पटना, 23 सितंबर 2026: पटना के ज्ञान भवन में 11वें आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर बुधवार को राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य आयुष समिति और स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने किया।
कार्यक्रम में आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और डिजिटल संसाधनों से जोड़कर आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। इसमें पटना के कदमकुआं स्थित राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के इतिहास, योगदान और आयुर्वेद की उपयोगिता को दर्शाया गया। साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक शोध और प्रमाण आधारित चिकित्सा व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला गया।
आयुर्वेद को गांवों और गरीब परिवारों तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार, आयुर्वेद केवल बीमारियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली पर भी जोर देता है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार आयुर्वेद और पूरे आयुष क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की योजना आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सुविधाओं को शहरों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण इलाकों और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने की है।
294 आयुष आरोग्य मंदिर और अस्पताल विकसित करने की योजना
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में 294 आयुष आरोग्य मंदिर/आयुष अस्पताल विकसित किए जा रहे हैं। जर्जर स्वास्थ्य संस्थानों के जीर्णोद्धार पर भी काम किया जाएगा।

उन्होंने पटना के राजकीय आयुर्वेद कॉलेज को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की बात कही। इसके तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च लैब, अस्पताल और IPD सुविधाओं को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने तथा विभिन्न विभागों में जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बताई गई।
Essential Drug List में आयुर्वेदिक दवाओं को शामिल करने पर काम
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं को Essential Drug List में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों द्वारा इन दवाओं के इस्तेमाल को व्यवस्थित करना और पात्र मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में आयुर्वेद के लिए अलग विंग विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया।
डिजिटल रिकॉर्ड और AI के इस्तेमाल पर भी जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था के डिजिटलीकरण, मरीजों के डिजिटल रिकॉर्ड, वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आवश्यकता बताई।

उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में Artificial Intelligence (AI) के उपयोग की दिशा में भी काम करने की बात कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीकी संसाधनों और शोध के साथ जोड़कर आयुष चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
स्वास्थ्य सचिव बोले- ‘संतुलन ही आयुर्वेद का मूल मंत्र’
स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि आयुर्वेद में संतुलन की अवधारणा को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने वात, पित्त और कफ के संतुलन के साथ शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन को आयुर्वेद की महत्वपूर्ण अवधारणा बताया।

उन्होंने कहा कि प्रमाण आधारित शोध के साथ आयुष और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को जोड़ने से जनविश्वास को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकों और विद्यार्थियों से आधुनिक तकनीक, डिजिटल संसाधनों और AI का उपयोग अपने ज्ञान एवं अनुभव के साथ करने का आह्वान किया।
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए चिकित्सकों और अधिकारियों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने आयुर्वेद और स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों एवं अधिकारियों को सम्मानित किया।
सम्मानित होने वालों में डॉ. वरुण कुमार, डॉ. प्रो. अजय कुमार सिंह, डॉ. प्रो. महेश महतो, डॉ. भगवान सिंह, डॉ. प्रो. दिपाली सुन्दरी वर्मा, डॉ. रत्नेश्वर शर्मा, डॉ. गिन्नी जाखनवाल और आलोक कुमार सिंह शामिल रहे।
औषधीय पौधों और आयुर्वेदिक सेवाओं की प्रदर्शनी का अवलोकन
कार्यक्रम के उद्घाटन से पहले स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की आधुनिक रक्तदान वैन का निरीक्षण किया। इसके बाद राजकीय आयुर्वेद कॉलेज की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का जायजा लिया।
प्रदर्शनी में औषधीय पौधों, आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श और औषधि वितरण से जुड़े स्टॉल लगाए गए थे। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से इन सेवाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग और राज्य आयुष समिति के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा आयुर्वेद के शिक्षक, चिकित्सक, शोधकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।