नवादा के वारिसलीगंज में सांप के काटने से मासूम की मौत, रात 8 बजे हुई थी घटना; पावापुरी ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम, गांव में पसरा मातम
वारिसलीगंज। बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र में सांप के काटने से 13 वर्षीय बालक की मौत हो गई। घटना मोहद्दीनपुर पंचायत के बल्लोपुर गांव की है, जहां मंगलवार की रात शुभम कुमार को सांप ने काट लिया। परिजन बच्चे की जान बचाने के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में जुट गए। इस दौरान कीमती वक्त निकल गया। बाद में जब उसे इलाज के लिए पावापुरी अस्पताल ले जाया जाने लगा, तो रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक का माहौल है।
मृतक शुभम कुमार गांव निवासी मुकेश चौधरी का बेटा था। महज 13 साल की उम्र में उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस बच्चे को बचाने की उम्मीद में परिजन इधर-उधर भटकते रहे, उसे अस्पताल तक पहुंचाने से पहले ही परिवार ने खो दिया।
रात करीब आठ बजे सांप ने काटा, बच्चे को बचाने के लिए भटकते रहे परिजन
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की शाम करीब आठ बजे शुभम को सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिजन घबरा गए। बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए इधर-उधर जाने लगे। इसी क्रम में वे मकनपुर पहुंचे।
इस पूरी प्रक्रिया में इलाज शुरू होने में देरी हुई। बाद में परिजन शुभम को पावापुरी स्थित अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। समय पर चिकित्सा सहायता मिल पाती, तो क्या बच्चे की जान बच सकती थी, इसका जवाब अब नहीं मिल सकता। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि सांप किस प्रकार का था और बच्चे की मौत का चिकित्सकीय कारण क्या दर्ज किया गया।

अंधविश्वास के कारण इलाज में देरी, सर्पदंश में हर मिनट अहम
सर्पदंश यानी सांप के काटने की घटना में समय पर सही चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी है। कई बार सांप के काटने के बाद परिजन घबराहट में झाड़-फूंक या घरेलू उपायों का सहारा लेने लगते हैं। लेकिन ऐसे उपाय सांप के विष का इलाज नहीं हैं और इनके चक्कर में अस्पताल पहुंचने में देरी जानलेवा हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सांप काटने पर पीड़ित को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाया जाए, जहां चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो। पीड़ित को शांत रखें, काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें और उसे चलने न दें। घाव को काटना, विष चूसने की कोशिश करना, कसकर रस्सी बांधना या झाड़-फूंक पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।
परिवार में कोहराम, बल्लोपुर गांव में मातम
शुभम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। कम उम्र में बच्चे की मौत से परिजनों का दुख असहनीय हो गया है। गांव में भी शोक का माहौल है। एक परिवार की उम्मीदों और सपनों को इस हादसे ने हमेशा के लिए छीन लिया।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि सांप काटने जैसी आपात स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना कितना जरूरी है। शुभम की मौत के मामले में घटना से जुड़े अन्य विवरण और चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध होने पर ही पूरे घटनाक्रम की अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

