भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए नई गति देने की कोशिश तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने अपने AI INSPIRED कार्यक्रम के तहत छह निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की संस्थाओं को सीड फंड अनुदान के लिए चुना है। प्रत्येक चयनित परियोजना को अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य अंतरिक्ष यान की सटीक लैंडिंग, अंतरिक्ष में मलबे की पहचान, उपग्रहों की सर्विसिंग और अंतरिक्ष यानों को अधिक स्वायत्त बनाना है।
IN-SPACe की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह चयन उसके Seed Fund Scheme के तहत जारी AI INSPIRED अवसर के लिए किया गया है। इस पहल की घोषणा 25 फरवरी 2026 को हुई थी। कार्यक्रम का कुल वित्तीय प्रावधान अधिकतम 6 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक और नए उत्पाद विकसित करने वाले स्टार्टअप तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को प्रोत्साहित करना है।
किन छह कंपनियों को मिला अनुदान?
चयनित छह संस्थाओं के प्रोजेक्ट अलग-अलग तकनीकी चुनौतियों पर केंद्रित हैं। IN-SPACe की सूची के मुताबिक इनमें शामिल हैं:
- अग्निकुल कॉसमॉस (Agnikul Cosmos): एज AI-सक्षम विजन-आधारित टर्मिनल नेविगेशन मॉड्यूल विकसित करेगी। इसका मकसद लैंडिंग के अंतिम चरण में अंतरिक्ष यान को अधिक सटीक दिशा और स्थिति संबंधी जानकारी देना है।
- दिगंतारा (Digantara): Agentic RSO Evaluation Suite यानी ARES पर काम करेगी। यह अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं के मूल्यांकन और उनसे जुड़े विश्लेषण में AI की भूमिका को आगे बढ़ाने वाली परियोजना है।
- EON Space Labs: FPGA-आधारित एज AI के साथ एक इंटेलिजेंट ऑप्टिकल पेलोड विकसित करेगी। इसका उपयोग रियल-टाइम स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और अंतरिक्ष मलबे का पता लगाने में किया जाएगा।
- OrbitAid Aerospace: कक्षा में उपग्रहों की सर्विसिंग और ईंधन भरने से जुड़े अभियानों के लिए मशीन लर्निंग आधारित पोज-एस्टिमेशन एल्गोरिद्म विकसित करेगी। इससे एक अंतरिक्ष यान दूसरे यान के सापेक्ष अपनी स्थिति और दिशा का अनुमान लगा सकेगा।
- Omnipresent Robot Technologies: ऑटोमेटेड टारगेट रिकग्निशन तकनीक पर काम करेगी। इसके संभावित उपयोगों में रक्षा और अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग शामिल हैं।
- TakeMeToSpace: अंतरिक्ष यान की स्वायत्तता बढ़ाने के लिए Attitude Determination and Control System (ADCS) के AI आधुनिकीकरण पर काम करेगी। ADCS अंतरिक्ष यान की दिशा, अभिविन्यास और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
दो अन्य संस्थाओं को मेंटरशिप और तकनीकी सहयोग
छह अनुदान पाने वाली संस्थाओं के अलावा IN-SPACe ने दो अन्य कंपनियों—Foucault Private Limited और AkashaVeda Technologies—को मेंटरशिप तथा तकनीकी सहायता के लिए चुना है। इन्हें सीड फंड के छह अनुदान विजेताओं में शामिल नहीं किया गया है।

Foucault का प्रोजेक्ट AI और मशीन लर्निंग आधारित स्वायत्त अंतरिक्ष यान टक्कर-परिहार प्रणाली (Autonomous Collision Avoidance System) विकसित करने पर केंद्रित है। AkashaVeda Technologies ऑन-बोर्ड और ग्राउंड ऑपरेशंस के लिए AI आधारित मिशन मैनेजमेंट समाधान पर काम करेगी। दोनों संस्थाओं को IN-SPACe और ISRO की सुविधाओं का उपयोग कर अपनी तकनीक का परीक्षण और सत्यापन करने के अवसर मिलेंगे। विभागीय तकनीक हस्तांतरण पर विचार किए जाने की संभावना भी आधिकारिक घोषणा में शामिल है।
अंतरिक्ष में AI की जरूरत क्यों बढ़ रही है?
अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी मात्रा में डेटा, तेजी से बदलती परिस्थितियां और सीमित संचार समय जैसी चुनौतियां होती हैं। पृथ्वी से हर निर्णय का इंतजार करना कई स्थितियों में धीमा या व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। ऐसे में अंतरिक्ष यान या उपग्रह पर मौजूद कंप्यूटिंग प्रणाली यदि कुछ निर्णय स्थानीय स्तर पर ले सके, तो प्रतिक्रिया का समय घट सकता है। इसे एज AI या ऑन-बोर्ड इंटेलिजेंस के रूप में समझा जा सकता है।
उदाहरण के लिए, लैंडिंग के दौरान कैमरा और सेंसर से मिले संकेतों का तत्काल विश्लेषण अंतरिक्ष यान को अधिक सटीक दिशा तय करने में मदद कर सकता है। इसी तरह, ऑप्टिकल पेलोड से प्राप्त आंकड़ों का कक्षा में ही विश्लेषण संभावित अंतरिक्ष मलबे या अन्य वस्तुओं की पहचान में उपयोगी हो सकता है। उपग्रहों की सर्विसिंग और डॉकिंग में दो अंतरिक्ष यानों के बीच दूरी, स्थिति और अभिविन्यास का सटीक अनुमान जरूरी होता है। AI और मशीन लर्निंग इन प्रक्रियाओं को अधिक स्वचालित बनाने में सहायक हो सकते हैं।
हालांकि, AI आधारित प्रणाली अपने आप में जोखिम-मुक्त नहीं होती। अंतरिक्ष में विकिरण, तापमान, सीमित ऊर्जा, सेंसर की त्रुटि और संचार में बाधा जैसी परिस्थितियां तकनीक की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए प्रयोगशाला में विकसित समाधान को वास्तविक मिशन में इस्तेमाल करने से पहले कठोर परीक्षण, सुरक्षा मानकों और स्वतंत्र सत्यापन की जरूरत होगी। IN-SPACe तथा ISRO की परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच इस लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए क्या मायने?
भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2026 में संसद में दिए गए सरकारी विवरण के मुताबिक DPIIT के Startup India पोर्टल पर लगभग 440 अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पंजीकृत थे। ऐसे परिदृश्य में शुरुआती चरण की वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच नई कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
सीड फंड का उद्देश्य केवल किसी विचार को आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उसे विकसित कर परीक्षण योग्य तकनीक या उत्पाद की दिशा में आगे बढ़ाना भी है। अंतरिक्ष क्षेत्र में हार्डवेयर, सेंसर, सॉफ्टवेयर और मिशन-स्तरीय प्रणालियों का विकास महंगा और समय लेने वाला होता है। शुरुआती सहायता से स्टार्टअप प्रोटोटाइप, तकनीकी सत्यापन और विकास के अगले चरण की तैयारी कर सकते हैं।
AI INSPIRED कार्यक्रम के चयन से यह संकेत मिलता है कि भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र अब केवल रॉकेट और उपग्रह निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता। नेविगेशन, कक्षा में मौजूद वस्तुओं की निगरानी, स्वायत्त संचालन, डॉकिंग और अंतरिक्ष में सर्विसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों में भी घरेलू तकनीक विकसित करने पर जोर है। इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता उनके परीक्षण परिणाम, तकनीकी विश्वसनीयता और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग पर निर्भर करेगी।
आगे की राह: अनुदान से मिशन-स्तर की तकनीक तक
छह चयनित परियोजनाओं को अधिकतम 1-1 करोड़ रुपये की सहायता मिलने की पात्रता है; इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी को बिना शर्त पूरी राशि तत्काल वितरित कर दी गई है। परियोजनाओं की प्रगति, तकनीकी उपलब्धियों और निर्धारित शर्तों के अनुरूप अनुदान का उपयोग महत्वपूर्ण होगा। इसी तरह, Foucault और AkashaVeda को मिलने वाला सहयोग मेंटरशिप और तकनीकी सहायता के रूप में है, न कि छह सीड-फंड अनुदानों के समान।

भारत के लिए चुनौती अब इन शुरुआती परियोजनाओं को भरोसेमंद, किफायती और व्यावहारिक अंतरिक्ष समाधानों में बदलने की है। यदि चयनित कंपनियां सफलतापूर्वक अपने सिस्टम विकसित और सत्यापित कर पाती हैं, तो इससे घरेलू अंतरिक्ष उद्योग को उच्च-मूल्य वाली तकनीकों में क्षमता बनाने का अवसर मिल सकता है।
