पटना में नामांकन का झांसा देकर छात्र से 45 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए बिना उच्च शिक्षण संस्थान में दाखिला कराने का भरोसा देकर छात्र से अलग-अलग समय पर रकम ली गई, लेकिन बाद में किसी संस्थान में नामांकन नहीं कराया गया। पीड़ित ने गांधी मैदान थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दी है और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे हैं।
शिकायतकर्ता की पहचान गया जिले के बांके बिहारी क्षेत्र के जूरी गांव निवासी मनोज रजक के रूप में हुई है। मनोज के अनुसार, नामांकन कराने के नाम पर वर्ष 2023 से 2025 के बीच अलग-अलग तारीखों में उनसे रकम ली गई। शिकायत में एग्जीबिशन रोड स्थित आशियाना टावर के वैशाली एजुकेशनल फाउंडेशन से जुड़े लोगों के नाम भी दिए गए हैं।
नामांकन के नाम पर अलग-अलग तारीखों में रकम लेने का आरोप
मनोज ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि आकांक्षा और सोनाली समेत रोशन, मनीष, गौरव और वीरेंद्र ने उच्च शिक्षण संस्थान में दाखिला कराने का भरोसा दिया। आरोप है कि प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए बिना नामांकन कराने का आश्वासन दिया गया और इसी आधार पर अलग-अलग समय में कुल 45 हजार रुपये लिए गए।
पीड़ित का कहना है कि रकम देने के बावजूद किसी भी संस्थान में उसका नामांकन नहीं कराया गया। जब उसने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपितों की ओर से कथित तौर पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत में इन आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।

ऑनलाइन लेन-देन के साक्ष्य पुलिस को सौंपे
मामले में पीड़ित ने केवल मौखिक आरोप लगाने के बजाय ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस अब शिकायत में दर्ज आरोपों, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और नामांकन के लिए किए गए कथित संपर्कों की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि रकम किस माध्यम से और किन-किन तारीखों में ली गई।
पटना आने-जाने में भी खर्च होने का दावा
मनोज के अनुसार, नामांकन की उम्मीद में पटना आने-जाने के दौरान उनके करीब 20 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो चुके हैं। उनका आरोप है कि बार-बार संपर्क और पटना आने के बावजूद दाखिले की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की।
इस तरह शिकायत में कुल 45 हजार रुपये की कथित ठगी के साथ-साथ नामांकन के लिए किए गए अतिरिक्त खर्च का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की छानबीन शुरू की है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
गांधी मैदान थाना पुलिस अब शिकायत में नामजद सभी लोगों से जुड़े तथ्यों की जांच कर सकती है। पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि नामांकन कराने का दावा किस आधार पर किया गया था और पीड़ित से रकम लेने के बाद वास्तविक रूप से क्या कार्रवाई की गई। साथ ही ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

नामांकन के नाम पर आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामलों में दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इस मामले में भी पुलिस उपलब्ध ऑनलाइन लेन-देन के साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल प्राथमिकी या जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं, इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को पुलिस जांच के परिणाम के साथ ही देखा जाएगा।
मनोज की शिकायत के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 2023 से 2025 के बीच हुए कथित लेन-देन और नामांकन के आश्वासन के पीछे पूरा घटनाक्रम क्या था। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
