Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 22 अक्टूबर 1884: ग्रीनविच मेरिडियन को वैश्विक प्राइम मेरिडियन की मान्यता
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - टेक्नोलॉजी - 22 अक्टूबर 1884: ग्रीनविच मेरिडियन को वैश्विक प्राइम मेरिडियन की मान्यता

22 अक्टूबर 1884: ग्रीनविच मेरिडियन को वैश्विक प्राइम मेरिडियन की मान्यता

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 22, 2026 1:40 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 7 दिन पहले
ग्रीनविच मेरिडियन
साझा करें

22 अक्टूबर 1884 को वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित इंटरनेशनल मेरिडियन कॉन्फ्रेंस में दुनिया के देशों ने समय और देशांतर की गणना के लिए ग्रीनविच से गुजरने वाली रेखा को प्रमुख संदर्भ मानने का समर्थन किया। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समय-व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा। ग्रीनविच रेखा को 0° देशांतर यानी प्राइम मेरिडियन माना गया, जिससे पृथ्वी पर पूर्व और पश्चिम के देशांतर मापने के लिए साझा शुरुआती बिंदु मिला।

प्राइम मेरिडियन क्या है?

प्राइम मेरिडियन वह काल्पनिक रेखा है जिसका देशांतर 0 डिग्री माना जाता है। इसके आधार पर पृथ्वी की सतह पर स्थानों की पूर्व-पश्चिम स्थिति तय की जाती है। यह रेखा इंग्लैंड के ग्रीनविच स्थित रॉयल ऑब्जर्वेटरी से होकर गुजरती है। देशांतर की गणना इसी संदर्भ रेखा से पूर्व और पश्चिम की ओर की जाती है, जबकि अक्षांश भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण की स्थिति बताता है।

प्राइम मेरिडियन का चयन केवल नक्शों तक सीमित विषय नहीं था। समुद्री यात्रा, रेल और तार संचार, खगोलीय गणना तथा देशों के बीच समय-सारिणी के समन्वय के लिए एक साझा भौगोलिक संदर्भ उपयोगी था। उन्नीसवीं सदी में तेज होते अंतरराष्ट्रीय परिवहन और संचार ने इस आवश्यकता को और बढ़ा दिया था।

1884 का इंटरनेशनल मेरिडियन कॉन्फ्रेंस

यह सम्मेलन अक्टूबर 1884 में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में हुआ। इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक मानचित्रण और समय-निर्धारण में इस्तेमाल होने वाली संदर्भ रेखा पर विचार किया। सम्मेलन ने ग्रीनविच मेरिडियन को प्राइम मेरिडियन के रूप में अपनाने की सिफारिश की। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से स्वीकार किया गया और आधुनिक समय-मानकों के विकास में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

Dinman Times ads 728-90

इस घटना को अक्सर 22 अक्टूबर 1884 से जोड़ा जाता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह ध्यान रखना जरूरी है कि सम्मेलन में निर्णय एक ही दिन की अलग-थलग घटना नहीं था। बैठकें कई दिनों तक चलीं और अंतिम प्रस्तावों पर मतदान तथा औपचारिक कार्यवाही सम्मेलन के दौरान हुई। इसलिए 22 अक्टूबर को याद करते समय इसे सम्मेलन की प्रक्रिया और उसके ऐतिहासिक परिणाम के संदर्भ में समझना चाहिए।

ये भी पढ़े

27 अक्टूबर 1811: आइजैक सिंगर का जन्म और सिलाई मशीन के विकास में योगदान
Anthropic ने IPO के लिए दाखिल किए दस्तावेज, 100 अरब डॉलर जुटाने की संभावना से AI बाजार में हलचल
26 अक्टूबर 1858: हैमिल्टन स्मिथ का वाशिंग मशीन पेटेंट और कपड़े धोने की तकनीक का विकास
CBFC के e-Cinepramaan पोर्टल से 500 से अधिक फिल्मों के दस्तावेज कथित तौर पर उजागर, जांच जारी

ग्रीनविच को ही क्यों चुना गया?

ग्रीनविच मेरिडियन पहले से ही कई समुद्री नक्शों और नौवहन प्रणालियों में इस्तेमाल हो रही थी। ब्रिटेन की समुद्री शक्ति और उसके मानचित्रों के व्यापक उपयोग के कारण यह संदर्भ पहले से प्रभावशाली था। इसे अपनाने से अलग-अलग देशों और नौवहन प्रणालियों में प्रचलित अनेक शुरुआती रेखाओं के बीच समन्वय स्थापित करना आसान हुआ। हालांकि, यह फैसला पूरी तरह तकनीकी नहीं था; इसमें उस दौर की अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ब्रिटेन के समुद्री प्रभाव की भूमिका भी थी।

सम्मेलन की सिफारिशों में ग्रीनविच को शून्य देशांतर मानने के साथ-साथ सार्वभौमिक दिन की गणना और समय-संबंधी मानकों पर भी विचार हुआ। फिर भी प्राइम मेरिडियन की स्वीकृति का अर्थ यह नहीं था कि उसी क्षण दुनिया के हर देश ने एक ही समय-क्षेत्र अपना लिया। स्थानीय समय-प्रणालियों से मानक समय की ओर बदलाव धीरे-धीरे हुआ।

ग्रीनविच मीन टाइम और वैश्विक समय

ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) ऐतिहासिक रूप से ग्रीनविच में औसत सौर समय पर आधारित समय-मानक है। इसे लंबे समय तक नौवहन और अंतरराष्ट्रीय समय-संदर्भ के लिए इस्तेमाल किया गया। पृथ्वी के घूमने की गति में सूक्ष्म बदलावों के कारण आधुनिक वैज्ञानिक समय-निर्धारण में अधिक सटीक परमाणु घड़ियों पर आधारित मानकों का उपयोग होता है। आज समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) अंतरराष्ट्रीय समय-संदर्भ का प्रमुख मानक है।

Dinman Times ads 728-90

GMT और UTC को रोजमर्रा के अनेक संदर्भों में समान समय दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन तकनीकी दृष्टि से दोनों की परिभाषा अलग है। इसलिए 1884 के फैसले को यह कहना अधिक सही है कि उसने ग्रीनविच मेरिडियन को वैश्विक देशांतर-संदर्भ बनाने में मदद की; आधुनिक UTC का पूरा ढाँचा बाद में वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण के जरिए विकसित हुआ।

आज के जीवन में इसका महत्व

एक साझा प्राइम मेरिडियन ने नक्शों, समुद्री और हवाई यात्रा, दूरसंचार, वैज्ञानिक अवलोकन और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में समन्वय को सरल बनाने में योगदान दिया। समय-क्षेत्रों की व्यवस्था में प्रत्येक क्षेत्र का समय सामान्यतः UTC से अंतर के रूप में व्यक्त किया जाता है। डिजिटल नेटवर्क, वैश्विक समाचार, वित्तीय बाजार और अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भी सटीक समय-सामंजस्य आवश्यक है।

हालांकि समय-क्षेत्रों की सीमाएँ केवल देशांतर के आधार पर तय नहीं होतीं; वे प्रशासनिक और सामाजिक जरूरतों के अनुसार भी निर्धारित की जाती हैं। फिर भी 0° देशांतर का साझा संदर्भ पृथ्वी पर स्थान और समय को समझने के लिए एक बुनियादी आधार बना हुआ है।

22 अक्टूबर 1884: आधुनिक समय-व्यवस्था की दिशा में अहम कदम

ग्रीनविच मेरिडियन को प्राइम मेरिडियन के रूप में अपनाने की अंतरराष्ट्रीय सहमति ने अलग-अलग देशों की मानचित्रण और समय-गणना प्रणालियों के बीच एक साझा आधार स्थापित करने में मदद की। यह निर्णय आधुनिक वैश्विक समन्वय के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव है। आज जब दुनिया भर में यात्रा, संचार और डिजिटल सेवाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं, तब 1884 के सम्मेलन की विरासत हमें याद दिलाती है कि साझा मानक अंतरराष्ट्रीय सहयोग को कितना आसान बना सकते हैं।

Dinman Times ads 728-90
TAGGED:Education NewsIndia NewsWorld News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर महाराजा दिलीप सिंह 22 अक्टूबर 1893: महाराजा दिलीप सिंह – सिख साम्राज्य के अंतिम शासक का निधन
अगली ख़बर 22 अक्टूबर 1873: स्वामी रामतीर्थ - व्यावहारिक वेदांत के प्रेरक दार्शनिक 22 अक्टूबर 1873: स्वामी रामतीर्थ – व्यावहारिक वेदांत के प्रेरक दार्शनिक
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

विजेंदर सिंह

29 अक्टूबर 1985: विजेंदर सिंह का जन्म और भारतीय मुक्केबाजी की ऐतिहासिक उड़ान

जय राजगुरु

29 अक्टूबर 1739: शहीद जय राजगुरु का जन्म और ओडिशा के प्रतिरोध की विरासत

छठ पूजा पर रोक नहीं

छठ पूजा पर रोक नहीं, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी: शुभेंदु अधिकारी

कमलादेवी

29 अक्टूबर 1988: कमलादेवी चट्टोपाध्याय का निधन और भारतीय हस्तशिल्प की विरासत

तमिल गीतकार और कवि वाली का जन्म

29 अक्टूबर 1931: तमिल गीतकार और कवि वाली का जन्म

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • विदेश
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?