Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 19 अक्टूबर 1910: सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर और तारों के भविष्य की चन्द्रशेखर सीमा
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - देश - 19 अक्टूबर 1910: सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर और तारों के भविष्य की चन्द्रशेखर सीमा

19 अक्टूबर 1910: सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर और तारों के भविष्य की चन्द्रशेखर सीमा

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 19, 2026 1:42 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 सप्ताह पहले
सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर
साझा करें

19 अक्टूबर 1910 को जन्मे सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर उन वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जिन्होंने तारों के जन्म, जीवन और अंतिम अवस्था को समझने के लिए खगोल भौतिकी को नई दिशा दी। उनके नाम पर प्रसिद्ध चन्द्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) तारों के विकास और श्वेत बौने तारों के भविष्य को समझने का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। तारों की संरचना और विकास से जुड़ी उनकी सैद्धांतिक खोजों के लिए उन्हें 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मिला।

लाहौर में जन्म, चेन्नई में शिक्षा

चन्द्रशेखर का जन्म 19 अक्टूबर 1910 को लाहौर में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार विद्या और विज्ञान से जुड़ा था। वे महान भारतीय भौतिक विज्ञानी और 1930 के नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रमन के भतीजे थे। चन्द्रशेखर ने मद्रास (आज का चेन्नई) में शिक्षा प्राप्त की और प्रेसीडेंसी कॉलेज से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। आगे के अध्ययन के लिए वे इंग्लैंड गए और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में शोध किया।

यात्रा के दौरान विकसित हुआ एक असाधारण विचार

कम उम्र में ही चन्द्रशेखर ने तारों की भौतिकी और गणितीय सिद्धांतों पर गंभीर काम शुरू कर दिया था। 1930 में इंग्लैंड की समुद्री यात्रा के दौरान उन्होंने श्वेत बौने तारों की स्थिरता पर विचार किया। श्वेत बौना वह सघन अवशेष है, जो सूर्य जैसे तारे के विकास के अंतिम चरण में बन सकता है। उनके विश्लेषण ने दिखाया कि ऐसे तारे का द्रव्यमान कितना अधिक हो सकता है, इससे पहले कि वह अपने ही गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध स्थिर न रह सके।

क्या है चन्द्रशेखर सीमा?

चन्द्रशेखर सीमा श्वेत बौने तारे के अधिकतम स्थिर द्रव्यमान की सीमा है। इसका मान लगभग सूर्य के द्रव्यमान का 1.4 गुना—अक्सर करीब 1.44 सौर द्रव्यमान—बताया जाता है। यह सीमा बताती है कि श्वेत बौना अपने भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉनों के क्वांटम-यांत्रिक दबाव के सहारे गुरुत्वाकर्षण का सामना किस सीमा तक कर सकता है।

Dinman Times ads 728-90

यदि किसी श्वेत बौने का द्रव्यमान इस सीमा से अधिक हो जाए, तो वह सामान्य श्वेत बौने की तरह स्थिर नहीं रह सकता। वास्तविक खगोलीय परिस्थितियों के अनुसार आगे उसका विकास अलग-अलग रूप ले सकता है; कुछ प्रणालियों में विस्फोटक घटनाएँ होती हैं, जबकि अधिक द्रव्यमान वाले तारकीय अवशेषों का गुरुत्वीय संकुचन न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल जैसी अवस्थाओं से जुड़ सकता है। इसलिए चन्द्रशेखर सीमा तारों के जीवन-चक्र को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ये भी पढ़े

28 अक्टूबर 1867: भगिनी निवेदिता का जन्म और भारतीय चेतना में उनका योगदान
28 अक्टूबर 1963: डॉ. उर्जित पटेल का जन्म और RBI गवर्नर के रूप में उनका कार्यकाल
28 अक्टूबर 1955: इंद्रा नुई का जन्म और पेप्सिको में वैश्विक नेतृत्व
28 अक्टूबर 1930: गीतकार अंजान का जन्म, जिनके गीतों में बसता था बनारस

वैज्ञानिक बहस और लंबे शोध-जीवन

चन्द्रशेखर के विचारों को शुरुआत में सभी वैज्ञानिकों ने स्वीकार नहीं किया। ब्रिटिश खगोलशास्त्री आर्थर एडिंगटन ने उनके निष्कर्षों पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई। इसके बावजूद चन्द्रशेखर ने गणितीय विश्लेषण और व्यवस्थित शोध जारी रखा। समय के साथ तारों की संरचना और विकास पर उनके काम का महत्व व्यापक रूप से स्थापित हुआ।

उनका शोध केवल श्वेत बौने तारों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तारकीय गतिशास्त्र, विकिरण के स्थानांतरण, द्रव और चुंबकीय स्थिरता, सामान्य सापेक्षता तथा ब्लैक होल के गणितीय सिद्धांत पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका वैज्ञानिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि किसी एक समस्या पर गहन अध्ययन से शुरू हुई जिज्ञासा विज्ञान के कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

1983 में चन्द्रशेखर को विलियम ए. फाउलर के साथ भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। चन्द्रशेखर को तारों की संरचना और विकास से संबंधित महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक अध्ययन के लिए सम्मानित किया गया, जबकि फाउलर को तारों में होने वाली नाभिकीय अभिक्रियाओं और ब्रह्मांड में रासायनिक तत्वों के निर्माण पर उनके काम के लिए पुरस्कार मिला। यह सम्मान तारकीय विकास को समझने में सिद्धांत और अवलोकन के महत्व को रेखांकित करता है।

Dinman Times ads 728-90

विज्ञान की विरासत

चन्द्रशेखर ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में शोध और अध्यापन में बिताया। वे 21 अगस्त 1995 को 84 वर्ष की आयु में दुनिया से विदा हुए। उनके नाम पर नासा की चन्द्र एक्स-रे वेधशाला का नाम भी रखा गया, जो ब्रह्मांड में उच्च-ऊर्जा वाली घटनाओं का अध्ययन करती है।

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर की विरासत किसी एक सीमा या पुरस्कार तक सीमित नहीं है। उनका काम दिखाता है कि गणित, भौतिकी और खगोलीय अवलोकन मिलकर ब्रह्मांड के सबसे विशाल पिंडों के भविष्य के बारे में गहरी समझ विकसित कर सकते हैं। चन्द्रशेखर सीमा आज भी तारों के अंतिम चरणों, सुपरनोवा और सघन तारकीय अवशेषों के अध्ययन में एक बुनियादी अवधारणा बनी हुई है।

TAGGED:Education NewsIndia NewsNobel PrizeWorld News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर 19 अक्टूबर 1911 19 अक्टूबर 1911: मजाज़ लखनवी—उर्दू शायरी की रोमानी और क्रांतिकारी आवाज़
अगली ख़बर आर. सी. बोराल 19 अक्टूबर 1903: आर. सी. बोराल—भारतीय फिल्म संगीत और पार्श्वगायन के अग्रदूत
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

Student of the Year: After Dark

‘Student of the Year: After Dark’ का ट्रेलर रिलीज, जुड़वां बहनों के डबल रोल में शनाया कपूर

सिस्टर निवेदिता पुण्यतिथि – भारत को समर्पित जीवन

28 अक्टूबर 1867: भगिनी निवेदिता का जन्म और भारतीय चेतना में उनका योगदान

किंग

‘किंग’ के नए पोस्टर में शाहरुख खान का रोमांटिक और इंटेंस अंदाज, रिलीज टलने की अटकलों पर विराम

डॉ. उर्जित पटेल

28 अक्टूबर 1963: डॉ. उर्जित पटेल का जन्म और RBI गवर्नर के रूप में उनका कार्यकाल

इंद्रा नुई

28 अक्टूबर 1955: इंद्रा नुई का जन्म और पेप्सिको में वैश्विक नेतृत्व

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • विदेश
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?