पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी IGIMS में इलाज की सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संस्थान में 500 बेड की क्षमता वाला नया अस्पताल तैयार किया गया है। इसके शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों की ओर भेजने की जरूरत कम होने की उम्मीद है। नए भवन में मरीजों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं।
IGIMS बिहार के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां पटना के अलावा राज्य के दूसरे जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल की क्षमता बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नए अस्पताल से इस दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
इमरजेंसी में 100 बेड की सुविधा
नए अस्पताल की सबसे अहम सुविधाओं में 100 बेड की इमरजेंसी शामिल है। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों के लिए इमरजेंसी सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यहां मरीजों को तत्काल जांच और इलाज की जरूरत होती है।
अस्पताल में इमरजेंसी बेड की संख्या बढ़ने से गंभीर मरीजों को शुरुआती उपचार के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी। इससे मौजूदा इमरजेंसी पर दबाव कम होने की उम्मीद है। IGIMS पहले भी अपनी इमरजेंसी और गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाओं का विस्तार करता रहा है। जनवरी 2025 में संस्थान में 30 बेड की विस्तारित इमरजेंसी सुविधा का उद्घाटन किया गया था।
आयुष्मान मरीजों के लिए 50 बेड
नए अस्पताल में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत 50 बेड का आयुष्मान वार्ड तैयार किया गया है। इससे योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती और उपचार की सुविधा मिलने में आसानी हो सकती है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में तय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता है। सरकारी अस्पतालों में ऐसी सुविधाओं का विस्तार गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए खास महत्व रखता है।
बढ़ेगी अस्पताल की क्षमता
IGIMS में लगातार नए भवन और चिकित्सा सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर 500 बेड वाले मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के साथ 1,200 बेड की एक अन्य इमारत का भी उल्लेख है। इससे आने वाले समय में संस्थान की कुल उपचार क्षमता में बड़ा विस्तार होने की उम्मीद है।
जनवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, IGIMS में 500 बेड के नए भवन का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा 1,200 बेड की एक और बड़ी सुविधा विकसित करने की योजना भी बताई गई थी।
एक अन्य रिपोर्ट में IGIMS की मौजूदा क्षमता करीब 1,700 बेड बताई गई है और भविष्य में इसमें और 1,700 बेड जोड़ने की योजना का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में संस्थान को और बड़ा चिकित्सा केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है।
गंभीर मरीजों को मिलेगा फायदा
नए अस्पताल का सबसे बड़ा फायदा गंभीर मरीजों को मिलने की उम्मीद है। इमरजेंसी में ज्यादा बेड होने से मरीजों को तत्काल भर्ती करने की क्षमता बढ़ेगी। वहीं अलग आयुष्मान वार्ड होने से योजना के तहत आने वाले मरीजों के लिए व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
IGIMS में पहले से ही कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। संस्थान की वेबसाइट के अनुसार यहां अत्याधुनिक चिकित्सा और आपातकालीन उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। संस्थान में 3 टेस्ला MRI जैसी आधुनिक जांच सुविधा और रोबोटिक सर्जरी सिस्टम जैसी तकनीक भी जोड़ी गई हैं।
बिहार के मरीजों के लिए क्यों अहम है विस्तार?
बिहार में बड़े सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है। खासकर गंभीर बीमारी वाले मरीज अक्सर पटना के बड़े संस्थानों का रुख करते हैं। ऐसे में अस्पतालों में बेड बढ़ाना जरूरी है।
IGIMS का विस्तार केवल पटना के मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। ज्यादा बेड और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है।
500 बेड के नए अस्पताल के साथ इमरजेंसी और आयुष्मान मरीजों के लिए अलग व्यवस्था IGIMS को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में जब संस्थान की प्रस्तावित अतिरिक्त सुविधाएं भी पूरी तरह शुरू होंगी, तब यहां इलाज की क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है