महिला उत्पीड़न और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश; चोरबागान भगदड़ पर भ्रामक पोस्ट फैलाने वालों पर भी कार्रवाई के संकेत
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में महिला उत्पीड़न, नशीले पदार्थों के कारोबार और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को कानून के दायरे में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली दौरे से लौटने के बाद भवानी भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई कर सकती है और सरकार उसके साथ खड़ी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और नशे के कारोबार पर रोक लगाने को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाएगी। उन्होंने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपना व्यवहार सुधारना होगा, अन्यथा जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा।
गांजा, चरस और हेरोइन समेत नशीले पदार्थों पर कार्रवाई
शुभेंदु अधिकारी ने गांजा, चरस, फेन्सिडिल, हेरोइन और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की बात कही। उनका संदेश पुलिस और प्रशासन के लिए स्पष्ट था कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों तथा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को हल्के में न लिया जाए।
महिला उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि प्रभावी पुलिस कार्रवाई के साथ पीड़ितों की शिकायत सुनना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और जांच को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, मुख्यमंत्री के बयान में अभियान की समय-सीमा, विशेष कार्रवाई की संख्या या किसी नई पुलिस व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया।

चोरबागान भगदड़ पर अफवाह फैलाने वालों को लेकर चेतावनी
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ का भी जिक्र किया। 17 अक्टूबर को हुई इस घटना में 19 लोगों की मौत हुई थी और 25 लोग घायल हुए थे।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर मृतकों की संख्या 76 या 91 बताकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने पुराने घटनाक्रम के वीडियो का इस्तेमाल कर भ्रामक दावे प्रसारित किए जाने की भी बात कही। उनके अनुसार, ऐसी अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष सेल गठित किया गया है।
भगदड़ जैसी गंभीर घटना के बाद मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर गलत जानकारी पीड़ित परिवारों की परेशानी बढ़ा सकती है और आम लोगों में भ्रम पैदा कर सकती है। ऐसे मामलों में प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। साथ ही, किसी सोशल मीडिया पोस्ट को भ्रामक बताने से पहले उसके संदर्भ और तथ्यों की जांच भी अहम है।
आलोचना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार रचनात्मक आलोचना और सुझावों का स्वागत करती है, लेकिन झूठी खबरों और भड़काऊ प्रचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों और कानूनी सीमाओं के भीतर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है।

हालांकि, उनके मुताबिक, विरोध के नाम पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने या अराजकता फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस तरह अधिकारी ने एक ओर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वीकार किया, तो दूसरी ओर हिंसा और कानून तोड़ने की घटनाओं पर सख्ती का संदेश दिया।
कार्रवाई कानून के दायरे में होना जरूरी
महिला सुरक्षा और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस की सक्रियता अहम है। लेकिन किसी भी कार्रवाई में शिकायत की निष्पक्ष जांच, सबूतों के आधार पर कदम और कानूनी प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है। इसी तरह, सोशल मीडिया पर गलत सूचना के खिलाफ कार्रवाई करते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैध आलोचना के अधिकार का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण होगा।
शुभेंदु अधिकारी के बयान का मुख्य संदेश महिला उत्पीड़न, नशीले पदार्थों के कारोबार और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सख्ती बरतने का है। अब यह देखना होगा कि सरकार की इस चेतावनी के बाद पुलिस किस तरह की ठोस कार्रवाई करती है और उसके नतीजे जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।
