नालंदा/गिरियक: भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में एक बार फिर धर्म, आस्था और संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। 2552वें पावापुरी महोत्सव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजकीय महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन 7 और 8 नवंबर को प्रस्तावित है। इसके साथ ही भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़े धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला भी चलेगी। आयोजन को व्यवस्थित और भव्य स्वरूप देने के लिए स्थल निरीक्षण का दौर शुरू हो गया है।
महोत्सव की तैयारियों के सिलसिले में नालंदा समाहरणालय के पदाधिकारी मेला ठेकेदार के साथ आयोजन स्थल पहुंचे और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दिगंबर जैन मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों को भी निरीक्षण के दौरान शामिल किया गया। अधिकारियों ने आयोजन से जुड़ी जरूरतों, स्थल की व्यवस्था और पंडाल निर्माण को लेकर जानकारी ली। नजारत विभाग के अधिकारियों ने भी पंडाल लगाने के लिए उपयुक्त स्थान का निरीक्षण किया है।
3 नवंबर को राजगीर में होगी तैयारी बैठक
आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए 3 नवंबर को राजगीर स्थित कन्वेंशन हॉल में बैठक प्रस्तावित है। इसमें महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों, पंडाल निर्माण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर बैठक के बाद तैयारियों को और गति मिलने की उम्मीद है।
पावापुरी महोत्सव को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह है। भगवान महावीर की निर्वाण स्थली होने के कारण इस आयोजन का धार्मिक महत्व पहले से ही व्यापक है। महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे
पावापुरी महोत्सव की खासियत धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन है। आयोजन में देश के नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं। गायन, नृत्य, संगीत और अन्य रंगारंग कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों को सांस्कृतिक अनुभव देने की तैयारी की जाती है। इससे महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर व्यापक सांस्कृतिक मंच का स्वरूप मिलता है।
महोत्सव के दूसरे दिन नालंदा जिले के सरकारी और निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। बच्चे समूह नृत्य, संगीत और अन्य प्रस्तुतियों के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। इस पहल से स्थानीय स्कूली प्रतिभाओं को मंच मिलता है और नई पीढ़ी को क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर भी मिलता है।
2017 में मिला था राजकीय महोत्सव का दर्जा
पावापुरी में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस और दीपावली के अवसर पर धार्मिक आयोजन तथा पारंपरिक मेले की परंपरा पुरानी है। हालांकि पावापुरी महोत्सव को वर्ष 2017 में राजकीय पहचान मिली। स्रोत के अनुसार वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव को राजकीय स्तर पर आयोजित करने की घोषणा की थी। इसके बाद 17 और 18 अक्टूबर 2017 को पहली बार दो दिवसीय राजकीय पावापुरी महोत्सव आयोजित किया गया।
पहले राजकीय आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रदर्शनी और विभिन्न सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए गए थे। भगवान महावीर के जन्म से निर्वाण तक की जीवन यात्रा को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। देश के प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी आयोजन को आकर्षक बनाया था। इसके बाद से यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक कैलेंडर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
पावापुरी महोत्सव का महत्व केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। यह भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा, करुणा, अपरिग्रह और शांति के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी है। निर्वाण महोत्सव के दौरान जल मंदिर, निर्वाण स्थल और अन्य जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और शास्त्र प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।
इसी कारण पावापुरी में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम जैन समाज के श्रद्धालुओं के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजन को व्यापक स्वरूप देती हैं और स्थानीय स्तर पर पर्यटन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद रहती है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आमंत्रण
दिगंबर जैन मंदिर के मैनेजर अरुण कुमार जैन के अनुसार, महोत्सव के उद्घाटन समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस बीच प्रशासनिक तैयारियों को लेकर 3 नवंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
पावापुरी महोत्सव को लेकर तैयारियों के बीच अब प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और आयोजन से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय पर नजर है। आने वाले दिनों में पंडाल निर्माण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य व्यवस्थाओं की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

