नई दिल्ली: विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव का रास्ता फिलहाल संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से होकर गुजरेगा। Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को 12 अगस्त को लोकसभा में JPC के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। इसका मतलब है कि सरकार अब इस विधेयक को सीधे पारित कराने के बजाय समिति के जरिए इसकी विस्तृत समीक्षा कराएगी।
यह विधेयक इसी साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। सरकार का पक्ष है कि प्रस्तावित बदलावों से FCRA व्यवस्था में निगरानी और अनुपालन की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।
आखिर JPC के पास क्यों भेजा गया बिल?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act के तहत विदेश से मिलने वाले चंदे और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाता है। इसका दायरा गैर-सरकारी संगठनों, संस्थाओं और अन्य ऐसे संगठनों तक जाता है जो विदेशी योगदान प्राप्त करते हैं।
2026 के संशोधन विधेयक में FCRA पंजीकरण खत्म होने की स्थिति में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को लेकर भी प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा अनुपालन और निगरानी से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है।

इन्हीं बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों और कुछ संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए। विपक्ष की ओर से बिल को वापस लेने की मांग भी की गई। ऐसे माहौल में सरकार ने विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजने का रास्ता चुना है।
बिल में क्या बदलने का प्रस्ताव है?
PRS Legislative Research के अनुसार प्रस्तावित संशोधन में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।
| प्रस्तावित बदलाव | क्या है प्रावधान |
|---|---|
| FCRA प्रमाणपत्र खत्म होना | पंजीकरण खत्म होने पर विदेशी फंड से बनी संपत्तियों को लेकर नया प्रावधान |
| Designated Authority | ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए प्राधिकरण की व्यवस्था |
| पंजीकरण की अवधि | समय पर नवीनीकरण नहीं होने पर प्रमाणपत्र समाप्त माना जा सकता है |
| सजा का प्रावधान | कुछ उल्लंघनों में अधिकतम सजा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव |
| निगरानी | विदेशी योगदान से जुड़ी संस्थाओं की निगरानी और अनुपालन व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव |
अब JPC क्या करेगी?
JPC का काम विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच करना होगा। समिति जरूरत के मुताबिक अलग-अलग पक्षों, विशेषज्ञों और संबंधित संगठनों से सुझाव ले सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी।
हालांकि JPC की अंतिम रिपोर्ट कब आएगी, इसकी निश्चित तारीख अभी तय नहीं है। समिति के गठन के बाद उसके कार्य और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित तारीख को रिपोर्ट की डेडलाइन बताना सही नहीं होगा।

मानसून सत्र में क्यों नहीं हुआ बिल पास?
संसद के मौजूदा मानसून सत्र में FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने रहे। विपक्ष ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए और इसे वापस लेने की मांग की। दूसरी ओर सरकार इसे आगे बढ़ाने के पक्ष में रही।
अंततः बिल को सीधे पारित कराने के बजाय JPC के पास भेजने का फैसला हुआ। इससे अब विधेयक पर आगे की प्रक्रिया संसदीय समिति की जांच और उसकी सिफारिशों पर निर्भर करेगी।
आगे क्या होगा?
अब JPC विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसके सुझावों पर विचार कर सकती है और जरूरत पड़ने पर विधेयक में बदलाव भी किए जा सकते हैं। इसके बाद ही संसद में इसके आगे बढ़ने की तस्वीर साफ होगी।
यानी फिलहाल FCRA Amendment Bill पर अंतिम फैसला टल गया है, लेकिन प्रक्रिया रुकी नहीं है। अब असली नजर JPC की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी।

