिवार में हुआ। व्यापारिक वातावरण में रहते हुए उन्होंने व्यवसाय, प्रबंधन और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को समझा।

कम उम्र में ही उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दीं। लेकिन उनके लिए सफलता का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं था। वे समाज के प्रति उत्तरदायित्व और देश की स्थिति को लेकर भी चिंतित रहते थे। यही भावना आगे चलकर उन्हें गांधीजी और राष्ट्रीय आंदोलन के निकट ले गई।

महात्मा गांधी से संबंध: ‘पांचवें पुत्र’ की पहचान

दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद महात्मा गांधी के विचारों और रचनात्मक कार्यक्रमों का प्रभाव देशभर में फैल रहा था। जमनालाल बजाज गांधीजी के विचारों से गहराई से प्रभावित हुए और उनके निकट सहयोगी बन गए। गांधीजी के साथ उनका संबंध केवल राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं था; उसमें पारिवारिक आत्मीयता, विश्वास और साझा आदर्शों की भूमिका भी थी।

Dinman Times ads 728-90

गांधीजी ने जमनालाल को अपना ‘पांचवां पुत्र’ कहा था। यह संबोधन उनके बीच गहरे स्नेह और विश्वास का प्रतीक बन गया। जमनालाल ने अपनी संपत्ति, समय और संगठनात्मक क्षमता को गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रमों तथा स्वतंत्रता आंदोलन के लिए समर्पित किया। वर्धा राष्ट्रीय गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना और जमनालाल ने वहां गांधीजी के कार्यों को आगे बढ़ाने में विशेष भूमिका निभाई।

ये भी पढ़े

4 नवंबर 1845: वासुदेव बलवंत फड़के – सशस्त्र प्रतिरोध के अग्रदूत
4 नवंबर 1876: भाई परमानन्द – राष्ट्रवादी चिंतक, क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी
4 नवंबर 1929: शकुन्तला देवी – दुनिया की ‘ह्यूमन कंप्यूटर’ और असाधारण गणितज्ञ
4 नवंबर 1925: ऋत्विक घटक – भारतीय समानांतर सिनेमा के महान फिल्मकार

असहयोग आंदोलन और स्वतंत्रता संघर्ष

1920 के असहयोग आंदोलन के दौरान जमनालाल बजाज ने ब्रिटिश शासन की संस्थाओं और औपनिवेशिक प्रतिष्ठा से दूरी बनाने के गांधीजी के आह्वान का समर्थन किया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए आर्थिक और संगठनात्मक सहयोग दिया तथा स्वयं भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कांग्रेस के कार्यों से जुड़े और राष्ट्रीय स्वाधीनता के उद्देश्य के लिए अपना समय तथा संसाधन लगाते रहे।

उन्होंने औपनिवेशिक शासन से मिली उपाधियों और सम्मान को राष्ट्रीय स्वाभिमान से ऊपर नहीं रखा। उनका मानना था कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया भी है। इसी कारण खादी, स्वदेशी और ग्रामोद्योग उनके काम के केंद्र में रहे।

खादी, स्वदेशी और ग्रामोद्योग का प्रसार

जमनालाल बजाज ने खादी और स्वदेशी को केवल वस्त्र या व्यापार का विकल्प नहीं माना। उनके लिए यह ग्रामीण रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और औपनिवेशिक आर्थिक निर्भरता को चुनौती देने का माध्यम था। उन्होंने चरखा, खादी उत्पादन और ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर इन गतिविधियों के लिए संस्थागत सहयोग जुटाया।

Dinman Times ads 728-90

वे अखिल भारतीय चरखा संघ और गांधीवादी रचनात्मक कार्यों से जुड़े रहे। उनका प्रयास था कि गांवों में स्थानीय कौशल और संसाधनों के आधार पर रोजगार के अवसर विकसित हों। इस दृष्टि में उद्योग और समाज के बीच संबंध को केवल लाभ तक सीमित न रखकर जनकल्याण से जोड़ने की सोच दिखाई देती है।

सामाजिक सुधार और अस्पृश्यता के विरुद्ध प्रयास

जमनालाल बजाज सामाजिक समानता के समर्थक थे। उन्होंने अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध गांधीजी के अभियान का समर्थन किया। मंदिर प्रवेश और सार्वजनिक स्थानों पर समान अधिकार जैसे मुद्दों पर उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने का प्रयास किया। वर्धा और आसपास के क्षेत्रों में उनके सामाजिक कार्यों ने सुधारवादी गतिविधियों को गति दी।

उनका मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक होगी जब समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मान तथा समान अवसर मिलें। इसलिए शिक्षा, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और सामाजिक एकता से जुड़े कार्यक्रम भी उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बने।

वर्धा और राष्ट्रीय रचनात्मक कार्यक्रम

वर्धा जमनालाल बजाज के कार्यों का प्रमुख केंद्र रहा। उन्होंने वहां राष्ट्रीय शिक्षा, ग्रामोद्योग, खादी और सामाजिक सुधार से जुड़े प्रयासों को सहयोग दिया। गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रमों के लिए वर्धा का महत्व बढ़ने में उनका योगदान रहा। बाद के वर्षों में सेवाग्राम आश्रम और वर्धा के आसपास विकसित राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बना।

Dinman Times ads 728-90

जमनालाल का दृष्टिकोण व्यावहारिक था। वे मानते थे कि स्वतंत्रता आंदोलन को जनजीवन से जोड़ने के लिए गांवों में शिक्षा, उत्पादन, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता का काम लगातार होना चाहिए। इसीलिए वे आंदोलन के राजनीतिक चरणों के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों में भी सक्रिय रहे।

उद्योगपति के रूप में दृष्टि और सार्वजनिक जिम्मेदारी

व्यापार और उद्योग की दुनिया से आने के कारण जमनालाल बजाज आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक चुनौतियों को समझते थे। उन्होंने व्यवसाय को समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया। उनकी सोच में संपत्ति का उपयोग केवल निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित और सामाजिक कल्याण के लिए भी होना चाहिए। यह दृष्टिकोण गांधीजी के ‘ट्रस्टीशिप’ यानी न्यासिता के विचार से मेल खाता था।

उनकी विरासत से प्रेरित होकर आगे चलकर बजाज समूह ने उद्योग और परोपकारी कार्यों के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। हालांकि उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केवल एक औद्योगिक परिवार की नींव रखना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधार के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करना था।

अंतिम समय और विरासत

जमनालाल बजाज का निधन 11 फरवरी 1942 को वर्धा में हुआ। भारत की स्वतंत्रता से लगभग पांच वर्ष पहले ही उनका जीवन समाप्त हो गया, लेकिन उनके कार्य राष्ट्रीय आंदोलन और गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रमों में लंबे समय तक प्रभावशाली बने रहे। उनकी स्मृति में स्थापित संस्थाएं और सामाजिक पहलें आज भी उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

Dinman Times ads 728-90

उनका जीवन यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल जेल जाने या राजनीतिक भाषण देने तक सीमित नहीं था। आर्थिक संसाधनों को राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए लगाना, सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध काम करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और स्वदेशी को व्यवहार में उतारना भी स्वतंत्रता की व्यापक लड़ाई का हिस्सा था।

एक नजर में

  • नाम: जमनालाल बजाज
  • जन्म: 4 नवंबर 1889
  • जन्मस्थान: काशी का बास, सीकर क्षेत्र, राजस्थान
  • पहचान: उद्योगपति, स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी
  • विशेष संबंध: महात्मा गांधी के निकट सहयोगी; गांधीजी उन्हें ‘पांचवां पुत्र’ कहते थे
  • प्रमुख कार्यक्षेत्र: खादी, स्वदेशी, ग्रामोद्योग, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन
  • निधन: 11 फरवरी 1942, वर्धा

निष्कर्ष

जमनालाल बजाज का व्यक्तित्व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस पक्ष को उजागर करता है जिसमें उद्योग, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय आंदोलन एक-दूसरे से जुड़े थे। गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ के रूप में उनकी पहचान उनके आत्मीय संबंध का प्रतीक है, जबकि खादी, स्वदेशी, ग्रामोद्योग और सामाजिक समानता के लिए उनका काम उनके सार्वजनिक जीवन की वास्तविक उपलब्धि है। 4 नवंबर को उनकी जयंती पर उन्हें याद करना उस विचार को सम्मान देना है कि राष्ट्रनिर्माण के लिए संपत्ति, प्रतिभा और व्यक्तिगत सामर्थ्य का उपयोग समाज के हित में किया जाना चाहिए।

TAGGED:Business NewsEducation NewsIndia News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर शकुन्तला देवी 4 नवंबर 1929: शकुन्तला देवी – दुनिया की ‘ह्यूमन कंप्यूटर’ और असाधारण गणितज्ञ
अगली ख़बर भाई परमानन्द 4 नवंबर 1876: भाई परमानन्द – राष्ट्रवादी चिंतक, क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

वासुदेव बलवंत फड़के

4 नवंबर 1845: वासुदेव बलवंत फड़के – सशस्त्र प्रतिरोध के अग्रदूत

भाई परमानन्द

4 नवंबर 1876: भाई परमानन्द – राष्ट्रवादी चिंतक, क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी

जमनालाल बजाज

4 नवंबर 1889: जमनालाल बजाज – गांधीजी के ‘पांचवें पुत्र’ और स्वतंत्रता संग्राम के कर्मयोगी

शकुन्तला देवी

4 नवंबर 1929: शकुन्तला देवी – दुनिया की ‘ह्यूमन कंप्यूटर’ और असाधारण गणितज्ञ

ऋत्विक घटक

4 नवंबर 1925: ऋत्विक घटक – भारतीय समानांतर सिनेमा के महान फिल्मकार

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • पटना
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?