कोलकाता के कालीघाट में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर शुक्रवार देर रात राजनीतिक तनाव हिंसक झड़प में बदल गया। जन्मदिन की पूर्व संध्या पर जुटे समर्थकों और भाजपा समर्थकों के बीच पहले नारेबाजी हुई, फिर ईंटबाजी और मारपीट की नौबत आ गई। घटना में दोनों पक्षों के कम से कम सात लोगों के घायल होने का दावा किया गया है।
अभिषेक बनर्जी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे उनके समर्थक जन्मदिन के अवसर पर कालीघाट स्थित आवास के सामने मौजूद थे। इसी दौरान कुछ भाजपा समर्थकों ने उनके खिलाफ नारे लगाने शुरू किए। जवाब में तृणमूल समर्थकों ने भी नारेबाजी की। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। आरोप है कि इस दौरान अभिषेक के कटआउट और पोस्टर फाड़े गए और फिर दोनों ओर से ईंटें चलने लगीं।
कार्यक्रम और घटनाक्रम की प्रमुख बातें
घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। हालांकि देर रात तक तनाव बने रहने की बात सामने आई। अभिषेक बनर्जी ने रात करीब दो बजे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कोलकाता पुलिस की मौजूदगी में भाजपा समर्थित उपद्रवियों ने उनके आवास पर हमला किया। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनके समर्थक बड़ी संख्या में वहां मौजूद नहीं होते तो उनकी जान को खतरा हो सकता था।
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि झड़प के दौरान एक पुलिसकर्मी के गाल पर थप्पड़ मारा गया। उन्होंने कहा कि उनके कई समर्थक घायल हुए और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि उपलब्ध विवरण में घायलों के नाम, उनकी चोटों की प्रकृति और अस्पतालों का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी अपने आवास से बाहर आए। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी बहस हुई। इसके बाद वह घर के बाहर धरने पर बैठ गए। जानकारी के अनुसार, उनका धरना करीब चार घंटे तक चला। शनिवार तड़के वह आवास के भीतर लौटे। सुबह तृणमूल सांसद डोला सेन भी उनसे मिलने पहुंचीं। जन्मदिन से ठीक पहले हुई इस घटना ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया।
इस घटनाक्रम में दो राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच टकराव के साथ पुलिस की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। अभिषेक बनर्जी ने पुलिस की मौजूदगी में हमला होने का आरोप लगाया है, जबकि घटना के दौरान पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। ऐसे मामलों में घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दर्ज शिकायतें यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती हैं कि झड़प की शुरुआत कैसे हुई और किस पक्ष की क्या भूमिका रही।
आयोजन का व्यापक महत्व
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी पक्ष के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी, हिरासत या गिरफ्तारी का विवरण नहीं है। इसलिए घटना को लेकर सामने आए आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही घायलों की संख्या, नुकसान और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कालीघाट स्थित आवास के बाहर हुई इस झड़प ने एक बार फिर राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।
