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गंडक की गर्जना से खुलती है नींद, सुबह सामने दिखता है उजड़ा घर! 109 मकान नदी में समाए, तंबुओं में कट रही जिंदगी

State Desk Bihar
Last updated: अगस्त 21, 2026 1:56 अपराह्न
By : State Desk Bihar
Published on : 2 महीना पहले
बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के कटाव से घर नदी में समाए
बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के लगातार कटाव से 109 घर नदी में समा चुके हैं।
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बगहा के रेवहिया गांव में नदी का खौफ, घर बचाना मुश्किल तो लोग खुद निकाल रहे सामान; स्कूल भी गंडक में समाया, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

बगहा। पश्चिम चंपारण के बगहा इलाके में गंडक नदी का कटाव लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। मधुबनी प्रखंड की चिऊरही पंचायत के रेवहिया गांव में नदी लगातार जमीन काट रही है। हालात इतने खराब हैं कि अब ग्रामीणों को अपने घर और सामान की चिंता हर समय सताती रहती है। कई परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगह जाने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग खुद ही घर का सामान निकालकर बचाने में जुटे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि रात में गंडक की तेज आवाज सुनकर डर लगता है। उन्हें चिंता रहती है कि नदी की धारा कब उनके घर तक पहुंच जाए। जिन लोगों के घर अभी बचे हुए हैं, उन्हें भी भरोसा नहीं है कि उनका आशियाना कितने दिन सुरक्षित रहेगा।

109 घर नदी में समा चुके

गंडक के लगातार कटाव से रेवहिया गांव में अब तक 109 घर नदी में समा चुके हैं। जिन परिवारों ने अपनी आंखों के सामने घर को नदी में जाते देखा, उनके लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।

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बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के कटाव से घर नदी में समाए

कई ग्रामीणों ने बताया कि घर पूरी तरह नदी की चपेट में आने से पहले ही वे अपना जरूरी सामान बाहर निकालने लगे। ईंट, लकड़ी, बर्तन, कपड़े और दूसरे जरूरी सामान को लोग सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं। कुछ परिवार तो अपने घरों को खुद तोड़ रहे हैं, ताकि कम से कम घर का सामान और बची हुई सामग्री काम आ सके।

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सालों की मेहनत से बनाया गया घर कुछ ही समय में नदी की तेज धारा में समा जाना ग्रामीणों के लिए बेहद दर्दनाक है।

बच्चों का स्कूल भी नहीं बचा

गंडक के कटाव का असर सिर्फ घरों तक नहीं रहा। गांव का प्राथमिक विद्यालय उर्दही चिऊरही भी नदी की चपेट में आ गया। जिस स्कूल में बच्चे पढ़ने जाते थे, वहां अब गंडक की धारा बह रही है।

बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के कटाव से घर नदी में समाए

स्कूल के नदी में समा जाने से बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है। ग्रामीणों के लिए यह परेशानी और बड़ी है, क्योंकि घर उजड़ने के साथ बच्चों की पढ़ाई का ठिकाना भी उनसे छिन गया है।

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अब घर नहीं, सामान बचाने की चिंता

कटाव ने ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी है। पहले लोग खेती, घर और रोजमर्रा के काम की चिंता करते थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घर और सामान को कैसे बचाया जाए।

बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के कटाव से घर नदी में समाए

कई परिवार सुरक्षित जगह की तलाश में हैं। कुछ लोग अस्थायी ठिकानों पर रह रहे हैं। ऐसे परिवारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बारिश और रात का समय है। अंधेरा होते ही नदी की आवाज और कटाव का डर और बढ़ जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी इसी तरह कटाव करती रही तो बचे हुए घर भी खतरे में आ सकते हैं। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है।

हर साल लौटता है कटाव का डर

रेवहिया के लोगों के लिए गंडक का कटाव कोई नई परेशानी नहीं है। हर साल बरसात के समय नदी का पानी बढ़ने के साथ कटाव का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन इस बार स्थिति काफी गंभीर बताई जा रही है।

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बगहा के रेवहिया गांव में गंडक नदी के कटाव से घर नदी में समाए

ग्रामीणों की मांग है कि केवल तत्काल राहत देने से समस्या खत्म नहीं होगी। नदी के कटाव को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। लोगों का कहना है कि जब तक पक्का इंतजाम नहीं होगा, तब तक हर बरसात में घर और जमीन बचाने का डर बना रहेगा।

प्रशासन ने लिया हालात का जायजा

कटाव की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन की टीम ने भी मौके का जायजा लिया। मधुबनी के अंचलाधिकारी नंदलाल राम ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। प्रभावित लोगों की स्थिति की जानकारी ली गई और उन्हें जरूरी मदद देने की बात कही गई।

प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को नियमानुसार बासगीत का पर्चा देने की बात भी कही गई है। ग्रामीणों को सुरक्षित जगह जाने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

हर सुबह नई चिंता लेकर आती है

रेवहिया के लोगों की परेशानी सिर्फ घर खोने तक सीमित नहीं है। किसी का आशियाना गया, किसी का सामान, तो किसी के बच्चों का स्कूल ही नदी में समा गया। अब जिनके घर बचे हैं, वे भी डर के साये में जी रहे हैं।

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गंडक की तेज आवाज उन्हें बार-बार खतरे का एहसास कराती है। रात में नींद टूटती है तो सबसे पहले नजर घर और नदी की तरफ जाती है। ग्रामीणों के लिए अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नदी का कटाव रुके और उन्हें अपने घर-परिवार के साथ सुरक्षित जिंदगी जीने का मौका मिले। फिलहाल रेवहिया में गंडक का कहर जारी है और गांव के लोगों की हर सुबह एक नई चिंता के साथ शुरू हो रही है।

TAGGED:Bagaha NewsBihar NewsGandak FloodGandak River
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