Aurangabad News: दो जगह नौकरी और वेतन लेने के आरोप में पहले ही हो चुके थे निलंबित, अब सरकारी दस्तावेजों को कथित तौर पर बाहर ले जाने के मामले में प्राथमिकी, जांच के बाद खुलेगा राज
औरंगाबाद। सरकारी दफ्तरों में रखे कागजात केवल फाइलों के पन्ने नहीं होते, उनमें फैसलों, जिम्मेदारियों और पूरे विभाग के कामकाज का रिकॉर्ड दर्ज होता है। ऐसे में जब दशहरा की छुट्टी के दिन सिविल सर्जन कार्यालय से दो झोला कागजात के साथ एक निलंबित किरानी को गिरफ्तार किया जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उन दस्तावेजों में क्या था और उन्हें कार्यालय से बाहर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? औरंगाबाद में सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयी कामकाज और सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल सर्जन कार्यालय के निलंबित किरानी कृष्ण प्रसाद वर्मा को कार्यालय से दो झोला कागजात के साथ गिरफ्तार किया गया है। उन पर छुट्टी के दिन अनधिकृत रूप से कार्यालय में प्रवेश करने, कागजात ले जाने और उनमें छेड़छाड़ करने का आरोप है। सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। फिलहाल, बरामद दस्तावेजों की विस्तृत जांच होनी बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि झोलों में किस तरह के अभिलेख थे और क्या उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई थी।
अंदर से ताला बंद था कार्यालय, दो झोलों में मिले कागजात
सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार के अनुसार, दशहरा की छुट्टी के दौरान निलंबित किरानी कृष्ण प्रसाद वर्मा कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि किरानी अंदर से ताला बंद कर कार्यालय में घुसे हुए थे। उनके पास से दो झोला कागजात बरामद किए गए।

मामले की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई और किरानी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कार्यालय में उनकी मौजूदगी, अंदर से ताला बंद होने और बड़ी मात्रा में कागजात मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किरानी कार्यालय में किस उद्देश्य से पहुंचे थे, दस्तावेज किस शाखा से संबंधित हैं और उन्हें बाहर ले जाने की क्या वजह थी। इन सवालों का जवाब बरामद कागजात की जांच और पुलिस की पड़ताल के बाद ही सामने आएगा।
पहले दो जगह नौकरी करने के आरोप में हुए थे निलंबित
कृष्ण प्रसाद वर्मा का नाम इससे पहले भी एक गंभीर मामले में सामने आ चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन पर औरंगाबाद सिविल सर्जन कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत रहने के साथ-साथ गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी नियमित रूप से दूसरे पद पर काम करने और दोनों जगह से वेतन लेने का आरोप है।
इसी मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर उन्हें निलंबित किया गया था। यानी सिविल सर्जन कार्यालय से कागजात मिलने की घटना से पहले ही उनकी नौकरी और वेतन से संबंधित आरोपों की जांच का मामला सामने आ चुका था।

अब दो झोला सरकारी कागजात के साथ गिरफ्तारी ने प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, पहले के मामले में लगाए गए आरोप और मौजूदा प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अलग-अलग पहलू हैं। दोनों की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
कागजात की जांच से खुल सकते हैं कई अहम सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बरामद दस्तावेज हैं। विभाग के अनुसार, इनकी जल्द जांच कराई जाएगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दस्तावेज किस शाखा से जुड़े हैं, उनमें कौन-कौन से अभिलेख शामिल हैं और उन्हें कार्यालय से बाहर ले जाने के पीछे क्या उद्देश्य था।
यदि जांच में किसी सरकारी दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ या किसी अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन फिलहाल दस्तावेजों की प्रकृति और उनमें किसी बदलाव के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
यह भी जांच का विषय होगा कि निलंबन के बाद किरानी की कार्यालय में प्रवेश की अनुमति या स्थिति क्या थी और वह किन परिस्थितियों में कार्यालय के भीतर पहुंचे। इन पहलुओं से घटना की पूरी कड़ी समझने में मदद मिल सकती है।

गोह थाने में पहले भी दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
कृष्ण प्रसाद वर्मा के खिलाफ इससे पहले गोह थाने में भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने 10 अक्टूबर 2026 को आवेदन देकर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए थे। इस मामले में कांड संख्या 278/26 दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
प्राथमिकी के मुताबिक, वर्मा पर औरंगाबाद सिविल सर्जन कार्यालय में लिपिक के पद पर काम करने के साथ गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर नियमित रूप से कार्य करने और दोनों जगह से वेतन लेने का आरोप है। आवेदन में इसे धोखाधड़ी और जालसाजी बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।
इस मामले की जांच भी पुलिस कर रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। पहले के मामले और मौजूदा गिरफ्तारी से जुड़े तथ्यों का मूल्यांकन जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजर
औरंगाबाद सिविल सर्जन कार्यालय की इस घटना में दो स्तर पर तथ्य सामने आने बाकी हैं। पुलिस को यह जांचना है कि किरानी कार्यालय में किन परिस्थितियों में पहुंचे और बरामद कागजात के मामले में उनकी क्या भूमिका रही। वहीं, स्वास्थ्य विभाग को दस्तावेजों की पहचान कर यह पता लगाना है कि वे किस काम से संबंधित हैं और क्या किसी अभिलेख के साथ छेड़छाड़ हुई है।

दशहरा की छुट्टी में कार्यालय के भीतर निलंबित कर्मचारी की मौजूदगी और दो झोला कागजात की बरामदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। इन सवालों का उत्तर केवल आरोपों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों की जांच और ठोस साक्ष्यों से मिलेगा।
फिलहाल, कृष्ण प्रसाद वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और मामले की जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बरामद कागजात की जांच में क्या सामने आता है और क्या इस घटना के पीछे किसी सरकारी अभिलेख से जुड़ी अनियमितता की पुष्टि होती है।
