एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों पर विपक्ष को घेरा; बोले—आपत्ति है तो संवैधानिक रास्ता अपनाएं, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा केवल मांग से नहीं हो सकता
जमुई। वोट चोरी के आरोपों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इसके विरोध में इंडिया गठबंधन के आंदोलन को लेकर जमुई के सांसद अरुण भारती ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी दलील सुप्रीम कोर्ट में रख चुका है। जब संसद में अपनी बात रखने का अवसर था, तब उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। अब सड़कों पर उतरकर अदालत और संसद पर दबाव बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
बुधवार को स्थानीय परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अरुण भारती ने कहा, “सड़कें संसद की पहरेदार जरूर हैं, लेकिन सड़क से संसद नहीं चल सकती और न ही कानून बनाया जा सकता।” उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति की जगह है, लेकिन संवैधानिक मामलों का समाधान तय प्रक्रियाओं के तहत ही होना चाहिए।
एसआईआर पर आपत्ति है तो संवैधानिक रास्ता अपनाएं
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के विरोध पर सांसद ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। चुनाव आयोग भी अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। यदि किसी को एसआईआर की प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसके लिए संवैधानिक रास्ते खुले हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अरुण भारती ने कहा कि किसी नेता के कहने मात्र से संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का इस्तीफा नहीं हो सकता। इस संबंध में फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

राहुल गांधी को विरोध के साथ देश का रोडमैप भी बताना चाहिए
विपक्ष के आंदोलन और राहुल गांधी की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए सांसद ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने के साथ देश के लिए अपना दृष्टिकोण और भविष्य की कार्ययोजना भी सामने रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, केवल विरोध करना पर्याप्त नहीं है; देश के सामने मौजूद सवालों पर स्पष्ट योजना भी बताई जानी चाहिए।
विपक्ष की ओर से मौजूदा हालात की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आपातकाल से किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। अरुण भारती ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों को अपने परिजनों की जानकारी तक नहीं मिल पाती थी। इसके विपरीत, दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। यह टिप्पणी उन्होंने विपक्ष के आपातकाल संबंधी आरोपों के जवाब में की।
युवाओं की आवाज सिर्फ दिल्ली तक सीमित न रहे
युवाओं के आंदोलनों पर अरुण भारती ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी आकांक्षाओं तथा समस्याओं को सुनना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि युवाओं के मुद्दों पर चर्चा केवल दिल्ली में ही क्यों होनी चाहिए? पटना, जमुई, मुंगेर और शेखपुरा जैसे शहरों में भी युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए।
इस संदर्भ में उन्होंने चिराग पासवान के ‘यूथ बोले’ कार्यक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए युवाओं से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान की दिशा में प्रयास किए गए हैं।

ट्रेन रोकने के आंदोलन पर आम लोगों की परेशानी का सवाल
दिल्ली में ट्रेन रोकने के आंदोलन के संदर्भ में सांसद ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि आम लोगों की आवाजाही बाधित न हो। ऐसे आंदोलनों से बच्चों की पढ़ाई और परीक्षार्थियों की सुविधा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार को जरूरी निर्णय लेने पड़ते हैं।
वैशाली नाव हादसे पर जताई संवेदना, जदयू विवाद को बताया आंतरिक मामला
वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत पर अरुण भारती ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों को राहत दिलाने के लिए बिहार और केंद्र सरकार के स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
वहीं, जदयू नेताओं नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच विवाद को उन्होंने पार्टी का आंतरिक मामला बताया। चुनाव में संगठन की भूमिका पर उन्होंने कहा कि बेहतर चुनावी प्रदर्शन के लिए मजबूत संगठन जरूरी है और उनके अनुसार, एनडीए का संगठन मजबूत है।
अरुण भारती के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि एसआईआर और चुनाव से जुड़े विवादों पर विपक्ष को संवैधानिक प्रक्रियाओं का सहारा लेना चाहिए। साथ ही, उन्होंने विपक्ष से आंदोलन के साथ देश के लिए अपना वैकल्पिक दृष्टिकोण भी स्पष्ट करने की अपेक्षा जताई।

