Bihar RERA Action: बिहार में प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा को लेकर बिहार रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। बिल्डरों की ओर से आदेशों का पालन नहीं किए जाने वाले मामलों में अब वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका सीधा असर उन घर खरीदारों पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से अपने पैसे, फ्लैट या अन्य राहत के लिए RERA के आदेश का इंतजार कर रहे थे।
बिहार RERA की आधिकारिक वेबसाइट पर हाल के महीनों में कई execution cases, complaint cases और recovery से जुड़े आदेश दर्ज किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि प्राधिकरण सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुपालन की प्रक्रिया पर भी नजर रख रहा है।
आदेश के बाद भी पैसा नहीं मिला तो RERA की सख्ती
घर खरीदारों की सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आती है जब RERA या संबंधित प्राधिकरण उनके पक्ष में आदेश तो जारी कर देता है, लेकिन बिल्डर निर्धारित समय में उसका पालन नहीं करता।
ऐसे मामलों में execution proceedings महत्वपूर्ण हो जाती हैं। बिहार RERA के रिकॉर्ड में ऐसे मामले मौजूद हैं, जहां आदेश के अनुपालन में देरी या असफलता के बाद recovery certificate जारी करने जैसी कार्रवाई की गई है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राधिकरण का आदेश केवल कागज पर न रहे, बल्कि प्रभावित खरीदार तक उसका वास्तविक लाभ पहुंचे।
बिल्डरों से बकाया की वसूली का रास्ता
RERA Act की धारा 40 के तहत कुछ मामलों में बकाया राशि की वसूली के लिए recovery mechanism का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिहार RERA के एक आधिकारिक आदेश में भी बकाया रकम की वसूली के लिए Public Demand Recovery प्रक्रिया के तहत संबंधित जिला प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई प्रमोटर आदेश के बावजूद निर्धारित राशि का भुगतान नहीं करता, तो मामला सिर्फ RERA की सुनवाई तक सीमित नहीं रहता। वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हो सकती है।
घर खरीदारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
रियल एस्टेट में आमतौर पर खरीदार अपनी जीवनभर की बचत या होम लोन के जरिए फ्लैट खरीदता है। ऐसे में प्रोजेक्ट में देरी, पैसा वापस न मिलना या बिल्डर द्वारा आदेश का पालन नहीं करना उसके लिए बड़ी आर्थिक समस्या बन सकता है।
RERA व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना और खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। बिहार RERA भी पिछले कुछ समय से परियोजनाओं, प्रमोटरों और शिकायतों से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।
बिहार में RERA का दायरा लगातार बढ़ रहा है
बिहार में रियल एस्टेट सेक्टर का आकार भी तेजी से बढ़ा है। बिहार RERA की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जून 2026 तक राज्य में पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं की संख्या 2,000 के पार पहुंच चुकी थी। इसी अवधि में इन परियोजनाओं में कुल निवेश 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया।
जितना बड़ा रियल एस्टेट बाजार होगा, उतनी ही बड़ी संख्या में खरीदार, प्रमोटर और परियोजनाएं नियामकीय दायरे में आएंगी। ऐसे में शिकायतों के निपटारे और आदेशों के क्रियान्वयन की व्यवस्था भी अहम हो जाती है।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट पर भी नजर
बिहार RERA सिर्फ पहले से पंजीकृत परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक जून 2026 में पटना में नियमों के उल्लंघन के संदेह वाले 29 प्रोजेक्टों की जांच शुरू करने से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी। इसके अलावा बिना RERA पंजीकरण वाले प्रोजेक्ट और अपार्टमेंट को लेकर भी कार्रवाई की जा चुकी है।
इसका सीधा संदेश बिल्डरों और प्रमोटरों के लिए है कि परियोजना शुरू करने और बेचने से पहले नियामकीय नियमों का पालन करना जरूरी है।
घर खरीदने से पहले RERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें
अगर आप बिहार में फ्लैट, अपार्टमेंट या प्लॉट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो केवल बिल्डर के विज्ञापन या बिक्री प्रतिनिधि की बात पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है।
खरीदार को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि संबंधित प्रोजेक्ट RERA में पंजीकृत है या नहीं। इसके बाद परियोजना की स्वीकृत जानकारी, पूरा होने की समयसीमा, प्रमोटर का रिकॉर्ड और उपलब्ध शिकायतों/आदेशों की जानकारी भी देखी जा सकती है।
बिहार RERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट, प्रमोटर, एजेंट, शिकायत और आदेश से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।
RERA की कार्रवाई से खरीदारों को क्या फायदा?
RERA की सख्ती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिल्डर और प्रमोटर पर नियामकीय जवाबदेही बढ़ती है। अगर किसी मामले में आदेश जारी होने के बाद भी उसका पालन नहीं किया जाता है, तो execution और recovery की प्रक्रिया के जरिए उसे लागू कराने की कोशिश की जा सकती है।
हाल के आधिकारिक रिकॉर्ड में बिहार RERA की ओर से लगातार complaint, execution और suo-motu proceedings चलाए जाने की जानकारी मिलती है।
इससे घर खरीदारों को यह संकेत मिलता है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद मामले की अगली कड़ी—यानी आदेश का अनुपालन—भी नियामक की निगरानी में आ सकती है।
आगे और सख्त हो सकती है निगरानी
बिहार RERA की गतिविधियों को देखें तो आने वाले समय में नियमों के अनुपालन, प्रोजेक्ट की प्रगति और प्रमोटरों की जवाबदेही पर निगरानी और मजबूत होने की संभावना है। प्राधिकरण पहले ही प्रोजेक्ट और प्रमोटर रैंकिंग, ऑनलाइन शिकायत तथा परियोजना संबंधी जानकारी को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
ऐसे में बिल्डरों के लिए समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना, खरीदारों से जुड़े दायित्व निभाना और RERA के आदेशों का पालन करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
खरीदार शिकायत कहां कर सकते हैं?
अगर किसी खरीदार को लगता है कि बिल्डर ने RERA नियमों का उल्लंघन किया है या उसके अधिकारों का हनन हुआ है, तो वह बिहार RERA की आधिकारिक व्यवस्था के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। प्राधिकरण की वेबसाइट पर शिकायत और केस की स्थिति से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हालांकि, शिकायत दर्ज करने से पहले खरीदार को अपने एग्रीमेंट, भुगतान की रसीद, बिल्डर के साथ हुई बातचीत और प्रोजेक्ट से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। इससे मामले की सुनवाई के दौरान अपना पक्ष मजबूत तरीके से रखने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
बिहार RERA की बढ़ती सक्रियता से यह साफ है कि बिल्डरों के खिलाफ केवल शिकायत दर्ज करने तक मामला सीमित नहीं रहने वाला। आदेशों के अनुपालन और बकाया राशि की वसूली पर भी जोर दिया जा रहा है। घर खरीदारों के लिए यह राहत की बात है, लेकिन प्रॉपर्टी खरीदने से पहले RERA रजिस्ट्रेशन और प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी जांचना अब भी सबसे जरूरी कदम है।
Disclaimer
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बिहार RERA के रिकॉर्ड और संबंधित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। किसी विशेष प्रोजेक्ट या बिल्डर से जुड़े मामले में अंतिम स्थिति जानने के लिए बिहार RERA के आधिकारिक आदेश और केस रिकॉर्ड की जांच करें।