मुंगेर: पुलिस विभाग में वेतन और भत्तों के भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच को लेकर मुंगेर में प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है। बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद मई 2022 से मई 2026 तक की अवधि में पुलिसकर्मियों के वेतन-भत्तों और अन्य मदों में हुए भुगतान का विस्तृत सत्यापन शुरू किया गया है। यह कार्रवाई ई-एचआरएमएस के डाटा के अवलोकन के दौरान सामने आए संभावित अंतर और अनियमितताओं के संकेतों के बाद की जा रही है। हालांकि, मुंगेर में किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यालय स्तर पर अलग-अलग पुलिस कार्यालयों के भुगतान संबंधी डाटा की समीक्षा में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान, एक ही कार्यालय से दोबारा राशि जारी होने और नियमों के विपरीत निकासी जैसी संभावनाओं की जांच जरूरी मानी गई है। इसी क्रम में मुंगेर पुलिस के भुगतान अभिलेखों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध डाटा और वास्तविक भुगतान रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने लाना है।
डीआइजी के निर्देशन में गठित टीम करेगी अभिलेखों की जांच
मामले की पड़ताल के लिए डीआइजी के निर्देशन में जांच टीम गठित की गई है। टीम ई-एचआरएमएस में दर्ज आंकड़ों के साथ भुगतान से जुड़े अभिलेखों, निकासी विवरण और संबंधित दस्तावेजों का मिलान करेगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कर्मचारियों को वेतन और भत्तों के भुगतान में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। किसी भुगतान में अंतर सामने आने पर उसके कारणों की भी पड़ताल की जाएगी।
जांच का दायरा केवल रकम के मिलान तक सीमित नहीं रखा गया है। यदि अभिलेखों के सत्यापन के दौरान किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या गलत भुगतान सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित भूमिका की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि डाटा में दिख रही विसंगतियां वास्तविक वित्तीय गड़बड़ी हैं या रिकॉर्ड के स्तर पर किसी तरह का अंतर।

तीन दिनों में मुख्यालय को देनी है रिपोर्ट
बिहार पुलिस मुख्यालय ने मुंगेर के साथ गया, मुजफ्फरपुर और गोपालगंज में भी भुगतान से संबंधित मामलों की जांच कर तीन दिनों के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सीमित समय में बड़ी संख्या में अभिलेखों का सत्यापन अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसके बावजूद टीम को निर्धारित अवधि में जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी है।
मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि डीआइजी के निर्देशन में टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन फिलहाल दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के मिलान पर केंद्रित है।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
वेतन-भत्तों से जुड़े भुगतान की जांच शुरू होने के बाद पुलिस महकमे में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, अभी किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अनियमितता की पुष्टि अथवा कार्रवाई की बात सामने नहीं आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि भुगतान प्रक्रिया में वास्तविक वित्तीय गड़बड़ी हुई थी या ई-एचआरएमएस डाटा में सामने आई आशंका सत्यापन तक सीमित है। फिलहाल जांच टीम अभिलेखों को खंगालने और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटी है।
