31 मार्च से पहले 700 सरस्वती विद्या निकेतन में स्मार्ट क्लास बनाने का लक्ष्य, हर प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ की योजना
पटना: Bihar के स्कूलों में पढ़ाई के तरीके को डिजिटल बनाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से छठी कक्षा और उससे ऊपर के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने की दिशा में काम कर रही है।
इस योजना को जमीन पर उतारने से पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे विद्यार्थियों को कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान दे सकें। इसके साथ ही राज्य के 700 सरस्वती विद्या निकेतन यानी मॉडल स्कूलों में 31 मार्च से पहले स्मार्ट क्लास तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को विकास भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को इन योजनाओं की तैयारी तेज करने का निर्देश दिया। बैठक में डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं, पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था, संस्कृत विद्यालयों के पुनरुद्धार और शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

कंप्यूटर शिक्षा से पहले शिक्षकों को किया जाएगा प्रशिक्षित
कंप्यूटर शिक्षा को स्कूलों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण अहम कड़ी होगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार, विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने से पहले सभी शिक्षकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए तैयार करना है। योजना के अनुसार, अगले शैक्षणिक सत्र से छठी और उससे ऊपर की कक्षाओं में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में कंप्यूटर शिक्षा के पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण की अवधि, स्कूलों में कंप्यूटर की उपलब्धता और इसे लागू करने की विस्तृत समय-सारिणी का उल्लेख नहीं है। ऐसे में योजना की वास्तविक तैयारी और उसके क्रियान्वयन की रूपरेखा पर आगे के विभागीय फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
31 मार्च तक 700 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास का लक्ष्य
डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ सरकार का जोर स्कूलों में आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी है। शिक्षा मंत्री ने राज्य के सभी 700 सरस्वती विद्या निकेतन यानी मॉडल स्कूलों में 31 मार्च से पहले स्मार्ट क्लास तैयार करने का निर्देश दिया है।

स्मार्ट क्लास के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल सामग्री और दृश्य-श्रव्य माध्यमों से पढ़ाने की सुविधा मिल सकती है। इससे जटिल विषयों को समझाने और कक्षा में पढ़ाई को अधिक संवादात्मक बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ उपकरणों की उपलब्धता, शिक्षकों के प्रशिक्षण और नियमित इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।
मंत्री ने उन आदर्श विद्यालयों में चारदीवारी का निर्माण कराने को भी कहा है, जहां यह सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए विद्यालयों की जरूरी आधारभूत सुविधाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।
इस तरह विभाग के सामने एक साथ दो चुनौतियां हैं—एक ओर स्कूलों को डिजिटल सुविधाओं से लैस करना और दूसरी ओर भवन, सुरक्षा तथा अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करना।
हर प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ की तैयारी
डिजिटल शिक्षा के साथ बिहार सरकार पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। शिक्षा मंत्री ने राज्य के प्रत्येक प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ स्थापित करने के लिए विस्तृत खाका तैयार करने का निर्देश दिया है।

इस दिशा में बक्सर से शुरुआत की जा चुकी है। वहां पहले गुरुकुलम की स्थापना पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह फिलहाल अनुमानित लागत है; अन्य प्रस्तावित गुरुकुलम के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार की जानी हैं।
मंत्री ने बजट पदाधिकारी को अन्य गुरुकुलम विद्यापीठों की विस्तृत योजना बनाने और आगामी बजट में अधिक से अधिक नई योजनाओं को शामिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, सभी प्रमंडलों में इनके निर्माण, संचालन और शैक्षणिक स्वरूप से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बंद पड़े संस्कृत विद्यालयों को फिर शुरू करने की तैयारी
बिहार में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बंद पड़े राजकीय संस्कृत विद्यालयों को दोबारा शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले उन विद्यालयों के जीर्णोद्धार पर ध्यान दिया जाएगा, जिनके पास अपनी जमीन उपलब्ध है।
जमीन की उपलब्धता को प्राथमिकता देने से ऐसे विद्यालयों की पहचान और पुनरुद्धार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किन जिलों के विद्यालयों को पहले शुरू किया जाएगा और इसके लिए कितनी राशि खर्च होगी, इस संबंध में अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

इसके अतिरिक्त, मदरसा बोर्ड के कार्यालय को भी नए भवन में स्थानांतरित करने की तैयारी है। मंत्री के अनुसार, संस्कृत शिक्षा बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड का कार्यालय भी जल्द नए भवन में जाएगा। इससे संबंधित भवन और स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना विभाग के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।
पीएमश्री योजना और शिक्षा भवनों की भी समीक्षा
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के तहत अब तक हुए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। शिक्षा मंत्री ने विभिन्न जिलों में प्रस्तावित शिक्षा भवनों की अद्यतन स्थिति की जानकारी भी ली और संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया।
बैठक में विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं के विकास, विभागीय योजनाओं की प्रगति और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इन योजनाओं की समयबद्ध निगरानी और निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार काम पूरा करना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बिहार दिवस पर पटना में होगा बड़ा आयोजन
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि इस बार बिहार दिवस के अवसर पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। मुख्य समारोह पटना के बापू सभागार में आयोजित करने का प्रस्ताव है। कार्यक्रम में कवि डॉ. कुमार विश्वास को आमंत्रित करने की योजना भी है।

बैठक में विशेष सचिव धर्मेन्द्र कुमार, बिहार शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक नवदीप शुक्ला, माध्यमिक शिक्षा निदेशक नितिन कुमार सिंह, टेक्स्ट बुक के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल, प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक, निदेशक प्रशासन विजय कुमार पांडेय सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, बिहार की शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव डिजिटल शिक्षा, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और पारंपरिक ज्ञान परंपरा को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश हैं। अब इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षकों का प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लास का निर्माण और विद्यालयों के पुनरुद्धार जैसे लक्ष्य तय समय में किस हद तक पूरे हो पाते हैं।
