छपरा: सड़क हादसे में घायल मरीज जब इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे, तो उनके उपचार का तरीका ही सवालों के घेरे में आ गया। छपरा सदर अस्पताल में ट्रक और बाइक की टक्कर में घायल दो युवकों के जख्म पर कथित तौर पर पट्टी की जगह दवा की पैकिंग वाला कार्टन बांध दिया गया।
इसके बाद दोनों को गंभीर हालत में पटना रेफर कर दिया गया। मामले ने अस्पताल की प्राथमिक उपचार व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, कार्टन किस परिस्थिति में इस्तेमाल किया गया और उस समय अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों की क्या स्थिति थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
लाल बाजार के पास ट्रक-बाइक की टक्कर
हादसा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लाल बाजार के पास हुआ। ट्रक और बाइक की भिड़ंत में दो युवक घायल हो गए। दोनों छपरा में शैडोफैक्स कंपनी में डिलीवरी ब्वाय के तौर पर काम करते हैं।

घायलों की पहचान डोरीगंज थाना क्षेत्र के मोहदीपुर गांव निवासी रंजीत चौरसिया के 24 वर्षीय पुत्र अविनाश कुमार और बदलपुर निवासी अमर सिंह के 28 वर्षीय पुत्र राहुल कुमार सिंह के रूप में हुई है।
गंभीर हालत में सदर अस्पताल पहुंचे दोनों युवक
हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को छपरा सदर अस्पताल पहुंचाया गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डा. सुब्रत कुमार ने उनका प्राथमिक उपचार किया।
घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने दोनों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया। स्वजन के अनुसार, हादसे में दोनों युवकों के शरीर पर कई जगह चोटें आई थीं।
पट्टी की जगह कार्टन बांधे जाने पर उठे सवाल
मामले का सबसे गंभीर पहलू प्राथमिक उपचार के दौरान सामने आया। आरोप है कि घायलों के चोट वाले स्थान पर सामान्य ड्रेसिंग सामग्री की जगह दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला कार्टन बांधा गया।

यही तस्वीर और उपचार का तरीका अब अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कार्टन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया, क्या उस समय कोई तत्काल आवश्यकता थी और उपचार में शामिल स्वास्थ्यकर्मी के पास उपलब्ध चिकित्सा सामग्री की स्थिति क्या थी।
इसलिए मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अस्पताल की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
सुविधाओं के दावों के बीच व्यवस्था पर सवाल
सदर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। अस्पताल में 75 प्रकार के ऑपरेशन की सुविधा होने की भी बात कही जाती है।
ऐसे में सड़क हादसे जैसे मामलों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें उपलब्ध कराई गई प्राथमिक चिकित्सा और ड्रेसिंग व्यवस्था जांच के केंद्र में आ गई है।

यहां सवाल मरीजों को पटना रेफर किए जाने के चिकित्सकीय फैसले पर नहीं, बल्कि रेफर करने से पहले किए गए उपचार के तरीके पर उठ रहा है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
मामले को अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डा. केएम दुबे ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को निर्धारित मानकों के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी है।
अब जांच से यह साफ होगा कि जख्म पर कार्टन बांधने की नौबत क्यों आई और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।

