बिहारशरीफ। पूरे देश के साथ नालंदा जिले के बिहारशरीफ में भी गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर के पुलपर इलाके स्थित गुफापर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश भव्य पंडाल में ‘गुफापर के राजा’ के रूप में विराजमान हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
पूजा समिति से जुड़े स्थानीय निवासी अवधेश कुमार ने बताया कि गुफापर में भगवान गणेश की पूजा की परंपरा तीन दशक से भी अधिक पुरानी है। समिति के पूर्वजों ने भगवान गणेश को ‘गुफापर का राजा’ नाम दिया था। तभी से स्थानीय लोग इसी नाम से गणपति की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। प्रत्येक वर्ष पूजा को और भव्य एवं आकर्षक बनाने का प्रयास किया जाता है।
इस बार रौद्र रूप में दर्शन दे रहे गजानन
अवधेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष भगवान गणेश की प्रतिमा को रौद्र रूप में प्रस्तुत किया गया है। पूजा पंडाल में आकर्षक सजावट के साथ शंख ध्वनि और शिवनाथ के स्वरूप को भी विशेष महत्व दिया गया है। विधि-विधान के साथ प्रतिदिन पूजा-अर्चना होने से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
वहीं स्थानीय पुजारी उदय कुमार पांडेय ने बताया कि गुफापर क्षेत्र में गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने की परंपरा करीब 50 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से भगवान गणेश की विशेष पूजा शुरू होती है, जो करीब 10 दिनों तक चलती है। अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा की पूर्णाहुति के बाद श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।
विद्या और सद्बुद्धि के लिए भी होती है गणेश पूजा
पुजारी उदय कुमार पांडेय ने कहा कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। वे सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इसी कारण किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत गणेश पूजन से की जाती है।
उन्होंने पुरानी परंपराओं को याद करते हुए बताया कि पहले विद्यालयों में भी चकचंदा, यानी गणेश चतुर्थी से जुड़ा पर्व, उत्साह के साथ मनाया जाता था। गणेश पूजा केवल सुख-शांति और समृद्धि के लिए ही नहीं, बल्कि विद्या, बुद्धि और सद्बुद्धि की प्राप्ति के लिए भी की जाती है।
गुफापर में चल रही गणेश पूजा को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पूजा स्थल पर भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।