चेन्नई: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनावों में फिर से पेपर बैलेट प्रणाली अपनाने की मांग तेज कर दी है। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों की अहम बैठक बुलाई गई है।
बैठक ऐसे समय हो रही है, जब SIR के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन जारी हैं और स्टालिन की पार्टी चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर अपना राजनीतिक रुख और रणनीति तय कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, DMK ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ पेपर बैलेट की वापसी का मुद्दा भी उठाया है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
DMK ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। SIR को लेकर विपक्षी दलों की प्रमुख चिंता यह है कि पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम न छूटें और प्रक्रिया पारदर्शी तथा जवाबदेह बनी रहे।
DMK ने पेपर बैलेट प्रणाली की वापसी की मांग भी उठाई है। यह मांग विपक्ष के व्यापक चुनाव सुधार अभियान से जुड़ी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, ये राजनीतिक दलों के आरोप और मांगें हैं; इन्हें अपने-आप में किसी अनियमितता का न्यायिक रूप से स्थापित प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

SIR पर सांसदों की बैठक
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन की अध्यक्षता में चेन्नई में होने वाली DMK सांसदों की बैठक में SIR प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। पार्टी हाल के दिनों में इस मुद्दे पर अन्य दलों और क्षेत्रीय नेताओं के साथ सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि DMK ने कांग्रेस से दूरी बनाए रखते हुए एक अलग राजनीतिक मंच या तीसरे मोर्चे की संभावना पर विचार किया है।
यह संभावित गठजोड़ अभी राजनीतिक बातचीत और रणनीतिक आकलन के स्तर पर है। यदि क्षेत्रीय दल और अन्य समूह एक साझा मंच बनाते हैं, तो इससे विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन किसी औपचारिक गठबंधन या अंतिम निर्णय की पुष्टि संबंधित दलों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही मानी जानी चाहिए।
कांग्रेस से दूरी और विपक्षी राजनीति के नए समीकरण
तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ संबंधों में बदलाव के बीच DMK अपनी स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति पर जोर देती दिख रही है। SIR के विरोध को लेकर पार्टी की प्राथमिकताएं और अन्य विपक्षी दलों की रणनीति पूरी तरह समान नहीं हैं। ऐसे में स्टालिन की बैठक से यह संकेत मिल सकता है कि DMK संसद और राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को किस तरह आगे ले जाना चाहती है।
विपक्षी दलों के बीच तालमेल की चुनौती यह है कि चुनावी प्रक्रिया पर साझा चिंता होने के बावजूद गठबंधन, नेतृत्व और आंदोलन की पद्धति पर मतभेद बने रह सकते हैं। DMK के लिए तमिलनाडु के मतदाताओं से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और साथ ही अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखना अहम माना जा रहा है।

परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी नजर
DMK की राजनीतिक रणनीति के बीच संसद के संभावित विशेष सत्र और परिसीमन से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं। पार्टी परिसीमन को लेकर पहले से चिंता जताती रही है। इस बहस का संबंध लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व और भविष्य में सीटों के पुनर्वितरण से जुड़े सवालों से है। महिला आरक्षण से संबंधित विधायी प्रस्तावों के साथ परिसीमन का मुद्दा जुड़ने की अटकलों ने भी राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है।
रिपोर्टों में यह संकेत भी दिया गया है कि केंद्र और DMK के बीच कुछ मुद्दों पर संवाद की संभावना तलाशे जाने की चर्चा है। हालांकि, किसी समझौते या समर्थन को तयशुदा मानना जल्दबाजी होगी। पार्टी की बैठक और संबंधित पक्षों के बयान आगे की दिशा स्पष्ट कर सकते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
DMK की बैठक के बाद तीन बिंदुओं पर विशेष नजर रहेगी: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ पार्टी की औपचारिक मांग, SIR के विरोध में अन्य दलों के साथ संभावित समन्वय, और परिसीमन जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की रणनीति। पेपर बैलेट की वापसी की मांग भी व्यापक चुनाव सुधार बहस का हिस्सा बनी रह सकती है।
फिलहाल, DMK का रुख चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवालों को केंद्र में रखता है। आने वाले दिनों में पार्टी की आधिकारिक घोषणाएं बताएंगी कि वह इन मांगों को संसद, न्यायिक मंचों या राजनीतिक आंदोलन के जरिए किस रूप में आगे बढ़ाती है।

