Begusarai। करीब 12 साल पुराने एक मामले में बेगूसराय की अदालत ने आठ नामजद अभियुक्तों को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2014 में बढ़ते अपराध और तीन बच्चों के अपहरण-हत्या के विरोध में निकाले गए कैंडल जुलूस से जुड़े मामले में ADJ-II ब्रजेश कुमार की अदालत ने सभी आठ अभियुक्तों को डिस्चार्ज कर दिया।
अदालत में आरोप गठन को लेकर हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलीलों के बाद यह आदेश सामने आया।
यह मामला 27 मार्च 2014 को बेगूसराय में निकाले गए एक कैंडल जुलूस से जुड़ा है। उस समय जिले में बढ़ते अपराध और तीन बच्चों के अपहरण एवं हत्या की घटनाओं के विरोध में अपराध विरोधी संघर्ष समिति के बैनर तले यह जुलूस निकाला गया था। जुलूस के जरिए अपराध की घटनाओं के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया था।
कैंडल जुलूस के बाद दर्ज हुआ था मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) की ओर से जुलूस को लेकर आचार संहिता के उल्लंघन और सरकारी कार्य में बाधा का आरोप लगाया गया था। इसके आधार पर नगर थाना में कांड संख्या 213/14 दर्ज किया गया था।

मामले में धारा 144, 188, 353, 332, 333 और 153 IPC के तहत कार्रवाई की गई थी। प्राथमिकी में आठ लोगों को नामजद किया गया था, जबकि 20 से 25 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था।
इस मामले की कार्रवाई उस समय के बेगूसराय एसपी के निर्देश पर किए जाने की बात सामने आई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहा और करीब 12 वर्षों तक इससे जुड़े पक्ष अदालत में अपनी बात रखते रहे।
इन लोगों को बनाया गया था नामजद
मामले में अपराध विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुमन कुमार, माकपा नेता अंजनी कुमार सिंह, भाकपा नेता अनिल कुमार अंजान, भाकपा नेता अभिनव अकेला, शिक्षक नेता राजू सिंह, ऑटो डीलर एसोसिएशन के नेता मनमोहन सिंह, वर्तमान में जनसुराज से जुड़े नेता अजीत गौतम और रमेश सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया गया था।
मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को आरोप गठन के बिंदु पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता प्रमोद कुमार, रामाश्रय प्रसाद सिंह और प्रभाष कुमार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।

अदालत ने जुलूस को माना शांतिपूर्ण
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े जुलूस को शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकार के तहत निकाला गया माना। इसके बाद अदालत ने मामले में नामजद सभी आठ अभियुक्तों को DISCHARGE कर दिया।
अदालत के इस फैसले के साथ 2014 में दर्ज इस मामले में नामजद आठ लोगों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में आरोप गठन के चरण पर ही अभियुक्तों को डिस्चार्ज किए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
12 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का हुआ अंत
करीब 12 वर्ष पहले दर्ज हुए इस मामले में अदालत का यह आदेश संबंधित अभियुक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। 2014 में अपराध की घटनाओं के विरोध में निकाला गया कैंडल जुलूस बाद में कानूनी विवाद का हिस्सा बन गया था। अब अदालत ने सुनवाई के दौरान जुलूस को शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकार के तहत माना और सभी आठ नामजद अभियुक्तों को डिस्चार्ज कर दिया।
इस फैसले के बाद मामले से जुड़े लोगों के बीच राहत का माहौल है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अदालत के विस्तृत आदेश की अन्य कानूनी टिप्पणियां सामने नहीं आई हैं, इसलिए फैसले के बाकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

