लखनऊ के साहित्यिक-सांस्कृतिक संसार से गहरा रिश्ता रखने वाली इंदिरा ने जीवनभर रचनाकार मुद्राराक्षस का साथ निभाया; लंबे दांपत्य जीवन के बाद गाजियाबाद में निधन
लखनऊ, 21 सितंबर। हिंदी के चर्चित साहित्यकार, नाटककार और चिंतक मुद्राराक्षस की पत्नी इंदिरा मुद्राराक्षस का सोमवार शाम करीब सात बजे गाजियाबाद में निधन हो गया। वह उम्र के नौवें दशक में थीं। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से वह अपने छोटे बेटे रोमेल के साथ गाजियाबाद में रह रही थीं। बड़े बेटे रोमी शीराज के लखनऊ में निधन के बाद परिवार पर एक और गहरा दुख आया था। इंदिरा के निधन से लखनऊ के साहित्यिक और रंगमंचीय जगत में शोक की लहर है।
मुद्राराक्षस का निधन 13 जून 2016 को 82 वर्ष की उम्र में लखनऊ में हुआ था। उनके निधन के समय उनकी पत्नी इंदिरा बेहद गहरे सदमे में थीं। उस समय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने करीब 55 वर्षों का वैवाहिक जीवन साथ बिताया था।
कौन थीं इंदिरा मुद्राराक्षस?
इंदिरा मुद्राराक्षस का जीवन केवल एक प्रसिद्ध साहित्यकार की पत्नी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध साहित्यिक संदर्भों में उनका परिचय रंगकर्मी इंदिरा गुप्ता के रूप में भी मिलता है। वरिष्ठ लेखक दयानंद पांडेय ने अपने संस्मरण में लिखा है कि समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के संपर्क के जरिए मुद्राराक्षस और इंदिरा गुप्ता का विवाह हुआ था।
इंदिरा ने ऐसे दौर में मुद्राराक्षस का साथ दिया, जब उनके पति का जीवन साहित्य, रंगमंच, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के संघर्षों से लगातार जुड़ा हुआ था। उनका घर सिर्फ एक परिवार का घर नहीं, बल्कि लखनऊ के साहित्यिक-सांस्कृतिक जीवन से जुड़े लोगों की आवाजाही का भी केंद्र रहा।
मुद्राराक्षस के संघर्षों की साथी थीं इंदिरा
मुद्राराक्षस का मूल नाम सुभाष चंद्र था। 21 जून 1933 को लखनऊ के निकट बेहटा गांव में जन्मे इस लेखक ने हिंदी साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाई। वह कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना, पत्रकारिता और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में सक्रिय रहे।
उन्होंने कलकत्ता की पत्रिका ‘ज्ञानोदय’ में काम किया, आकाशवाणी के ड्रामा प्रोडक्शन विभाग से जुड़े और अनेक नाटक लिखे तथा निर्देशित किए। उनके लेखन में दलित, महिला, वंचित और हाशिए के समाज के सवाल लगातार दिखाई देते रहे।
मुद्राराक्षस को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले। एक प्रसंग उनके और इंदिरा के रिश्ते की गहराई बताता है। पुरस्कार मिलने के बाद जब उन्हें बधाई दी गई तो उन्होंने पुरस्कार की राशि को लेकर कहा था कि इससे पत्नी इंदिरा का इलाज हो जाएगा। यह प्रसंग बताता है कि लंबे वैवाहिक जीवन में पत्नी की बीमारी और इलाज भी उनके लिए कितनी बड़ी चिंता थी।
परिवार और आखिरी वर्षों का दर्द
मुद्राराक्षस और इंदिरा के दो बेटों—रोमी शीराज और रोमेल—का उल्लेख उपलब्ध स्रोतों में मिलता है। 2016 में मुद्राराक्षस के निधन के समय दोनों बेटे अंतिम संस्कार में मौजूद थे। उस समय रिपोर्ट में उनकी पत्नी इंदिरा को गहरे सदमे में बताया गया था।
मुद्राराक्षस के जाने के बाद इंदिरा का जीवन धीरे-धीरे एकांत की ओर बढ़ता गया। बड़े बेटे रोमी के निधन के बाद वह छोटे बेटे रोमेल के साथ गाजियाबाद चली गईं, जहां सोमवार शाम उनका निधन हो गया।
लखनऊ की साहित्यिक दुनिया में एक युग का अंत
मुद्राराक्षस का साहित्य हिंदी में स्थापित धारणाओं को चुनौती देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने ‘दंड विधान’, ‘नारकीय’, ‘आला अफसर’, ‘तिलचट्टा’, ‘तेंदुआ’ जैसी रचनाओं के जरिए समाज की विसंगतियों, जातिगत भेदभाव और सत्ता के चरित्र पर सवाल उठाए। आकाशवाणी के अनुसार उन्होंने 10 से अधिक नाटक, 12 उपन्यास, कहानी और व्यंग्य संग्रह तथा आलोचना संबंधी पुस्तकें लिखीं और 20 से अधिक नाटकों का निर्देशन किया।
ऐसे रचनाकार के जीवन की लगभग पांच दशक से अधिक लंबी साथी रहीं इंदिरा अब नहीं हैं। उनके निधन के साथ मुद्राराक्षस के निजी जीवन की वह कड़ी भी समाप्त हो गई, जिसने उनके संघर्षों, बीमारी और लंबे साहित्यिक जीवन को बहुत करीब से देखा था।
एक साथ की जिंदगी अब स्मृति बन गई
कुछ रिश्ते इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं होते, लेकिन इतिहास बनाने वाले इंसान की जिंदगी में उनकी मौजूदगी बहुत गहरी होती है। इंदिरा मुद्राराक्षस का जीवन भी कुछ ऐसा ही था।
मुद्राराक्षस ने अपनी कलम से समाज के उन सवालों को आवाज दी, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा में जगह नहीं मिलती थी। इंदिरा ने उनके साथ उस लंबे जीवन-सफर को साझा किया, जिसमें साहित्य की चमक भी थी, संघर्ष भी, बीमारी भी और निजी दुख भी।
2016 में इंदिरा ने अपने जीवन-साथी को विदा किया था। करीब दस साल बाद अब वह स्वयं भी इस दुनिया से विदा हो गईं। उनके जाने से एक निजी जीवन की कहानी का एक और पन्ना बंद हुआ है, लेकिन मुद्राराक्षस के जीवन और साहित्य से जुड़ी उनकी स्मृतियां लखनऊ की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनी रहेंगी।
इंदिरा मुद्राराक्षस को विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।