Nalanda news। नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित 25वें अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन (IASSC) का चार दिवसीय आयोजन राज्यपाल सैयद अता हसनैन के संबोधन के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन में देश के विकास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, महिला शोधकर्ताओं की भूमिका और सतत विकास लक्ष्यों को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बिहार देश का गढ़ और भारत का ‘सेंटर ऑफ ग्रेविटी’ है। जब तक बिहार का सर्वांगीण विकास नहीं होगा, तब तक वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करना संभव नहीं होगा। उन्होंने बिहार की भौगोलिक स्थिति, कृषि क्षमता और समृद्ध बौद्धिक विरासत को देश की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन ज्ञान परंपरा को नए विचारों के साथ आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।
निजी निवेश से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सम्मेलन में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने देश की आर्थिक स्थिति पर विचार रखे। उन्होंने शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि देश में 60 मिलियन टन से अधिक चावल और गेहूं का बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिससे खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
26 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि चार दिवसीय सम्मेलन में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कुल 498 शोध पत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें 65 प्रतिशत शोध पत्र महिला शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए। सम्मेलन में संस्कृति, विकास, पोषण और खाद्य सुरक्षा के साथ वर्ष 2030 के बाद सतत विकास लक्ष्यों की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।

दो वर्षों तक चलेगा जागरूकता अभियान
सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि नालंदा विश्वविद्यालय बिहार के विश्वविद्यालयों और राज्य सरकार के सहयोग से विद्यालयों तक सतत विकास लक्ष्यों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी जागरूकता पहुंचाएगा। अगले दो वर्षों में प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में विशेष अभियान चलाकर विद्यार्थियों को विकसित भारत के लक्ष्य और सतत विकास की दिशा में जागरूक किया जाएगा।
