जम्मू में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 286 खिलाड़ियों के बीच हासिल किया पहला स्थान; जमशेदपुर के इस युवा खिलाड़ी की झोली में पहले भी आ चुके हैं अंतरराष्ट्रीय पदक
जमशेदपुर: जमशेदपुर के सोनारी निवासी 14 वर्षीय Adhiraj Mitra ने शतरंज की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
जम्मू में 28 सितंबर से 6 अक्टूबर तक हुई 36वीं नेशनल अंडर-17 ओपन शतरंज चैंपियनशिप में झारखंड के अधिराज ने 11 राउंड में 9 अंक जुटाकर पहला स्थान हासिल किया और राष्ट्रीय अंडर-17 चैंपियन बने। प्रतियोगिता में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 286 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
11 राउंड में लगातार मजबूत प्रदर्शन
अधिराज ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की और पूरे मुकाबले में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाए रखी। उनके 11 राउंड के प्रदर्शन में 7 जीत और 4 ड्रॉ रहे, यानी पूरे टूर्नामेंट में उन्हें एक भी हार नहीं मिली।

आखिरी राउंड में उन्होंने मध्य प्रदेश के एफएम माधवेंद्र प्रताप शर्मा को हराकर अपने खाते में नौवां अंक जोड़ा और खिताब पक्का किया। आधिकारिक खिलाड़ी रिकॉर्ड में भी अधिराज के 11 राउंड के बाद 9 अंक और पहला स्थान दर्ज है।
टूर्नामेंट फिडे के नियमों के तहत स्विस सिस्टम में खेला गया। कुल 11 राउंड के इस मुकाबले में अधिराज का प्रदर्शन खास इसलिए भी रहा क्योंकि उन्हें लगातार मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना पड़ा। फाइनल स्टैंडिंग में तमिलनाडु के हरिदेव एस 9 अंकों के साथ दूसरे और चंडीगढ़ के वेदांत गर्ग 8.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
सात साल की उम्र से शतरंज, अब ग्रैंडमास्टर बनने का लक्ष्य
अधिराज जमशेदपुर के लोयोला स्कूल में कक्षा 9 के छात्र हैं। उन्होंने करीब सात साल की उम्र में शतरंज सीखना शुरू किया था। इतने कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनका नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अनुभव अहम रहा है।
परिवार में भी उनके खेल को लेकर पूरा समर्थन है। उनके पिता उत्तम मित्रा और मां स्वर्णा मित्रा बेटे को भविष्य में ग्रैंडमास्टर के रूप में देखना चाहते हैं। अधिराज का भी लक्ष्य शतरंज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाकर ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करना है।

राष्ट्रीय खिताब से पहले विदेशों में भी चमक चुका है नाम
अधिराज के लिए यह पहला बड़ा राष्ट्रीय खिताब नहीं है। वह पहले भी भारत के बाहर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। नवंबर 2025 में मलेशिया के कुआलालंपुर में हुए कॉमनवेल्थ चेस चैंपियनशिप के अंडर-14 वर्ग में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। आधिकारिक परिणामों के मुताबिक उन्होंने 9 राउंड में 8 अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया था।
इसके बाद 2026 में श्रीलंका में हुई कॉमनवेल्थ यूथ चेस चैंपियनशिप के अंडर-14 वर्ग में भी उन्होंने तीन पदक जीते—ब्लिट्ज में स्वर्ण, रैपिड में रजत और क्लासिकल में कांस्य।
जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम स्तर पर भी अधिराज का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। उपलब्ध टूर्नामेंट रिकॉर्ड में वह जिला और राज्य स्तर की कई प्रतियोगिताओं में चैंपियन रह चुके हैं। मार्च 2025 में पूर्वी सिंहभूम जिला अंडर-15 चैंपियनशिप में भी उन्होंने पहला स्थान हासिल किया था।
राष्ट्रीय खिताब के साथ अब अंतरराष्ट्रीय मंच का रास्ता
जम्मू में मिली इस जीत से अधिराज की उपलब्धियों में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। इस प्रतियोगिता के शीर्ष तीन लड़कों और लड़कियों का चयन 2027 की विश्व, एशियाई और कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं के लिए किया गया है।

प्रतियोगिता के आयोजकों के अनुसार, इन अंतरराष्ट्रीय दौरों में खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से समर्थन दिया जाएगा और ऑल इंडिया चेस फेडरेशन भी प्रायोजन सहायता देगा।
14 साल की उम्र में राष्ट्रीय अंडर-17 खिताब जीतने के बाद अधिराज के सामने अब अगली चुनौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन को और मजबूत करने की है।
जमशेदपुर का यह युवा खिलाड़ी पहले ही राष्ट्रीय और कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुका है; अब उसका लक्ष्य साफ है—बड़े मंचों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए ग्रैंडमास्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ना।
