पटना। बिहार में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। राज्य में करीब 2.06 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 13 बड़ी एक्सप्रेसवे और फोरलेन सड़क परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 2,485 किलोमीटर बताई जा रही है।
इनके पूरा होने के बाद बिहार की कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पूर्वोत्तर के राज्यों तक पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि सभी परियोजनाएं एक ही चरण में नहीं हैं। कुछ पर निर्माण चल रहा है, कुछ में जमीन अधिग्रहण और शुरुआती काम जारी है, जबकि कुछ परियोजनाओं का निर्माण अभी शुरू होना बाकी है।
इन सड़क परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी के सफर में समय की बचत के रूप में सामने आ सकता है। प्रस्तावित सड़क नेटवर्क के पूरा होने के बाद गया से कोलकाता की यात्रा करीब 4 घंटे और गया से दिल्ली की यात्रा करीब 12 घंटे में पूरी होने का अनुमान है।
यह समय सड़क की स्थिति, यातायात और वाहन की गति पर निर्भर करेगा, इसलिए इसे संभावित यात्रा समय के तौर पर देखा जाना चाहिए।
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे अहम कड़ी
बिहार के लिए वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। बिहार में इसका हिस्सा करीब 170 किलोमीटर का है। यह कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया के रास्ते आगे झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर कनेक्टिविटी मजबूत करेगा।
इसके अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य चल रहा है। इस कॉरिडोर के पूरा होने से बिहार के दक्षिणी हिस्से को पूर्वी भारत के बड़े शहरों से तेज सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।
अमास-दरभंगा से उत्तर और दक्षिण बिहार जुड़ेंगे
अमास-दरभंगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। करीब 199 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दक्षिण बिहार को उत्तर बिहार से सीधे जोड़ने में मदद करेगा। परियोजना के अलग-अलग पैकेज पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसके पूरा होने से गया और दरभंगा के बीच सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से सीमांचल को फायदा
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राजधानी को सीमांचल और पूर्णिया क्षेत्र से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। मौजूदा सड़क मार्ग से पटना और पूर्णिया के बीच लंबा सफर करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद यात्रा का समय करीब छह घंटे से घटकर लगभग तीन घंटे तक आने का अनुमान है।
इससे पूर्णिया, कोसी और आसपास के इलाकों में कारोबार और आवागमन को फायदा मिल सकता है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 17 से 18 हजार करोड़ रुपये बताई गई है।
रक्सौल से हल्दिया तक मजबूत होगा माल ढुलाई का रास्ता
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार के लिए सिर्फ यात्री सुविधा ही नहीं, बल्कि व्यापार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यह पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और बेगूसराय समेत कई इलाकों को पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ने की दिशा में काम करेगा।
इससे सामान को बंदरगाह तक पहुंचाने में समय कम हो सकता है और माल ढुलाई की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
पटना रिंग रोड से शहर का दबाव घटेगा
राजधानी के आसपास पटना रिंग रोड भी एक अहम परियोजना है। करीब 150 किलोमीटर के इस नेटवर्क का उद्देश्य पटना शहर के भीतर से गुजरने वाले लंबी दूरी के वाहनों को बाहर से रास्ता देना है। इससे शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। रिंग रोड के कुछ हिस्सों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे हिस्सों पर निर्माण जारी है।
बक्सर-भागलपुर 6 लेन एक्सप्रेसवे भी जुड़ा
हाल में बिहार सरकार ने बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। करीब 336 किलोमीटर लंबी 6 लेन सड़क परियोजना पर लगभग 3,700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
यह बक्सर से भागलपुर तक जाएगी और 13 जिलों को सीधे लाभ पहुंचाएगी। परियोजना से बक्सर-भागलपुर के बीच यात्रा समय करीब 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे होने का अनुमान है।
इसके अलावा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, राम-जानकी मार्ग, मोकामा-मुंगेर फोरलेन, रजौली-बख्तियारपुर कॉरिडोर, पटना-आरा-सासाराम ग्रीनफील्ड हाईवे और मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन जैसी परियोजनाएं भी राज्य के सड़क नेटवर्क को विस्तार देंगी। इनमें अलग-अलग स्तर पर निर्माण, जमीन अधिग्रहण या तैयारी का काम चल रहा है।
इन परियोजनाओं का असर सिर्फ सफर तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क से किसानों और कारोबारियों को बाजार तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। माल ढुलाई का समय और लागत घट सकती है।
औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। अगर परियोजनाएं तय योजना के अनुसार पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में बिहार की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।