डेस्क: विदेशी फंडिंग को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। संसद के मौजूदा सत्र में सोमवार को लोकसभा में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है। इस प्रस्तावित बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि विपक्ष इसे नागरिक संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) पर अतिरिक्त नियंत्रण की कोशिश बता रहा है।
दरअसल, केंद्र सरकार इस विधेयक को पहले भी मार्च 2026 में लोकसभा में पेश करने की तैयारी कर चुकी थी। हालांकि विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया था। अब सरकार कुछ बदलावों के साथ इसे दोबारा सदन में लाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार विपक्ष की कुछ आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संशोधन कर सकती है, ताकि विधेयक को पारित कराने में आसानी हो।
FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट भारत में विदेशी फंड और दान के नियमन से जुड़ा कानून है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से आने वाला धन देश की सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था या सार्वजनिक हित के खिलाफ किसी गतिविधि में इस्तेमाल न हो। यह कानून यह भी तय करता है कि कौन-सी संस्थाएं विदेशी फंड प्राप्त कर सकती हैं, उसका लेखा-जोखा कैसे रखा जाएगा और धन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों का मकसद विदेशी धन के प्रवाह को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है। गृह मंत्रालय का तर्क है कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे कई देशों में भी विदेशी फंडिंग पर निगरानी के लिए ऐसे कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि नए नियमों से सामाजिक संगठनों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
अब सभी की नजरें सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार विधेयक में कौन-कौन से बदलाव करती है और विपक्ष इस पर क्या रणनीति अपनाता है।