घनी आबादी के बीच बायोमिथेनेशन प्लांट लगाने पर उठे सवाल, पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों की जांच तक निर्माण रोकने की मांग
डेहरी आन सोन (रोहतास): नगर परिषद डेहरी-डालमियानगर क्षेत्र के शहर के मध्य स्थित पड़ाव मैदान में प्रस्तावित बायोगैस/बायोमिथेनेशन प्लांट को लेकर विरोध शुरू हो गया है। डेहरी के पूर्व विधायक ई. सत्यनारायण सिंह ने डेहरी अनुमंडलाधिकारी निलेश कुमार को पत्र सौंपकर घनी आबादी के बीच प्रस्तावित संयंत्र की स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
पूर्व विधायक ने प्रशासन से स्थल की पर्यावरणीय उपयुक्तता की विधिवत जांच कराने और सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों की पड़ताल के बाद ही परियोजना पर आगे बढ़ने का आग्रह किया है।
घनी आबादी के बीच प्लांट लगाने पर जताई आपत्ति
ई. सत्यनारायण सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि पड़ाव मैदान शहर के बीचों-बीच स्थित है, जिसके चारों तरफ घनी आवासीय और व्यावसायिक आबादी है। इस क्षेत्र में रोजाना बड़ी संख्या में नागरिकों, दुकानदारों और वाहनों की आवाजाही होती है।
उनका कहना है कि ऐसे स्थान पर अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाने से दुर्गंध, मक्खी-मच्छरों का प्रकोप, जैविक कचरे से निकलने वाले लीचेट, वायु प्रदूषण तथा गैस और आग से जुड़े सुरक्षा जोखिम पैदा होने की आशंका है।
हालांकि, ये आशंकाएं पूर्व विधायक की ओर से प्रशासन के सामने रखी गई हैं। प्रस्तावित संयंत्र से वास्तव में कितना पर्यावरणीय या सुरक्षा प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित तकनीकी और पर्यावरणीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
CPCB के दिशा-निर्देशों के पालन की मांग
पूर्व विधायक ने अपने पत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि बड़े अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए निर्धारित मानकों और बफर जोन का पालन किया जाना जरूरी है। साथ ही रिहायशी क्षेत्रों और जल स्रोतों से निर्धारित सुरक्षित दूरी सहित अन्य पर्यावरणीय मानकों को भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
‘सिर्फ बायोगैस प्लांट नाम रखने से जगह उपयुक्त नहीं हो जाती’
ई. सत्यनारायण सिंह ने कहा कि किसी परियोजना को केवल बायोगैस प्लांट कहे जाने से उसे घनी आबादी वाले इलाके में स्थापित करने की पर्याप्त पात्रता नहीं मिल जाती।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित कर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कराया जाए।
निर्माण से पहले पर्यावरणीय जांच की मांग
पूर्व विधायक ने पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रस्तावित स्थल की वास्तविक दूरी का विधिवत मापन कराया जाए। इसके साथ ही पर्यावरणीय परीक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच भी पूरी की जाए।
उन्होंने मांग की है कि जब तक सभी आवश्यक जांच पूरी नहीं हो जातीं, तब तक पड़ाव मैदान में प्रस्तावित संयंत्र के निर्माण एवं स्थापना कार्य को स्थगित रखा जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजर
पड़ाव मैदान में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर अब मामला प्रशासन के स्तर पर पहुंच गया है। फिलहाल यह देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित तकनीकी विभाग स्थल का निरीक्षण और पर्यावरणीय उपयुक्तता की जांच किस तरह करते हैं।
परियोजना की आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक और तकनीकी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।