तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और बड़े खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। चीन ने शुक्रवार को अचानक रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया। इसकी वजह बाढ़ के मलबे से बनी एक बैरियर लेक का लगातार ओवरफ्लो होना बताया गया है।
अधिकारियों को आशंका है कि अगर झील की प्राकृतिक दीवार टूटी तो इलाके में दोबारा अचानक बाढ़ आ सकती है।
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खतरे को देखते हुए सभी बचाव टीमों को फिलहाल अपनी जगह पर रुकने और अगले आदेश का इंतजार करने को कहा गया है। जो टीमें प्रभावित इलाके तक पहुंच चुकी थीं, उन्हें भी करीब 1 किलोमीटर पीछे हटने का निर्देश दिया गया है।
बैरियर लेक से क्यों बढ़ा खतरा?
बुधवार को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई भीषण बाढ़ और मलबे के बाद नदी के रास्ते में भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा हो गया। इससे पानी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ और एक बैरियर लेक बन गई।
चीनी अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। आने वाले दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंचने की आशंका जताई गई है। लगातार बारिश के कारण झील का जलस्तर और बढ़ सकता है।
72 घंटे में दूसरी बाढ़ की आशंका
सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि अगर बैरियर लेक की रुकावट टूट गई तो भारी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर आ सकता है। इससे पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक और बड़ी तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।
चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में झील का जलस्तर बढ़ सकता है और इसके कारण Gyirong Port समेत आसपास के इलाकों में दोबारा बाढ़ और मलबे का बहाव हो सकता है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच क्यों लिया गया फैसला?
बाढ़ के बाद बचाव दल लापता लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे थे। लेकिन जिस इलाके में रेस्क्यू टीमों को पहुंचना था, उसी दिशा में बैरियर लेक का पानी बढ़ने लगा।
ऐसे में बचावकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चीन ने प्रभावित क्षेत्र में मौजूद टीमों को सुरक्षित दूरी पर जाने का निर्देश दिया है।
रेस्क्यू टीमों की ओर से ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और 3D मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, ताकि मुश्किल पहाड़ी और मलबे वाले इलाकों में फंसे लोगों का पता लगाया जा सके।
सैकड़ों लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और तिब्बत दोनों इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नेपाल में शुक्रवार तक मृतकों की संख्या 469 तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। तिब्बत की तरफ भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
चीन की सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र से सैकड़ों चीनी नागरिकों और विदेशी नागरिकों को बाहर निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्यों में मौसम तथा भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
नेपाल-तिब्बत इलाके में लगातार चुनौती
बाढ़ ने इलाके के कई रास्तों, पुलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बचाव दलों के लिए प्रभावित स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है।
अब रेस्क्यू टीमों के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ मलबे में फंसे और लापता लोगों को तलाशना और दूसरी तरफ बैरियर लेक से पैदा हुए नए खतरे से बचावकर्मियों को सुरक्षित रखना।
फिलहाल चीन के अधिकारी झील के जलस्तर और आसपास की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अगर पानी का दबाव बढ़ता है तो नीचे की ओर अचानक बाढ़ आने का खतरा और गंभीर हो सकता है।