चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के प्रस्तावित फ्रांस दौरे के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से केंद्र के इनकार पर असंतोष जताया है। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि केंद्र की ओर से बताए गए “राजनीतिक कोण” को स्पष्ट नहीं किया गया। अदालत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पंजाब सरकार ने मंजूरी न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी और हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उसकी याचिका स्वीकार कर ली थी।
‘राजनीतिक कारण’ का स्पष्ट विवरण नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी में यात्रा की मंजूरी राजनीतिक आधार पर अस्वीकार किए जाने की बात कही गई थी। हाई कोर्ट ने पाया कि इस संक्षिप्त कारण से यह स्पष्ट नहीं होता कि आखिर कौन-सा राजनीतिक पहलू या दृष्टिकोण मंजूरी रोकने का आधार बना। अदालत ने इस तरह के निर्णय में कारणों की स्पष्टता और जवाबदेही के महत्व पर सवाल उठाए।
केंद्र ने अदालत में सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और कम समय में मुख्यमंत्री के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की कठिनाई का भी उल्लेख किया था। केंद्र की ओर से औपचारिक निमंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए गए, जबकि पंजाब सरकार ने कहा कि निमंत्रण आवेदन के साथ दिया गया था।
पंजाब सरकार ने फैसले को चुनौती दी
पंजाब सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को फ्रांस में आयोजित SIAL Paris 2026 खाद्य और व्यापार प्रदर्शनी में शामिल होना था। इसका उद्देश्य पंजाब के कृषि और खाद्य-प्रसंस्करण उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देना था। पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (मार्कफेड) को प्रदर्शनी में इंडिया पवेलियन के तहत स्टॉल आवंटित किया गया था।

राज्य सरकार ने दलील दी कि उसने विदेश मंत्रालय से समय रहते मंजूरी मांगी थी, लेकिन आवेदन को बिना पर्याप्त कारण बताए अस्वीकार कर दिया गया। याचिका में निर्णय को मनमाना बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार की
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने शुक्रवार को पंजाब सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री की फ्रांस यात्रा का रास्ता साफ कर दिया। विस्तृत आदेश में मंजूरी से इनकार के कारणों की अस्पष्टता पर अदालत की टिप्पणी सामने आई। भगवंत मान ने अदालत के फैसले के बाद राहत जताई और कहा कि यात्रा का उद्देश्य पंजाब के हितों को बढ़ावा देना है।
राज्य-केंद्र संबंधों पर फिर चर्चा
यह मामला राज्य सरकारों के आधिकारिक विदेश दौरों के लिए केंद्र से राजनीतिक मंजूरी लेने की प्रक्रिया और उसके आधारों पर व्यापक चर्चा से जुड़ा है। पंजाब सरकार का कहना रहा है कि विदेश यात्रा निवेश, व्यापार और राज्य के उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने के लिए प्रस्तावित थी। वहीं केंद्र ने सुरक्षा और यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं।
हाई कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य बिंदु यह है कि निर्णय में बताए गए राजनीतिक आधार को पर्याप्त रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। मामले का महत्व इसलिए भी है कि यह प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और राज्य-केंद्र समन्वय के प्रश्न उठाता है।

