गयाजी। मोक्षनगरी गयाजी में पितृपक्ष मेले के साथ श्राद्ध और पिंडदान का कर्मकांड शुरू हो गया है। शनिवार सुबह फल्गु नदी के तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के निमित्त तर्पण और जलांजलि अर्पित की। इसके बाद देवघाट सहित विभिन्न निर्धारित स्थलों पर पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पितृपक्ष के कारण विष्णुपद और आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धा और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार नजर आ रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु निर्धारित वेदियों पर अपने पितरों का श्राद्ध करने में जुटे हैं। शुक्रवार से त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध की शुरुआत पुनपुन और गोदावरी सरोवर से हुई थी। इसके बाद शनिवार से फल्गु श्राद्ध, स्नान और तर्पण का क्रम शुरू हुआ।
फल्गु तट पर तर्पण के लिए उमड़ी भीड़
सुबह सूर्योदय के साथ ही फल्गु नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। लोग विधि-विधान के साथ स्नान और तर्पण कर अपने पितरों को जलांजलि देते नजर आए। देवघाट सहित आसपास के घाटों पर पिंडदान कराने वाले पुरोहितों और श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
पितृपक्ष के दौरान गयाजी की धार्मिक महत्ता के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। प्रशासन ने भी मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
विष्णुपद मंदिर में दर्शन के लिए कतार
पितृपक्ष शुरू होने के साथ विष्णुपद मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर भगवान विष्णु के चरण चिह्न के दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने और भीड़ को नियंत्रित रखने की व्यवस्था की गई है। विष्णुपद से लेकर आसपास के मेला क्षेत्र तक धार्मिक माहौल दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया पितृपक्ष मेले का उद्घाटन
शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गयाजी में पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 का उद्घाटन किया। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद उन्होंने विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना की और देवघाट सहित मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मेले को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा, सफाई, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस वर्ष भी देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पिंडदानी गयाजी पहुंच रहे हैं। पितृपक्ष का मुख्य धार्मिक क्रम अलग-अलग वेदियों पर निर्धारित तिथियों के अनुसार आगे चलेगा।