दिल्ली पुलिस ने 23 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बाहर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सहित 10 लोगों को हिरासत में लिया। वे विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच छात्रों से मिलने पहुंचे थे। इस कार्रवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है। पुलिस के अनुसार, सांसदों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति के बिना प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करते हुए बाहर से हिरासत में लिया गया।
छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र 12 अक्टूबर से छात्र संघ की बहाली और 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में आखिरी छात्र संघ चुनाव 2005 में हुए थे और छात्र संघ को 2006 में भंग कर दिया गया था। प्रदर्शनकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के लिए नया संविधान तैयार करने हेतु समिति गठित की है। प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया बहाल करने से पहले संविधान और चुनाव की व्यवस्था पर काम करना जरूरी है। वहीं, प्रदर्शनकारी तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने पर जोर दे रहे हैं।
‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ पोस्टरों पर विवाद
जामिया परिसर में ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ जैसे नारे लिखे होने या पोस्टर दिखाई देने की खबरों के बाद विवाद बढ़ गया। इन नारों को छात्र आंदोलन की मूल मांगों से अलग मुद्दे के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित नारों की जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की बात कही है। परिसर में सुरक्षा भी बढ़ाई गई है।

इमरान मसूद ने विवादित नारों से खुद को अलग करते हुए कहा कि वह इनका समर्थन नहीं करते। उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया और कहा कि ऐसे पोस्टर छात्र आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो सकते हैं। उन्होंने पुलिस से पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, साथ ही छात्र संघ बहाल करने और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की बात कही।
इमरान मसूद ने छात्रों का समर्थन क्यों किया?
कांग्रेस सांसद जामिया पहुंचे थे ताकि छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग कर रहे विद्यार्थियों के प्रति समर्थन व्यक्त कर सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं बहाल किए जा रहे और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर पुनर्विचार क्यों नहीं हो रहा। मसूद ने छात्रों की मांगों को उनके शैक्षणिक और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा मुद्दा बताया।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टरों से जुड़े विवाद के बीच यह अंतर महत्वपूर्ण है कि सांसदों की हिरासत छात्र संघ बहाली के प्रदर्शन के दौरान हुई, जबकि विवादित नारों की जिम्मेदारी और उनके पीछे कौन था, इसकी पुष्टि अलग जांच का विषय है। किसी व्यक्ति या समूह को बिना पुष्ट प्रमाण के पोस्टर लगाने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
जामिया प्रशासन और पुलिस के सामने चुनौती
लगातार चल रहे प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रशासन को एक ओर छात्रों की चुनाव बहाली और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी मांगों पर संवाद करना है, वहीं दूसरी ओर परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखने और विवादित नारों की जांच भी करनी है। छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत आगे बढ़ना इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए अहम होगा।

फिलहाल, छात्र संघ चुनाव की तारीख और हिरासत में लिए गए लोगों की बाद की स्थिति के बारे में आधिकारिक अपडेट महत्वपूर्ण होंगे। मामले को समझते समय छात्र संघ बहाली की मांग, विवादित पोस्टरों और पुलिस की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है।
