लखीसराय के बड़हिया में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के पारंपरिक क्रम को लेकर बुधवार रात विवाद गहरा गया। तिलक मैदान स्थित बड़ी देवी की प्रतिमा के विसर्जन से पहले गंगासराय समेत ग्रामीण क्षेत्रों की कई प्रतिमाओं का विसर्जन कराए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई।
विरोध में लोगों ने श्रीकृष्ण चौक पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और रात करीब नौ बजे NH-80 को जाम कर दिया। जाम के कारण देर रात तक यातायात प्रभावित रहा और बड़ी देवी समेत तीन प्रतिमाओं का विसर्जन अटक गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि बड़हिया में लंबे समय से विसर्जन का एक पारंपरिक क्रम चला आ रहा है। उनके अनुसार, सबसे पहले तिलक मैदान स्थित बड़ी देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है और उसके बाद अन्य प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस बार प्रशासनिक स्तर पर तय व्यवस्था के विपरीत बड़ी देवी से पहले अन्य प्रतिमाओं का विसर्जन करा दिया गया। इसी को लेकर विवाद बढ़ा और लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया।
लिखित आश्वासन के बाद सुबह तीन बजे हटा जाम
NH-80 पर जाम की सूचना मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। लखीसराय के एसडीएम प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार गुरुवार सुबह करीब तीन बजे श्रीकृष्ण चौक पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी आपत्तियां सुनीं। बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया और सड़क से जाम हटा लिया।


रात करीब नौ बजे से सुबह तीन बजे तक सड़क पर आवागमन बाधित रहने से लोगों को परेशानी हुई। इस दौरान विसर्जन के लिए तैयार बड़ी देवी समेत तीन प्रतिमाएं भी आगे नहीं बढ़ सकीं। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति बनने के बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।
जैतपुर की प्रतिमा का बदला गया विसर्जन स्थल
जाम के कारण जैतपुर की दुर्गा प्रतिमा को बड़हिया कॉलेज स्थित गंगा घाट तक ले जाना संभव नहीं हो सका। इसके बाद प्रतिमा का हरूहर नदी के बालगुदर घाट पर विसर्जन कराया गया। वहीं, प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद गुरुवार सुबह तिलक मैदान स्थित बड़ी देवी की प्रतिमा का भी विसर्जन किया गया।

दुर्गा पूजा के समापन के दौरान विसर्जन के क्रम को लेकर उठा यह विवाद देर रात तक बड़हिया में चर्चा का विषय बना रहा। प्रशासनिक हस्तक्षेप और लिखित आश्वासन के बाद जाम तो समाप्त हो गया, लेकिन घटना ने स्थानीय स्तर पर विसर्जन व्यवस्था और पारंपरिक क्रम को लेकर उठे मतभेद को सामने ला दिया।
